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    अधिकारियों को कई केंद्रों में लटकते मिले ताले

    Published: Mon, 20 Mar 2017 11:36 PM (IST) | Updated: Mon, 20 Mar 2017 11:36 PM (IST)
    By: Editorial Team

    बड़ामलहरा। नईदुनिया प्रतिनिधि

    जिला कलेक्टर ने प्रौढ़ साक्षरता कक्षाओं में पढ़ने वाले शिक्षार्थियों की एक दिवसीय साक्षरता परीक्षा के निर्देश जारी किए थे। परीक्षा में 15 वर्ष से अधिक उम्र के निरक्षर लोगों की परीक्षा ली जाना थी किंतु रविवार को निरीक्षण के दौरान विकासखंड क्षेत्र के अनेक केंद्र पर तालाबंदी पाई गई और केंद्राध्यक्ष व प्रेरक नदारद पाए गए।

    साक्षरता दर को बढ़ाने के लिए विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी, संकुल प्राचार्य, जनशिक्षा केन्द्र प्रभारी, सचिव ग्राम पंचायत लोक शिक्षा समिति को अधिक से अधिक निरक्षरों को प्रेरित कर नव साक्षरता परीक्षा में सम्मलित करवाने तथा शत प्रतिशत साक्षरता लाने के लिए निर्देश दिए गए थे। विभाग की मानें तो विकासखंड क्षेत्र में कुल 3 हजार परीक्षार्थियों को 75 केंद्रो पर सुबह 10 से शाम 05 बजे तक परीक्षा संपन्न कराने का लक्ष्य तय किया गया था। इसमें प्रत्येक ग्राम पंचायत स्तर पर संचालित शासकीय प्राथमिक व माध्यमिक शालाओं को परीक्षा केंद्र बनाया गया और यहाँ पदस्थ हेडमास्टरों को केंद्राध्यक्ष बनाया गया था। सफल तरीके से परीक्षा संपन्न कराने के उद्देश्य से केंद्र पर महिला एवं पुरूष प्रेरक को ड्यूटी पर तैनात किया गया था। जिला निरीक्षण की टीम में शामिल एपीसी प्रदीप खरे व बीएसी महेश विश्वकर्मा ने जानकारी में बताया कि रविवार को उनके द्वारा विकासखंड क्षेत्र के कुल 7 परीक्षा केंद्रों का निरीक्षण किया गया जिसमें मुंगवारी, बंधा, परा एवं मैलवार केंद्र पर विधिवत परीक्षा संचालित पाई गई, जबकि शासकीय माध्यमिक शाला सडवा केंद्र बंद पाया गया। निरीक्षण दल दोपहर करीब एक बजे धनगुवां माध्यमिक शाला पहुंचा तो केंद्राध्यक्ष रामनरेश शुक्ला वहाँ उपस्थित नही थे, जबकि केंद्र के बाहर अनेक परीक्षार्थी खड़े हुऐ थे। इसी सूरजपुरारोड परीक्षा केंद्र बंद था। बताया जाता है कि केंद्राध्यक्ष लखन रैकवार ने प्रश्नपत्र ही नही लिए थे और वह शाला में उपस्थित नही हुए। इस वजह से यहाँ परीक्षार्थी परीक्षा से वंचित रह गए।

    कागजों में ही होती पढ़ाई

    विकासखंड क्षेत्र में निरक्षरों को साक्षर करने की योजना केवल कागजों तक ही सीमित है। बताया जाता है कि निरक्षरों को शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए 79 ग्राम पंचायतो में 116 महिला पुरूष प्रेरक नियुक्त है। वही ग्रामीणो की मानें तो गांव में पूरे वर्ष के दौरान एक भी दिन प्रौढ़ शिक्षा के तहत निरक्षरों को साक्षर नही किया जाता। जिस प्रकार से इनकी शिक्षा कागजों से होती उसी प्रकार से परीक्षाएं भी कागजों में करा दी जाती है।

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