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    सीटें बढ़ाने के बाद भी नहीं मिले दाखिले, पाठ्यक्रमों का कट ऑफ बढ़ा

    Published: Mon, 14 Aug 2017 04:02 AM (IST) | Updated: Mon, 14 Aug 2017 04:02 AM (IST)
    By: Editorial Team

    भोपाल नवदुनिया प्रतिनिधि।

    उच्च शिक्षा विभाग द्वारा प्राचार्य स्तर पर कॉलेजों की दस फीसदी सीटें बढ़ाने के फरमान के बाद भी बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं को दाखिला नहीं मिल पा रहा है। इस बार अधिकांश कॉलेजों में विभिन्न पाठ्यक्रमों का कट ऑफ बढ़ने की वजह से ऐसी स्थिति बनी है। स्थिति यह है कि जिन कॉलेजों में 50 फीसदी में भी बीकॉम मे दाखिला हो जाता था वहां 65 फीसदी से कम अंक वाले छात्रों को दाखिला नहीं मिल पा रहा है।

    इसकी मुख्य वजह यह है कि इस बार इंजीनियरिंग में प्रवेश की स्थिति ठीक नहीं है। इसका सीधा असर यह हुआ कि बीएससी, बीकॉम जैसे पाठ्यक्रमों में दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है और कट ऑफ मार्क्स ऊंचे गए हैं। ऐस में उन छात्रों को सबसे ज्यादा दिक्कत आई है कि जिनके हायर सेकंडरी में 55 फीसदी या उससे कम अंक हैं।

    प्राइवेट छात्र बनें या अल्पसंख्यक कॉलेजों में लें दखिला

    राजधानी के एमवीएम कॉलेज में सीएलसी में बीएससी पीसीएम का कट ऑफ करीब 70 प्रतिशत गया है। बीएससी के अन्य कॉबिनेशन के अधिकांश पाठ्यक्रमों का कट ऑफ भी 65 प्रतिशत तक गया है। ऐसी स्थिति में इससे कम अंक वाले विद्यार्थियों को वेटिंग में रखा गया है। ऐसे में जिन छात्रों का दखिला नहीं हो पाएगा उन्हें स्वाध्यायी छात्र के रूप में पढ़ाई करना होगी। अगर वे नियमित छात्र के रूप में पढ़ना चाहते हैं तो उन्हें अल्पसंख्यक कॉलेज जैसे बीएसएसएस, सैफिया आदि में दाखिला लेना होगा।

    शहर के अन्य कॉलेजों में भी एडमिशन को लेकर ऐसी ही स्थिति बनी हुई है। यहां भी बीकॉम में ओबीसी का कट ऑफ करीब 65 प्रतिशत रहा है। ऐसी दशा में बड़ी संख्या में ऐसी छात्राएं हैं जिन्हें दाखिला नहीं मिल पाया है। छात्रा श्वेता ने बताया कि उसके 52 प्रतिशत थे लेकिन अब तक दाखिला नहीं मिला है। कट ऑफ काफी ज्यादा गया है। यही स्थिति नूतन, गीतांजलि और बनेजीर कॉलेज में भी बनी हुई है। अधिकांश कॉलेज में बीकॉम के कट ऑफ मार्क्स 60 प्रतिशत के ऊपर हैं। यही स्थिति बीएससी में भी बनी हुई है।

    कई छात्रों ने दाखिला लेने के बाद भी भरे फार्म

    इधर, सीएलसी के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि कई छात्रों ने किसी कॉलेज में दखिला लेने के बाद भी सीएलसी में भी आवेदन कर दिया। एमवीएम में काउंसलिंग का कार्य देख रहे डॉ.संजय दीक्षित बताते हैं कि बहुत से ऐसे छात्र सामने आए हैं जो कहीं दाखिला ले चुके हैं। लेकिन वे चाहते हैं कि उन्हें मनपसंद कॉलेज मिल जाए इसलिए फिर से फार्म भर दिया। ऐसे में वेटिंग कुछ कम हो सकती है। उन्होंने बताया कि इस बार पिछले सालों के अपेक्षा प्रतिस्पर्धा बढ़ी है।

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