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    ऑनलाइन भर्ती प्रक्रिया का विरोध करेंगे अतिथि, 22 को देंगे ज्ञापन

    Published: Tue, 20 Jun 2017 09:34 PM (IST) | Updated: Tue, 20 Jun 2017 09:34 PM (IST)
    By: Editorial Team

    देवास। संयुक्त अतिथि शिक्षक संघ की बैठक मल्हार स्मृति गार्डन में मंगलवार को हुई। इसमें सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि अतिथि शिक्षकों को शासन बिना ऑनलाइन प्रक्रिया के भर्ती करे तथा पूर्व में कार्यरत अतिथि शिक्षकों को यथावत रखे। शासन अतिथि शिक्षकों को रखने का आदेश इसी माह अतिशीघ्र जारी करे। इसके सहित अन्य बिंदुओं पर चर्चा की गई। अतिथि शिक्षक संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि उक्त मांगों को लेकर संघ के नेतृत्व में 22 जून को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन कलेक्टर व जिला शिक्षाधिकारी को दिया जाएगा। मांगें पूरी नहीं होने पर जिलास्तर पर धरना प्रदर्शन व आंदोलन किया जाएगा। बैठक में जिलाध्यक्ष सुमंत दुबे, उपाध्यक्ष कमल परमार, देवास ब्लॉक अध्यक्ष नितेश जागीरदार, जिला सचिव कृष्णपालसिंह राजपूत, पंकज भावसार, मीनाक्षी कानूनगो, सीमा सिंगावदिया, राखी कपूर, गुलनार खान, मनीष तेजवानी, दातारसिंह बैस, सोहन पाटीदार, ओमप्रकाश झरोका, अंजलि चौहान, दिलीप सिकरवार, राजकुमार गौड़ मुकेश मालवीय आदि उपस्थित थे। जानकारी जिला मीडिया प्रभारी संतोष चौहान ने दी।

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    हमारी हर पल की गतिविधियों पर ईश्वर की निगाह रहती है

    -भागवत कथा में पं. हरिहर महाराज ने कहा

    देवास। मित्रता में जाति, धर्म, ऊंच-नीच, गरीबी-अमीरी नहीं होती। मित्रता में छल, कपट भी नहीं होता। मित्रता हर रिश्ते से ऊपर होती है। इस बात को स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने सुदामा से अपनी दोस्ती का निर्वहन कर उदाहरण प्रस्तुत किया है। उक्त उद्गार त्रिलोक नगर इटावा स्थित त्रिलोकेश्वर महादेव मंदिर में चल रही श्रीमद भागवत कथा में मंगलवार को श्रीकृष्ण-सुदामा चरित्र का प्रसंग सुनाते हुए पं. हरिहर महाराज ने व्यक्त किए।

    उन्होंने श्रीकृष्ण और सुदामा चरित्र का इस प्रकार मनमोहक वाचन किया कि लोगों की आंखों से अश्रुधारा बहने लगी। उन्होंने कथा में अनेकों सीख भी दीं। कृष्ण और सुदामा की दोस्ती की कथा का वर्णन करते हुए बताया कि गुरु सांदीपनी के आश्रम में एक बार गाय चराने के दौरान सुदामा ने कृष्ण के हिस्से के चने खा लिए। इस कारण उन्हें लंबे समय तक गरीबी का सामना करना पड़ा। यदि कोई अपने मित्र को धोखा देता है तो उसे इसका खामियाजा यहीं भुगतना पड़ता है। हमारी हर पल की गतिविधियों पर ईश्वर की निगाह रहती है। दोस्ती सदैव कृष्ण की तरह निभानी चाहिए। भगवान श्रीकृष्ण ने अपने मित्र सुदामा को उसकी आवश्यकता को भांपकर बिना मांगे मदद की। आज किसी दोस्त को जरूरत होती है तो दोस्त इस बात का इंतजार करता है कि वह उससे मांगे और फिर उस धन पर वह उससे ब्याज वसूल करे। अनिलसिंह ठाकुर ने बताया कि कथा की आज पूर्णाहुति होगी। कथा में मुख्य रूप से पं. अतुल व्यास, रोहित परमार, अनिल पंड्या, विक्रमसिह दरबार, अनिता द्विवेदी, रमा नागर, अनिता मोदी, मंजू प्रजापति, मधु प्रजापत सहित बड़ी संख्या में श्रद्घालुजन उपस्थित थे।

    और जानें :  # dewas # katha
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