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    सस्ते राशन के लिए 37 जिलों में आबादी से ज्यादा बन गए पात्र

    Published: Sun, 13 Aug 2017 10:33 PM (IST) | Updated: Mon, 14 Aug 2017 08:34 AM (IST)
    By: Editorial Team
    ration 13 08 2017

    वैभव श्रीधर, भोपाल।

    एक रुपए किलो गेहूं-चावल और नमक लेने के लिए अनुसूचित जाति-जनजाति के नाम पर बड़ी गड़बड़ी होने का खुलासा हुआ है। 37 जिलों में इन वर्गों की जितनी आबादी है, उससे कहीं ज्यादा पात्र बनकर सस्ता राशन ले रहे हैं।

    इसी तरह अंत्योदय अन्न् योजना (अति गरीब श्रेणी) में सवा दो लाख से ज्यादा ऐसे परिवार पहचाने गए हैं,जिनमें एक ही सदस्य है।

    सरकार को आशंका है कि सस्ते राशन के चक्कर में परिवार को विभाजित कर अलग-अलग पात्रता हासिल की गई है। मामला सामने आने के बाद खाद्य विभाग ने कलेक्टरों को अपात्रों की जांच कर उनके नाम पात्रता सूची से हटवाने और पात्र परिवारों के नाम जोड़ने के लिए कहा है।

    ऐसे हुआ खुलासा

    विधानसभा के मानसून सत्र में पात्र परिवारों को सस्ते राशन की पात्रता पर्ची नहीं दिए जाने का मुद्दा उठा था। इसके देखते हुए खाद्य,नागरिक आपूर्ति विभाग ने समग्र पोर्टल में दर्ज नाम और जनसंख्या के आंकड़े से मिलान कराया।

    इसमें ये चौकाने वाला खुलासा हुआ कि 37 जिलों में अनुसूचित जाति-जनजाति की आबादी से ज्यादा नाम पीडीएस की पात्रता सूची में दर्ज हैं।

    आबादी के हिसाब से देखें तो प्रदेश में अनुसूचित जाति-जनजाति की संख्या 2 करोड़ 66 लाख 59 हजार 104 हैं, जबकि सार्वजनिक वितरण प्रणाली की पात्रता सुची में ये संख्या 2 करोड़ 80 लाख 91 हजार 394 है।

    जबकि, हर जिले में इस वर्ग के सरकारी अधिकारी-कर्मचारी के साथ आयकारदाता और आर्थिक रूप से संपन्न् लोग भी रहते हैं। नियमानुसार इन्हें रियायती दर पर मिलने वाली राशन की पात्रता नहीं होती है।

    इसी तरह अंत्योदय अन्न् योजना के परिवारों की पात्रता सूची में भी इसी तरह की गड़बड़ी उजागर हुई है। 2 लाख 28 हजार ऐसे परिवार छांटे गए हैं, जहां सिर्फ एक ही सदस्य है। संभावना जताई जा रही है कि सस्ते राशन का फायदा उठाने के लिए परिवार को विभाजित कर दिया गया।

    ऐसे हुई गड़बड़ी

    खाद्य सुरक्षा कानून के तहत अंत्योदय परिवार को हर महीने 35 किलोग्राम राशन मिलता है। परिवार में एक ही सदस्य हो तो भी उसे 35 किलोग्राम राशन लेने का अधिकार है और ज्यादा हों तो भी 35 किलो ही मिलता है।

    लेकिन यदि परिवार विभाजित हो जाए तो हर सदस्य को 5 किलो अलग से मिलता है जिसे प्राथमिकता परिवार में शामिल किया जाता है।

    इस प्रावधान का फायदा उठाने के लिए लोगों ने दस्तावेजों में अपने परिवार विभाजित कर लिए। इसके अलावा अन्य योजनाओं की पात्रता सूची में शामिल होने के लिए भी अपने नामों में थोड़ा थोड़ा परिवर्तन कर लिया। जिससे उन्हें दोहरा लाभ मिला।

    गड़बड़ी वाले दस बड़े जिले

    जिला--आबादी(एससी-एसटी)--पात्र लोग

    छतरपुर--478910--658692

    झाबुआ--909245--1200242

    आलीराजपुर--675515--828127

    बड़वानी--1050136--1210678

    खरगोन--939260--1059816

    सिंगरौली--534658--600976

    दमोह--412632--459064

    खंडवा--615723--679913

    सीधी--443506--488319

    दतिया--215331--236920

    जिलों में कराएंगे जांच

    कई जिलों में आबादी से ज्यादा अनुसूचित जाति-जनजाति के लोगों के नाम पात्रता सूची में होने की बात सामने आई है। कलेक्टरों को ऐसी जगह चिन्हित करके जांच करने और अपात्रों के नाम काटने के लिए कहा गया है। साथ ही ऐसे अंत्योदय परिवार, जहां एक ही सदस्य हैं, वहां की भी पड़ताल करवाई जा रही है।

    विवेक पोरवाल,आयुक्त खाद्य

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    • mahendra agrawal MAIHAR14 Aug 2017, 02:51:39 PM

      कोई बात नहीं उतनी ज्यादा वोट भी तो मिलेंगी |

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