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    हाई कोर्ट ने दिए मुआवजे के आदेश, आईडीए ने लगा दी सुप्रीम कोर्ट में याचिका

    Published: Sat, 22 Apr 2017 03:58 AM (IST) | Updated: Sat, 22 Apr 2017 03:58 AM (IST)
    By: Editorial Team

    इंदौर। नईदुनिया प्रतिनिधि

    स्कीम-173 के एक केस में आईडीए ने मुआवजा राशि देने के बजाय सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई है, वहीं कलेक्टर कार्यालय को मुआवजा निर्धारण के लिए पत्र भी लिख दिया।

    आईडीए ने बायपास पर स्कीम लागू की है, जिसमें शहर के प्रतिष्ठित मोदी परिवार की जमीन है। आईडीए ने जमीन पाने के लिए जमीन मालिक को प्रस्ताव दिया था,लेकिन उन्होंने नहीं माना। मामला हाई कोर्ट तक पहुंचा तो जमीन मालिक ने जमीन के बदले विकसित जमीन के बजाय आर्थिक मुआवजा मांगा। इस पर कोर्ट ने आईडीए को आर्थिक मुआवजा देने को कहा। आईडीए ने एक तरफ प्रशासन को मुआवजे की राशि के आकलन के लिए पत्र लिखा तो दूसरी तरफ कोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगा दी। इसकी पुष्टि आईडीए सीईओ ने की है।

    कई किसानों को नहीं मिल रही जमीन

    आईडीए ने अपनी ज्यादातर स्कीमों में 50 प्रतिशत विकसित जमीन देने का प्रावधान किया है, जिसे आपसी सहमति से दिया जाता है। शुरुआत में सुपर कॉरिडोर के कई किसानों ने साझेदारी फॉर्मूले को मानते हुए अनुबंध कर लिए, लेकिन उन्हें दूसरी जमीन ही नहीं मिल रही है। दो महीने के भीतर हाई कोर्ट ने आईडीए को पांच स्कीमों में 500 करोड़ रुपए से ज्यादा का मुआवजा देने के निर्देश दिए हैं।

    मुआवजा देने में क्या परेशानी

    इधर, आईडीए आर्थिक मुआवजा देने के पक्ष में नजर नहीं आ रहा है। इस मामले में किसान संगठनों का कहना है आईडीए ने वर्षों तक किसानों से सस्ते में जमीन लेकर उसे चार-पांच गुना दामों पर बेचा है। सयाजी होटल, फॉर्च्यून होटल, रिलायंस मैदान इसके उदाहरण हैं। जब बिक्री में आईडीए ज्यादा मुनाफा कमा सकता है तो कोर्ट केस के मामले में आर्थिक मुआवजा भी देना चाहिए।

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