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    ढाई हजार साल पुराने सिक्कों के जरिए इतिहास से रूबरू हुए

    Published: Fri, 17 Feb 2017 04:03 AM (IST) | Updated: Fri, 17 Feb 2017 04:03 AM (IST)
    By: Editorial Team

    बागली। निज प्रतिनिधि

    नगर के शासकीय महाविद्यालय में बुधवार को महिदपुर उज्जैन के अश्विनी शोध संस्थान के डॉ. आरसी ठाकुर ने सिक्कों की प्रदर्शनी लगाई। प्रदर्शनी में 10 हजार सिक्के लाए गए, लेकिन सभी सिक्कों का प्रदर्शन नहीं हो सका। लगभग 2500 वर्ष पुराने से लेकर भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा कुछ वर्ष पूर्व तक जारी किए सिक्के शामिल थे। इसमें कई सिक्कों का वैश्विक दाम 50 हजार से लेकर 5 लाख रुपए तक था। 1 हजार रुपए के सिक्के ने आगंतुकों को बहुत आकर्षित किया। कई सिक्के ऐतिहासिक दृष्टिकोण से बहुत महत्वपूर्ण थे। इनमें मौर्य-मगध काल, गुप्तकाल व शक राजाओं के सिक्के भी थे।

    अतिथि एसडीएम पुरुषोत्तम कुमार, सांसद प्रतिनिधि अभयकुमार बड़ौला, नप अध्यक्ष अमोल राठौर, नप उपाध्यक्ष प्रतिनिधि हरजीत ग्रेवाल, भाजपा किसान मोर्चा प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य मोतीलाल पटेल व पूर्व एल्डरमैन कैलाश कांकाणी थे। प्रदर्शनी के पहले फेज में सिक्कों के महत्व पर व्याख्यान हुआ। इसमें सिक्कों के उद्भव, चलन की आवश्यता, सिक्के बनाने की पुरानी तकनीकों व सिक्कों पर अंकित चिन्हों पर शासकीय महाविद्यालय के व्याख्याता संदीप भटनागर, जीवनबाला लुणावत, केएस परमार, आरती बरोठिया सहित अतिथियों ने विचार प्रकट किए। डॉ. ठाकुर ने सिक्कों के इतिहास को सविस्तार समझाया। प्रदर्शनी में विजय त्रिपाठी, गोपालकृष्ण बाजपेयी व दीपक शर्मा का योगदान रहा।

    विक्रम संवत्‌ के प्रर्वतक विक्रमादित्य राजा थे

    डॉ. ठाकुर ने बताया विक्रम संवत्‌ के प्रर्वतक विक्रमादित्य राजा थे। ऐतिहासिक रूप से उनकी उपस्थिति को कहानी ही माना जाता है, लेकिन हमने सिक्कों के माध्यम से यह प्रमाणित किया है कि वे चक्रवर्ती सम्राट थे और उनके काल में सिक्कों का चलन था। प्रदर्शनी में मोहम्मद गजनवी द्वारा चलाया गया सिक्का भी शामिल था। इस पर संस्कृत भाषा में गजनवी का कलमा अंकित था। इसी क्रम में मोहम्मद गौरी द्वारा चलाए गए सिक्के में हिंदू राजाओं की तरह नाम के आगे श्री अंकित कर श्री सुल्तान छपा था। मुगल शासक अकबर द्वारा जारी सिक्के में सीता-राम की आकृति, सिक्के पर सीता-राम भी लिखा हुआ था। गुप्तवंश के राजा द्वारा रानी को सींदूर दान करने वाला सिक्का लगभग 1700 वर्ष पुराना था। प्रदर्शनी में हिंदू राजा पृथ्वीराजसिंह चौहान व मोहम्मद गौरी द्वारा जारी संयुक्त सिक्के ने भी सबका ध्यान आकर्षित किया। मुगल शासक जहांगीर द्वारा भारतीय ज्योतिष से प्रभावित होकर जारी किए राशि अंकित सिक्के भी थे। राजा विक्रमादित्य द्वारा भगवान शिव व पार्वती के विवाह का चित्र अंकित लगभग 2100 वर्ष पुराना सिक्का भी प्रदर्शनी में शामिल था। मोर्य काल के जल संग्रहण को प्रदर्शित करने वाले लगभग 2300 वर्ष पुराने सिक्के भी प्रदर्शनी का हिस्सा थे। इस दौरान सम्राट अशोक जो कि मालवा के गर्वनर हुआ करते थे। उनके नाम के सम्मुख श्री लगाने का प्रयोग शक राजा रूद्रसिंह ने किया था। यह सिक्का 2 हजार वर्ष पुराना है।

    सिंहस्थ में प्रदर्शनी देखकर लगा शौक

    चर्चा करते हुए डॉ. ठाकुर ने बताया वास्तव में सिक्के ऐतिहासिक दस्तावेज हैं। ये उस काल की संस्कृति को प्रदर्शित करते हैं। साथ ही यह भी बताते हैं कि प्राचीन काल में विनयम को लेकर लोग जागरूक थे। उन्होंने यह भी बताया सिंहस्थ में भारतीय स्टेट बैंक ने सिक्कों की प्रदर्शनी लगाई थी। उसे देखकर ही सिक्के एकत्र करने का शौक लगा। कई सिक्के सुनारों व बर्तन का व्यापार करने वालों से भी खरीदे। उज्जैन जिले में क्षिप्रा नदी में कई सिक्के प्राप्त हुए।

    और जानें :  # dewas # bagali # exhibition
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