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    न दुल्हन ने रचाई मेहंदी, न दूल्हे के सिर पर सेहरा, 16 मिनट में बने जीवनसाथी

    Published: Wed, 17 May 2017 03:59 AM (IST) | Updated: Wed, 17 May 2017 06:04 PM (IST)
    By: Editorial Team
    hindu marriage 2017517 113812 17 05 2017

    राजगढ़। ग्राम बोला में मंगलवार को विवाह आयोजन एक मिसाल बन गया। शादी में दुल्हन ने न तो हाथ में मेहंदी रचाई और न ही दूल्हे के सिर पर सेहरा सजा था। न तो बैंडबाजा था, न ही दुल्हन को साथ ले जाने के लिए सजी गाड़ी आई और न ही कोई विशेष तैयारियां की गईं।

    हालांकि दूल्हे के साथ बाराती काफी संख्या में मौजूद थे। इस आयोजन के साक्षी बने लोग आश्चर्यचकित रह गए। गांव में पहली मर्तबा हुई इस तरह की शादी को देखने के लिए सैकड़ों लोग उपस्थित थे।

    विवाह आयोजन कबीर परमेश्वर भक्ति मुक्ति ट्रस्ट द्वारा कराया गया था। मात्र 16 मिनट 34 सेकंड में 4 जोड़े जीवनसाथी बन गए। यह विवाह सामाजिक कुरीतियों को लांघकर किया गया। शादी बिना किसी दहेज व जात-पात और बिना किसी दिखावे व खर्च के हुई।

    संत रामपाल के चित्र के समक्ष होता है विवाह

    ट्रस्ट के राजूदास चारण व राकेशदास चारण ने बताया कि संत रामपालदासजी महाराज के चित्र के सम्मुख वर-वधू को बैठाया जाता है। इस दौरान ऑडियो पर रामपालजी की सुक्ष्मवेद वाणी सुनाई जाती है। दोपहर 1.30 से विवाह प्रारंभ होकर 16.34 मिनट में संपन्न हुआ।

    मंगलवार को छोगालाल निवासी बिड़ भोपावर का सवीता निवासी एहमद के साथ, राजेश नि. गड़वाड़ा का रंभा नि. एहमद के साथ, राहुल नि. देदला (फूलकी पाड़ा) का लक्ष्मी नि. कुमारीयाखेड़ी के साथ, बबलू नि. चौकीरूंडा का अनिता नि. कुमारीयाखेड़ी के साथ विवाह हुआ।

    फिजूलखर्च रोकना उद्देश्य

    ट्रस्ट के विक्रमदास निनामा, कैलाशदास निनामा व दिलीपदास का कहना है कि समाज में जब किसी के यहां शादी होती है तो वे लाखों रु. खर्च कर देते हैं। दिखावा करते हैं।

    वहीं लड़की के विवाह में पिता की ओर से दहेज देने के बाद भी लड़की पराई हो जाती है। समाज की इसी सोच को बदलने के लिए ट्रस्ट द्वारा जगह-जगह बिना किसी खर्च के विवाह संपन्न कराया जा रहा है।

    अब तक 10 जोड़ों का हुआ विवाह

    ट्रस्ट द्वारा अब तक 10 जोड़ों का विवाह संपन्न कराया जा चुका है। विवाह में व्यसन छोड़ने का उपदेश दिया जाता है। ट्रस्ट द्वारा 11 मई को 6 जोड़े, इसके पूर्व 2 जोड़े व मंगलवार को 4 जोड़ों का विवाह कराया गया। जबकि पेटलावद तहसील में 17 व 18 मई को 2 जोड़ों को विवाह इसी तरह से कराया जाएगा।

    खास-खास

    -इस तरह अब तक 10 जोड़े बने जीवनसाथी।

    -फिजूलखर्ची रोकना मुख्य उद्देश्य।

    -16.34 मिनट में हुआ विवाह।

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