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    त्रिलोक नगर में श्रद्धालुओं ने की गोवर्धन पर्वत की पूजा

    Published: Mon, 19 Jun 2017 03:58 AM (IST) | Updated: Mon, 19 Jun 2017 03:58 AM (IST)
    By: Editorial Team

    -आज होगा कृष्ण-रुक्मिणि विवाह

    देवास। नईदुनिया प्रतिनिधि

    त्रिलोक नगर इटावा में चल रही श्रीमद भागवत कथा में गोवर्धन पर्वत की पूजा श्रद्धालुओं द्वारा गई। गोवर्धन पर्वत का प्रसंग सुनाते हुए वृंदावन से पधारे पं. हरिहर महाराज ने कहा कि गोवर्धन का अर्थ है गौ संवर्धन। भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत मात्र इसलिए उठाया था कि पृथ्वी पर फैली बुराइयों का अंत केवल प्रकृति व गौ संवर्धन से ही हो सकता है। अगर हम बिना कर्म करे फल की प्राप्ति चाहेंगे तो वह कभी नहीं मिलेगा, कर्म तो हमें करना ही होगा। इंद्र के कुपित होने पर श्रीकृष्ण ने गोवर्धन उठा लिया था। इसमें ब्रजवासियों ने भी अपना-अपना सहयोग दिया। श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों की रक्षा के लिए राक्षसों का अंत किया तथा ब्रजवासियों को पुरानी चली आ रही सामाजिक कुरीतियों को मिटाने व निष्काम कर्म द्वारा अपना जीवन सफल बनाने का उपदेश दिया। कथा में श्रीकृष्ण की बाललीलाओं का वर्णन भी किया। इस दौरान मंदिर प्रांगण में गिरीराज पर्वत की झांकी सजाई गई एवं छप्पन भोग लगा कर श्रद्धालुओं को प्रसादी वितरित की गई। अनिलसिंह ठाकुर ने बताया 19 जून को श्रीकृष्ण रूक्मिणि विवाह व रासलीला का आयोजन होगा। इस अवसर पर महंत भगवानदास महाराज, नवनीत दास महाराज, आचार्य अमित त्रिपाठी, बाबूलाल राठौर, सत्यनारायण सोनी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुजन उपस्थित थे।

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