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    रेल पुलिसकर्मी ने आटो चालक को पीटा, गुस्साए चालकों ने शहर किया जाम

    Published: Mon, 18 Sep 2017 12:21 AM (IST) | Updated: Mon, 18 Sep 2017 12:21 AM (IST)
    By: Editorial Team

    मोह। नईदुनिया प्रतिनिधि

    रेलवे स्टेशन पर एक आटो चालक और जीआरपी के हवलदार के बीच किसी बात को लेकर विवाद हो गया। आटो चालक का आरोप है कि हवलदार ने शराब के नशे में उसके साथ मारपीट की। अपने साथी से हुई मारपीट से गुस्साए दर्जनों आटो चालकों ने पहले स्टेशन पर हंगामा किया और उसके बाद विरोध जताते हुए घंटाघर से होकर एसपी ऑफिस पहुंचे। आटो चालकों के इस काफिले के कारण घंटाघर क्षेत्र में काफी देर तक जाम के हालत बने रहे, जिसे ठीक करने में पुलिस को पसीने छूट गए।

    आटो चालक शमसीर खान ने बताया कि रविवार दोपहर वह हमेशा की तरह रेलवे स्टेशन पर सवारियों के लिए खड़ा था। इसी बीच शराब के नशे में जीआरपी हवलदार महेश कोरी वहां पहुंचे और उसे गालियां देने लगे। जब उसने रोका तो उसके साथ मारपीट कर दी। चालक का कहना है कि हवलदार आए दिन आटो चालकों से मारपीट करता है और उनसे रुपए मांगता है।

    शहर के बीच से निकाला काफिला, लोग परेशान

    गुस्साए आटो चालकों ने हवलदार की हरकत का विरोध जताया और उसके बाद एसपी को ज्ञापन देने के लिए कतार में आटो लेकर एसपी कार्यालय रवाना हुए। सभी चालक घंटाघर से होकर निकले। अचानक आटो चालकों का काफिला आने के कारण घंटाघर पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। पुलिस कुछ समझ पाती तब तक यहां सभी पांचों मार्ग पर जाम लग चुका था। रविवार बाजार का दिन होने के कारण भी भीड़ अधिक थी इस कारण और परेशानी हुईं काफी देर तक लोग यहां फसे रहे।

    पुलिस को आया पसीना

    अचानक घुसेआटो चालकों के काफिले को घंटाघर से रवाना करने में पुलिस को पसीने छूट गए। ऐसा इसलिए क्योंकि आटो की कतार बड़ी होने के कारण सभी मार्गों के लोगों को रोकने का प्रयास किया गया। कुछ लोग रुके, लेकिन कुछ निकल रहे थे। इसी बीच आटो भी आगे बड़ रहे थे, इससे पुुलिस को यातायात सामान्य करने में काफी दिक्कत हुई।

    ऐसा भी तो हो सकता था

    - ये बात सही है कि यदि बे वजह किसी के साथ अभद्रता होती है तो उसे गुस्सा आएगा। आटो चालकों का गुस्सा जायज है, लेकिन वे स्टेशन चौक से घंटाघर होकर जाने के वजाय सीधे बस स्टैंड से होकर भी एसपी कार्यालय जा सकते थे।

    - यदि उन्हें कोतवाली टीआई को ज्ञापन देकर ही अपनी संतुष्टि करनी थी तो वे स्टैंड मार्ग से सीधे कोतवाली जा सकते थे या फिर कोतवाली टीआई को सूचना देकर स्टेशन चौक पर बुला सकते थे, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया।

    - सभी जानते हैं कि रविवार को शहर के बाजार का दिन होता है और घंटाघर क्षेत्र में अधिक भीड़ होती है। ऐसे में आटो चालकों को दर्जनों आटो के साथ इस भीड़ में घुसकर जाम के हालत पैदा करना क्या सही है।

