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    मानदेय के लिए कार्यालय के चक्कर काट रहे पुजारी

    Published: Sat, 22 Apr 2017 03:58 AM (IST) | Updated: Sat, 22 Apr 2017 03:58 AM (IST)
    By: Editorial Team

    शासकीय मंदिरों के पुजारियों को दो वर्ष से नहीं मिला मानदेय

    महू। नईदुनिया प्रतिनिधि

    तहसील के शासकीय मंदिरों के पुजारी अपने मानदेय के लिए तहसील कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं। इन्हें विगत दो वर्ष से मानदेय नही मिला। एक वर्ष पूर्व मानदेय की राशि शासन द्वारा भेजी गई थी लेकिन कम होने के कारण लौटा दी गई।

    तहसील में स्थिति शासकीय मंदिरों के पुजारियों को मानदेय नहीं मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति पर असर पड़ने लगा है। पुजारी लंबे समय से तहसील कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं लेकिन हर बार यही जवाब मिलता है कि ऊपर से राशि नहीं आई। तहसील में करीब पौेने दो सौ पुजारी हैं। इन्हें कम से कम पांच हजार व अधिकतम नौ हजार तक का मानदेय प्रतिवर्ष दिया जाता है। पुजारियों को अपने परिवार के पालन पोषण के लिए शासन द्वारा जमीन भी उपलब्ध कराई गई है।

    ब्याज मिल रहा है

    तहसील में कई ऐसे पुजारी हैं जिनकी जमीन शासन ने अधिग्रहित कर ली। इन जमीनों पर शिक्षण संस्थान तथा मार्ग निकाले गए हैं। इसके बदले में उन्हें जो राशि प्राप्त हुई वह बैंक में जमा करा दी गई। उससे मिलने वाला ब्याज पुजारी के खाते में जमा हो रहा है। ऐसे पुजारियों की संख्या करीब 50 है।

    राशि आई मगर वापस कर दी

    सूत्रों के अनुसार वर्ष 2016 में पुजारियों के मानदेय के लिए शासन द्वारा राशि भेजी गई थी लेकिन वह काफी कम थी। तहसील के पुजारियों को मानदेय भुगतान के लिए करीब बारह लाख रुपए की आवश्यकता होती है और शासन ने छह लाख रुपए ही भेजे थे। ऐसे में आधे पुजारियों को ही मानदेय दिया जा सकता था। विवाद ना हो इसे देखते हुए उक्त राशि वापस कर दी गई। बाद में शासन ने कोई राशि जारी नहीं की।

    मंडी में नही बिकती फसल

    अनेक पुजारियों का कहना है कि शासन द्वारा दी गई जमीन पर खेती की फसल मंडी में कोई नही खरीदता। क्योंकि व्यापारियों का कहना है कि जिस जमीन पर फसल ली गई है उसके मालिक कलेक्टर हैं। मंडी में पंजीयन के लिए जो कागजात दिए जाते है उसमें जमीन का मालिकाना हक स्वयं का होना चाहिए। ऐसे में हम कम कीमत में बाजार में फसल बेचते हैं।

    मानदेय की राशि अभी आई नहीं है। राशि प्राप्त होते ही पुजारियों को दे दी जाएगी।

    -तपीश पांडेय, तहसीलदार महू

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