Naidunia
    Friday, December 15, 2017
    PreviousNext

    किसी और को दे दिए बैल, अब किसान बैल बनने पर मजबूर

    Published: Fri, 21 Jul 2017 03:28 PM (IST) | Updated: Fri, 21 Jul 2017 03:31 PM (IST)
    By: Editorial Team
    farmer bull india madhya pradesh 2017721 15316 21 07 2017

    आशीष शुक्ला/विकास धनंजय, डिंडौरी। आदिवासी बाहुल्य जिले के मटियारी गांव में सिस्टम के आगे लाचार किसान बैल बनकर स्वयं खेत में जुता। आर्थिक तंगी से परेशान किसान को जब फसल बोने के लिए कोई चारा नजर नहीं आया तो वह मजबूरन पत्नी के साथ स्वयं बैल बनकर जुताई कार्य में लग गया। मामला मीडिया तक पहुंचने के बाद प्रशासन भी हरकत में आया। कलेक्टर ने उसे बैल जोड़ी के लिए 30 हजार रुपए देने की बात कही है।

    पीड़ित किसान गेंदू सिंह को विशेष केन्द्रीय सहायता योजना के तहत वर्ष 2009 में बैल जोड़ी मिलने का प्रकरण स्वीकृत हुआ था। योजना में हुए फर्जीवाड़े से किसान के नाम स्वीकृत प्रकरण दूसरे ग्रामीण धान सिंह की फोटो लगाकर उसे बैल बेच दिए। 8 साल से परेशान किसान को न तो अब तक बैल मिले हैं और न ही न्याय। मामला थाने में दर्ज होने के बाद सन् 2010 से जिला सत्र न्यायालय में विचाराधीन है।

    क्या है पूरा मामला

    मटियारी निवासी गेंदू सिंह गोंड के नाम 2009 में बैल जोड़ी मिलने का प्रकरण स्वीकृत हुआ था। बैल जोड़ी वितरण में सरपंच, सचिव समेत तत्कालीन जनपद सदस्य ने मिलकर बैल जोड़ी के साथ फोटो दूसरे ग्रामीण की खींचकर दूसरे को बेच दिया। सरकारी रिकार्ड में हितग्राहियों के नाम तो सही है, लेकिन बैल के साथ दूसरे ग्रामीणों की फोटो लगाकर फर्जीवाड़ा किया गया।

    मामला उजागर होने के बाद 2010 में जनपद अध्यक्ष के हस्तक्षेप के बाद मेहंदवानी चौकी में सरपंच नन्दू सिंह मरावी, सचिव राजाराम उद्दे, जनपद सदस्य शंभू लाल मरावी समेत फर्जीवाड़े में शामिल तीन ग्रामीण थान सिंह मरावी, दसरू पेंद्राम व शंभू धूमकेती के विरूद्ध 420 का मामला दर्ज किया गया।

    धान बोने में आ रही थी परेशानी

    धान रोपाई का समय निकलता देख मजबूरन पीड़ित गेंदू सिंह अपनी पत्नी सविता के साथ स्वयं हल लेकर जुताई में जुट गया। पीड़ित की माने तो बैल न होने से उसे गत सात साल से इस तरह ही खेती करनी पड़ रही है। सामूहिक खाते में लगभग साढ़े 6 एकड़ जमीन किसान के पास है। इसमें गेंदू सिंह के भतीजों की भी हिस्सेदारी है। पीड़ित के पास न तो रहने के लिए अच्छा मकान है और न ही मवेशी। उसने बताया कि जमा पूंजी भी नहीं है वह बैल जोड़ी खरीद सके।

    मामला गंभीर है। किसान को बैल जोड़ी लेने के लिए 30 हजार रुपए दिए जाएंगे। मैंने जांच के लिए भी जनपद पंचायत सीईओ को दिया है। बैल जोड़ी के लिए राशि मंडला जिले के निवास परियोजना से जारी हुई थी। मामला 8 साल पुराना है। सारे दस्तावेज निवास से मंगाए जाएंगे। प्रशासनिक स्तर पर जिसकी लापरवाही होगी उस पर कार्रवाई की जाएगी। अमित तोमर, कलेक्टर, डिंडौरी।

    आपके माध्यम से मुझे इस पूरे मामले की जानकारी लगी है। पूरे मामले से कलेक्टर को अवगत कराया गया है। मामला बहुत पुराना है। जानकारी नहीं होने से ऐसी स्थिति बनी है। पूरे प्रकरण की जांच करके ही आगे इस संबंध में और कुछ कहा जा सकता है। जेपी मिश्रा, सीईओ, जनपद पंचायत मेहंदवानी।

    प्रतिक्रिया दें
    English Hindi Characters remaining


    या निम्न जानकारी पूर्ण करें
    नाम*
    ईमेल*
    Word Verification:*
    Please answer this simple math question.
    +=

      जरूर पढ़ें