    - एक आटो चालक के साथ हुई मारपीट की घटना के विरोध ने सैकड़ों लोगों को परेशान कर दिया। अचानक भीड़ में जाम के हालात बने, ऐसे में भगदड़ जैसे हालात कितनों को मुसीबत में डाल सकते थे।

    - यदि पुलिस को सूचना मिल गई थी कि स्टेशन पर किसी आटो चालक से मारपीट हो गई है और वह अपना आक्रोश जता रहे हैं तो पुलिस को वहीं पहुंचकर मामले को शांत करने का प्रयास करना था और यदि पुलिस को सूचना नहीं मिली तो ये और गंभीर बात है।

    - जिस समय आटो चालक एसपी को ज्ञापन देने के लिए स्टेशन से रवाना हुए थे तो उन्हें स्टेशन चौक से सीधे बस स्टैंड चौक से कोतवाली चौराहा लाया जा सकता था। इस मार्ग पर घंटाघर के मुकाबले भीड़ कम होती है, इससे अफरा-तफरी नहीं होती।

    - अचानक घंटाघर पर दर्जनों आटो की कतार ने सभी को परेशान किया, इसके बाद उन्हें निकालकर अस्पताल मार्ग पर रवाना किया गया। यदि पुलिस चाहती तो इन सभी को कोतवाली में रोक सकती थी या फिर तहसील ग्राउंड में रोका जा सकता था, लेकिन ऐसा भी नहीं किया गया।

    - पूरे शहर का यातायात बिगाड़कर ये आटो चालक एसपी कार्यालय पहुंच गए। परिसर के भीतर सभी ने आटो खड़े कर दिए और बाहर सड़क पर कई आटो खड़े रहे। कुछ देर के लिए एसपी कार्यालय आटो स्टैंड बन गया था। यहां कोतवाली टीआई ने ज्ञापन लेकर उन्हें आश्वासन दिया और सभी मान भी गए। यदि उन्हें टीआई को ही ज्ञापन देना था तो पूरे शहर को परेशान करने की क्या जरूरत थी।

    क्या ये धारा 144 का उल्लंघन नहीं

    एसपी विवेक अग्रवाल के प्रतिवेदन पर हाल ही में कलेक्टर डॉ. श्रीनिवास शर्मा ने शहर की सीमा में धारा 144 लागू की है जो आगामी आदेश तक प्रभावी है। इस धारा के तहत एक स्थान पर पांच से अधिक लोग खड़े भी नहीं हो सकते। बिना अनुमति के धरना, प्रदर्शन, आंदोलन, रैली भी नहीं निकाली जा सकती है। इन आटो चालकों ने अपना आक्रोश जताने के लिए बिना कोई सूचना के रैली की शक्ल में शहर के बीच से आटो निकाले, जिससे जाम के हालत बने और लोग परेशान हुए। पुलिस को भी मशक्कत करनी पड़ी। इस कृत्य से धारा 144 का उल्लंघन होता है या नहीं इसे तो कानून के ज्ञाता ही परिभाषित कर सकते हैं, लेकिन कोतवाली टीआई प्रदीप सोनी ने बताया कि आटो चालक अपनी बात कहने के लिए एसपी कार्यलय पहुंचे थे। अचानक उनके साथ कोई घटना हुई और वे यहां शिकायत लेकर आए हैं, इसलिए इस मामले में धारा 144 का उल्लंघन नहीं है। उन्होंने कहा कि ज्ञापन ले लिया गया है, जिसकी जांच की जाएगी और जो दोषी होगा उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।

    यदि मारपीट की है तो गलत है

    जीआरपी थाना प्रभारी अनिल मरावी का कहना है कि उन्हें घटना की जानकारी मिली है वे दमोह पहुंच रहे हैं। उसके बाद वे अपने कर्मचारी व आटो चालक से बात करेंगे। यदि वास्तव में उनके कर्मचारी ने मारपीट की है तो ये गलत है। आरोप सााबित होने पर उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

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