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    अधिकारियों ने कैबिन में बैठाकर भरवाए करीबियों के फॉर्म, छात्रहित में निर्णय नहीं ले सकते तो छोड़ें कुर्सी

    Published: Sat, 22 Apr 2017 03:58 AM (IST) | Updated: Sat, 22 Apr 2017 03:58 AM (IST)
    By: Editorial Team

    इंदौर। नईदुनिया प्रतिनिधि

    30 साल बाद हो रहे देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी कोर्ट (सीनेट) चुनाव को लेकर एबीवीपी ने प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। छात्र नेताओं ने अधिकारियों पर करीबियों के फॉर्म भरवाने का आरोप लगाया। चुनाव में आवेदन की तारीख बढ़वाने आए छात्र नेताओं ने शुक्रवार को घंटेभर प्रभारी रजिस्ट्रार का घेराव किया, लेकिन उन्होंने प्रक्रिया में बदलाव से इनकार कर दिया। इस बीच अधिकारियों और छात्र नेताओं के बीच तीखी बहस हुई। गुस्साए छात्र नेताओं ने यहां तक कह दिया कि यहां छात्रहित के फैसले नहीं लिए जा रहे हैं। सिर्फ अपने मतलब के काम पर ध्यान दिया जा रहा है। हंगामे से दो-तीन घंटे तक यूनिवर्सिटी में काम प्रभावित रहा। बाद में कुलपति ने संगठन के उठाए बिंदुओं पर कानूनी सलाह लेने की बात कही।

    दोपहर 12 बजे संगठन के राष्ट्रीय मंत्री रोहिन राय, सहमंत्री शुभेंद्र सिंह, नगर मंत्री नयन दुबे समेत 50 से ज्यादा कार्यकर्ता नारेबाजी करते हुए यूनिवर्सिटी परिसर पहुंचे। सभी सीधे प्रभारी रजिस्ट्रार वीके सिंह के कमरे में घुस गए। बाद में डिप्टी रजिस्ट्रार प्रज्ज्वल खरे, अनिल शर्मा, रचना ठाकुर और छात्र कल्याण संघ के अध्यक्ष डॉ. एलके त्रिपाठी छात्र नेताओं को समझाने आए। आवेदन की तारीख बढ़ाने पर अड़े छात्र नेताओं ने कहा चुनाव प्रक्रिया जल्दबादी में यूनिवर्सिटी ने घोषित की। जिससे हजारों पूर्व विद्यार्थी आवेदन करने से वंचित हुए हैं। रजिस्ट्रार तारीख में बदलाव कर सकते हैं। हंगामे के बीच कुछ छात्र नेता अभद्रता पर उतर आए। उन्होंने यूनिवर्सिटी के चैनल गेट पर ताला लगा दिया और नारेबाजी करने लगे।

    कुलपति को दिया ज्ञापन

    प्रभारी रजिस्ट्रार से बात बनती नहीं देख एबीवीपी नेता चर्चा के लिए कुलपति से मिले। इसके लिए उन्हें आधा घंटा इंतजार करना पड़ा। बाद में उन्होंने ज्ञापन देकर आपत्तियां बताईं। फिर कानूनी सलाह लेने के लिए यूनिवर्सिटी में नोटशीट चलाई गई।

    इन आपत्तियों पर लेंगे राय

    - 5800 लाइफ टाइम सदस्यों का बगैर सत्यापन किए सूची जारी कर दी।

    -13 अप्रैल को यूनिवर्सिटी ने चुनाव के अलावा आवेदन की 17 अप्रैल तक अंतिम तारीख घोषित की। इसमें 14, 15 और 16 को अवकाश था। ऐसे में पूर्व छात्र आवेदन कैसे भर सकते हैं।

    -3 दिसंबर की अधिसूचना में चुनाव, आवेदन, नामांकन के बारे में नहीं बताया गया।

    -अधिसूचना को लेकर विज्ञापन सिर्फ दो ही अखबारों में क्यों जारी किया।

    -1984 के बाद सीनेट के बने सदस्यों को 40 रुपए जमा कर दोबारा सदस्यता नवीनीकरण करवाना थी। इस प्रक्रिया का पालन क्यों नहीं किया गया।

    सात आवेदन हुए खारिज

    17 अप्रैल तक आए आवेदनों की स्क्रूटनी हो चुकी है। 85 में से 7 आवेदन यूनिवर्सिटी प्रशासन ने खारिज कर दिए। इन सभी विद्यार्थी के ग्रेजुएशन को तीन साल पूरे नहीं हुए थे।

    एनएसयूआई ने कहा दबाव में फैसला न लें

    एबीवीपी के प्रदर्शन के बाद एनएसयूआई ने मैदान संभाला। छात्र नेता यूनिवर्सिटी की प्रक्रिया के पक्ष में खड़े नजर आए। कानूनी सलाह लेने पर छात्र नेता विकास नंदवाना और प्रवक्ता महक नागर ने कुलपति से कहा यूनिवर्सिटी ने सभी प्रक्रिया ठीक अपनाई है तो उन्हें इन छात्र नेताओं के दबाव में फैसला लेने की जरूरत नहीं है। बेवजह कानूनी सलाह से प्रक्रिया और जटिल हो जाएगी।

    ऐसे चली छात्र नेताओं और प्रभारी रजिस्ट्रार में बहस

    छात्र नेता : यूनिवर्सिटी अधिकारियों ने सरकारी छुट्टी के पहले चुनाव की तारीख घोषित कर कुछ लोगों को फायदा पहुंचाया है। महज 85 आवेदन आए हैं, जो सोची-समझी साजिश के तहत भरवाए गए हैं।

    प्रभारी रजिस्ट्रार : ये आरोप बिलकुल गलत हैं। विधानसभा के निर्देश पर चुनाव की तारीख घोषित हुई है।

    छात्र नेता : अधिकारियों ने करीबियों के आवेदन कैबिन में बैठाकर भरवाए हैं। वेबसाइट पर भी चुनाव संबंधी अधिसूचना काफी देर से जारी की गई, जिसमें कई महत्वपूर्ण जानकारियां छिपाई गईं।

    प्रभारी रजिस्ट्रार : 8 दिसंबर को ही अधिसूचना सार्वजनिक की गई थी।

    छात्र नेता : छात्र हित में निर्णय नहीं लेना है तो कुर्सी छोड़े दें।

    प्रभारी रजिस्ट्रार : नियमानुसार प्रक्रिया पूरी की गई है। अब आवेदन की तारीख बढ़ाना संभव नहीं है।

    छात्र नेता : ग्वालियर यूनिवर्सिटी में 8 हजार फॉर्म जमा हुए हैं, जबकि डीएवीवी में सिर्फ 85 फॉर्म आए हैं। ऐसे में छात्रों का प्रतिनिधित्व कैसे किया जा सकता है।

    पंद्रह दिन में लेंगे फैसला

    यूनिवर्सिटी के अध्यादेश और परिनियम बने हैं। उसके आधार पर छात्र संगठन की आपत्तियों की जांच करेंगे। उसके बाद उचित निर्णल लिया जाएगा। इसके लिए कानूनी सलाह ली जाएगी। यह प्रक्रिया 15 दिन में पूरी करेंगे।

    डॉ. नरेंद्र धाकड़, कुलपति, डीएवीवी

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