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    जाना है वर्ल्ड कप खेलने इटली, झाबुआ में प्रैक्टिस के लाले

    Published: Fri, 19 May 2017 06:45 PM (IST) | Updated: Sat, 20 May 2017 09:19 AM (IST)
    By: Editorial Team

    यशवंतसिंह पंवार, झाबुआ, नईदुनिया प्रतिनिधि। नेशनल किक बॉक्सिंग का वर्ल्ड कप इटली में डेढ़ माह बाद होना प्रस्तावित है। गौरव का विषय यह है कि अंडर-45 किग्रा वर्ग में झाबुआ की बिटिया भारत की ओर से वहां प्रतिनिधित्व करेगी। अंतरराष्ट्रीय स्पर्धा के लिए उच्च स्तर की तैयारियों की जरूरत है, लेकिन यहां खिलाड़ी को अभ्यास के ही लाले पड़ रहे हैं। जिस स्थान पर अभ्यास चल रहा था, वहां से अब प्रशासन ने मेट हटवाते हुए डे-केयर सेंटर चलाने का ऐलान कर दिया है।

    पिछले तीन दिनों से लगभग 110 देशों के बीच भारत की शान के लिए इटली जाकर लड़ने वाली खिलाड़ी की प्रैक्टिस ही बंद हो गई है। वजह यह है कि प्रैक्टिस के लिए कोई स्थान ही नहीं मिल पा रहा है। एक महत्वपूर्ण बात ये है कि नेशनल किक बॉक्सिंग मप्र एसोसिएशन के पास बजट नहीं होने से खिलाड़ियों को ही आने-जाने का खर्च खुद वहन करना होगा।

    आनंदम अभियान के तहत प्रशासन झाबुआ के मंगल भवन में वरिष्ठ नागरिकों के लिए डे-केयर सेंटर खोलना चाह रहा है। यहां केरम और शतरंज रखते हुए बुजुर्गों का मनोरंजन किया जाएगा। कितने बुजुर्ग इस सेंटर पर नियमित आएंगे, यह एक दूर का विषय है, लेकिन फिलहाल यहां इसके चक्कर में खिलाड़ियों का खेल बंद करवा दिया गया है।

    मेट ही हटवा दी

    मंगल भवन के हॉल में नेशनल किक बॉक्सिंग का अभ्यास स्थानीय खिलाड़ी मेट पर कर रहे थे। मुख्य रूप से नंदिता कृष्णे का अभ्यास करवाया जा रहा था। नंदिता भारत की ओर से अंडर-45 किग्रा में इटली जाकर खेलेगी। वहां जुलाई के अंतिम हफ्ते में वर्ल्ड कप होना प्रस्तावित है। स्पर्धा में लगभग 110 देश उतरेंगे। प्रदेश के कोच व किक बॉक्सिंग एसोसिएशन के निदेशक पुष्कर शर्मा झाबुआ आकर विशेष तौर पर कोचिंग दे रहे थे। इसके अलावा राष्ट्रीय स्तर के 7 अन्य खिलाड़ी भी यहां अभ्यासरत थे। एक खिलाड़ी तो 17 किमी दूर कालीदेवी से यहां आ रही थी। जिला प्रशासन ने मंगल भवन में डे-केयर सेंटर चलाने के नाम पर खिलाड़ियों की मेट ही हॉल से हटवा दी। पिछले तीन दिनों से अभ्यास बंद है।

    उद्देश्य से तो कोसों दूर

    यह मंगल भवन 1990 में तत्कालीन सुंदरलाल पटवा सरकार ने बनवाया था। भवन निर्माण का उद्देश्य यह था कि गरीब वर्ग के लोग अपने समस्त मांगलिक कार्य यहां आसानी से संपन्न कर लें। अपने उद्देश्य से यह भवन हमेशा भटका हुआ रहा है। नगर पालिका अध्यक्ष व कर्मचारियों का यहां वर्षों तक आवास रहा। कभी नगर पालिका, तो कभी आदिवासी विकास विभाग के बीच भवन हस्तांतरित होता रहा। खिलाड़ियों ने खाली पड़े इस भवन में एक माह पूर्व से प्रैक्टिस करना आरंभ किया, लेकिन अब प्रशासन का आनंदम अभियान उनके आड़े आ गया है।

    20 मेट लगती है

    स्टेट कोच शर्मा का कहना है कि 20 मेट लगाकर प्रैक्टिस करवाई जाती है। हॉल के बगैर प्रैक्टिस होना संभव नहीं है। झाबुआ में कहीं भी प्रैक्टिस के लिए स्थान नहीं मिल रहा था। इसलिए खाली पड़े मंगल भवन के हॉल में प्रैक्टिस आरंभ की। अब यहां से खदेड़ दिया गया है।

    प्रैक्टिस बंद हो गई

    खिलाड़ी नंदिता ने बताया कि तीन दिन से प्रैक्टिस बंद है क्योंकि हॉल से हमारी मेट ही हटवा दी गई है। भारत के लिए इटली के वर्ल्ड कप में जाकर कुछ उपलब्धि हासिल करने की इच्छा है। इसलिए इन दिनों भरपूर मेहनत जारी है। हॉल के अभाव में अब प्रैक्टिस को लेकर चिंता बढ़ गई है।

    कुछ भी फायनल नहीं

    संयुक्त कलेक्टर अशफाक अली का कहना है कि मंगल भवन तो शासकीय है। यहां खिलाड़ी किसकी अनुमति से खेल रहे थे। सामाजिक न्याय विभाग यहां सामाजिक संस्थाओं के सहयोग से डे-केयर सेंटर चलाने की योजना बना रहा है। किसी सामाजिक संस्था का इसमें सहयोग लिया जाएगा। हालांकि अभी कुछ भी फायनल नहीं है। खिलाड़ियों की परेशानियों को देखा जाएगा।

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