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    जो गांव पहले डूबेगा, वहां के लोगों को आखिर में करेंगे शिफ्ट

    Published: Fri, 19 May 2017 10:38 PM (IST) | Updated: Sat, 20 May 2017 07:24 AM (IST)
    By: Editorial Team
    susari news 19 05 2017

    शैलेंद्र लड्ढा-दीपक वाल्गे, सुसारी-निसरपुर (धार)। निसरपुर ब्लॉक का नर्मदा किनारे बसा गांव करोंदिया सबसे पहले नर्मदा की बाढ़ और बैक वाटर की चपेट में आता है। यहां से नर्मदा से मात्र 500 मीटर दूर है। बाढ़ की स्थिति में गांव टापू बन जाता है। 2013 की बाढ़ में भी करोंदिया सबसे पहले डूबा था। बावजूद इसके उसे पुनर्वास स्थल पर बसाने का काम नर्मदा विकास विभाग तीसरे और अंतिम चरण में करेगा। आश्चर्य की बात यह है कि इसके आसपास के ग्रामों को पहले और दूसरे चरण में ही शिफ्ट कर दिया जाएगा।

    ग्राम करोंदिया ग्राम पंचायत कोठड़ा के अंतर्गत आता है। यहां के 105 परिवारों में से 78 को निसरपुर के पुनर्वास स्थल पर बसाना है। मिनिमम हट लेवल यानी बांध के पानी से डूबने वाले ग्राम के पहले मकान के पानी का लेवल यहां 141.48 मीटर तय है। बांध का नया बैक वाटर लेवल 138.96 मीटर बताया गया है। विभाग के इस नए मिनिमम हट लेवल के हिसाब से तो यह ग्राम डूब के लेवल से ही बाहर हो जाना चाहिए।

    आसपास के गांव पहले डूबेंगे

    ग्राम करोंदिया के आसपास बसे कोटेश्वर, कोठड़ा, खापरखेड़ा, गेहलगंाव, कड़माल, चिखल्दा और निसरपुर पहले डूब में आने से इस ग्राम तक पहुंचने के सारे रास्ते बंद हो जाएंगे। निसरपुर से ग्राम को जोड़ने वाला एकमात्र पुल हर साल बारिश में नर्मदा का जलस्तर बढ़ने पर बंद हो जाता है और नाव से लोगों को आना-जाना पड़ता है। ऐसे में जब स्थायी रूप से पानी भरने की बात कही जा रही है, विभाग ग्रामीणों को तर्क दे रहा है कि आपका ग्राम ऊंचाई पर होने से देर से डूबेगा, लेकिन यह नहीं देखा जा रहा कि जब चारों ओर पानी होगा तो लोगों को विस्थापित कैसे किया जाएगा।

    विभाग के आंकड़े गलत

    ग्राम कोठड़ा के उपेंद्र कुमावत ने बताया कि विभाग के आंकड़े ही गलत हैं। 2013 की बाढ़ में करांेदिया 131 मीटर पानी के लेवल पर ही जलमग्न हो गया था। अब विभाग कह रहा है कि करोंदिया का मिनिमम वाटर हट लेवल 141 मीटर है। 2013 की बाढ़ के वक्त सरदार सरोवर बांध की ऊंचाई 17 मीटर कम थी, तब पूरा करोंदिया गांव जलमग्न हो गया था, अब ऊंचाई 17 मीटर बढ़ने के बाद करांेदिया को 141 मीटर पर डूब में बताया गया है। ग्राम वर्तमान लेवल से 10 मीटर कम होने पर ही 2013 की बाढ़ में ही डूब चुका है। विभाग ने मात्र कागजों पर आंकड़ों का गणित बनाया है। यह हकीकत से दूर है।

    समस्या हुई तो सुधार लेंगे

    डूब क्षेत्र से ग्रामीणों को पुनर्वास स्थलाें तक ले जाने के लिए परिवहन की तीन शिफ्ट बनाई हैं। इसमंे देख लेते हैं कि कहां दिक्कत आ सकती है। समस्या होगी तो सुधार कर लेंगे।

    राजेंद्र गुप्ता, एसडीओ, लोनिवि नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण मान जोबट संभाग कुक्षी

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