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    मानसून नजदीक देख माफिया धड़ल्ले से कर रहे रेत खनन

    Published: Tue, 20 Jun 2017 10:40 PM (IST) | Updated: Tue, 20 Jun 2017 10:40 PM (IST)
    By: Editorial Team
    20dm01 20 06 2017

    मड़ियादो। नईदुनिया न्यूज

    जिले की हटा तहसील से लेकर छतरपुर जिले के पंडोंन तक बहने वाली सुनार नदी रेत माफियाओं के लिए वरदान साबित है। 50 किमी के इस बहाव में नदी के एक दर्जन से अधिक घाटों पर रेत उत्खनन किया जाता है। कुछ खदान स्वीकृति के अलावा सभी जगह से अवैध तरीके से रेत निकाली जा रही है। अवैध तरीके से संचालित हो रहे घाटों पर प्रतिदिन दो सौ अधिक ट्रैक्टर अवैध खनन में लगे हुए हैं। यह रेत खनन न सिर्फ निर्माणाधीन कार्यों के लिए किया जा रहा है। बल्कि मानसून के नजदीक आने के चलते भी काफी मात्रा में रेत का संग्रहण भी किया जा रहा है। इस पूरे क्षेत्र में मात्र एक खनिज अधिकारी द्वारा कभी कभार दबिश दी जाती है। यह दबिश भी किसी नाटक की तरह होती है। क्योंकि अधिकारी के आने के पहले ही सूचना आ जाती है और माफिया सतर्क हो जाते हैं। इस नदी से निकाली गई रेत पहले की अपेक्षा 200 से 500 रुपए बढ़ाकर ढाई से तीन हजार रुपए प्रति ट्राली बेची जा रही है।

    हारट के पास रेत खदान लेकर सरसुआ के पास, कटन घाट के पास स्वीकृत रेत खदान के अलावा अन्य क्षेत्र, चदेंना घाट के पास, पाली, मुहरई, दिगी, मुराछ आदि घाटों पर प्रतिदिन रेतखनन का कार्य हो रहा है। इन घाटों पर मजदूरों के माध्यम से रेत छानकर माफियाओं के ट्रैक्टरों में भरी जाती है। सुनार नदी से निकाली गई रेत से बने गड्ढे यहां हुए उत्खनन को साफ दिखाते हैं।

    परिवहन कर खुलेआम संग्रहण

    नदी के सूखते ही रेत माफियाओं द्वारा जमकर रेत निकालने का कार्य शुरू कर दिया और खुलेआम परिवहन के साथ संग्रहण भी किया गया, लेकिन जिस स्तर से क्षेत्र में प्रतिदिन सैकड़ों ट्रैक्टर ट्राली उत्खनन कार्य करने में लगे हैं। उस स्तर से खनिज विभाग द्वारा एक भी ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। इतना जरूर है कि दौरे पर आए अधिकारी द्वारा एक या दो ट्रैक्टर ट्राली पकड़कर अपनी कार्रवाई पूरी कर ली जाती है।

    यह घाट बने उत्खनन के गढ़

    सुनार नदी में स्वीकृत खदान हारट, कटनघाट और पुल के ऊपर वाले भाग में स्वीकृत खदान क्षेत्र से बढ़कर खनन कर रेत निकाली गई है। इसके अलावा सर्वाधिक रेत निकालने का कार्य पाली, मुराछ, मुहरई, दिगी, खेराखेरी घाटों पर हो रहा है। क्षेत्र के लगभग आधा सैकड़ा ट्रैक्टर ट्राली इन घाटों से रेत परिवहन करने में दिन रात लगी रहती हैं। इन घाटों से निकाली गई रेत मुराछ, खेराखेरी, दिगी, निवास, वर्धा, मड़ियादो, गैसाबाद, दादपुर, खमरगौर, शिवपुर, मादो, मुहरई, रजपुरा, नारायणपुरा, ढूला, ढोगरपुरा, दमोतीपुरा सहित कई गांव में परिवहन की जा रही है और भंडारण भी किया जा रहा है।

    इधर वराना में उत्खनन

    नाले से नदी का रूप धारण करने वाले वराना में छतरपुर और दमोह जिले के रेत माफियाओं द्वारा अवैध रेतखनन किया जा रहा है। बफरजोन में शामिल होने के बाद इस नदी के पाटन और चौंरईया घाट से प्रतिदिन दो दर्जन से अधिक ट्रैक्टर रेत निकालने में लगे हुए हैं। 2016 में इस घाट से रेत निकालने और परिवहन को लेकर वनकर्मियों द्वारा कार्रवाई की गई थी। उसके बाद एक साल बीत जाने के बाद अभी तक कोई भी कार्रवाई नहीं की गई है।

    कम लागत अधिक मुनाफा

    रेत के व्यापार में माफियाओं को प्रति ट्राली डेढ़ हजार रुपए तक की बचत हो जाती है। रेत माफियाओं द्वारा यह रेत दूरी के हिसाब से बेची जाती है। नदी में यह रेत निकालने के एवज में मजदूरों को पांच रुपए प्रति ट्राली के हिसाब से पैसे दिए जाते हैं।

    नदी के किनारे तोड़ बनाए रास्ते

    सुनार नदी में दबंग रेत माफियाओं द्वारा ना सिर्फ हिस्से बांटकर अवैध उत्खनन को अंजाम दिया गया है। बल्कि परिवहन सुविधा को देखते हुए नदी के किनारों का समतली करते हुए रास्ते तक बनाए गए हैं। सरसुआ से दिगी घाट तक कई दबंग अवैध तरीके से स्वीकृत खदान की भांति कब्जा जमाकर खनन करने में लगे हैं।

    .........

    एक या दो दिन के अंदर एसडीएम और एसडीओपी के साथ मिलकर क्षेत्र में कार्रवाई की जाएगी। इस संबंध में अधिकारियों से बात की जाएगी।

    - मेहताब सिंह रावत, खनिज अधिकारी

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