Naidunia
    Monday, August 21, 2017
    Previous

    पिता की मौत के बाद बेटी पढ़ाई छोड़कर दुकान चलाने को मजबूर

    Published: Thu, 08 Sep 2016 03:57 AM (IST) | Updated: Thu, 08 Sep 2016 10:22 AM (IST)
    By: Editorial Team
    girl run shop 201698 102223 08 09 2016

    विजय मीना, बीनागंज। पिता की मौत के बाद दो वक्त की रोटी के लिए कक्षा 10वीं की होनहार छात्रा पढ़ाई छोड़कर पिता की दुकान चलाने को मजबूर है। क्योंकि घर में दो छोटे भाई-बहन और मां है। पिता की अचानक मौत के बाद छात्रा के परिवार में कोई भी ऐसा नहीं है, जो घर का खर्च चला सके। पिता भी तहसील परिसर के बाहर डिब्बेनुमा कैमरे से लोगों की पासपोर्ट तस्वीरें खींचकर जैसे-तैसे घर चला रहे थे। लेकिन उनकी मौत के बाद 13 दिनों में ही परिवार के सदस्यों के पेट भरने के लाले पड़ गए हैं। यही वजह है कि घर के खर्च को चलाने के लिए छात्रा ने अपने पिता की दुकान को संभालने का फैसला लिया है। पिछले कुछ दिनों से पिता के डिब्बेनुमा कैमरे के साथ तहसील परिसर के सामने खड़ी होकर छात्रा लोगों के पासपोर्ट साइज के फोटो बना रही है।

    छात्रा साधना सनोटिया ने बताया कि वह पढ़ाई में काफी होनहार है। इसीलिए उसका एडमिशन चांचौड़ा-बीनागंज के शासकीय मॉडल स्कूल में हुआ था। लेकिन उसके पिता हरगोविंद सनोटिया की मौत के बाद घर की माली हालत खराब हो गई है। हालात ऐसे हो गए हैं कि परिवार को दो वक्त की रोटियों की जुगाड़ करना भी मुश्किल हो रहा है। ऐसे में छात्रा के सामने दूसरा कोई विकल्प नहीं बचा था। इसीलिए छात्रा ने पढ़ाई को बीच में ही छोड़कर पिता की दुकान संभालने का निर्णय लिया। ताकि वह अपने छोटे भाई-बहनों के साथ मां का भी पेट भर सके। परिवार में पिता की मौत के बाद 12 वर्षीय छोटी बहन विजया, मम्मी गुड्डीबाई और 10 साल का छोटा भाई रोहित है, जो पिछले कुछ दिनों से भूखे-प्यासे घर में बैठे हुए थे। लेकिन जब से छात्रा साधना ने पिता की दुकान संभाली है, तब से कम से कम सभी के लिए दो-दो रोटियों की जुगाड़ होने लगी है।

    हार्ट अटैक से हुई थी पिता की मौत

    तहसील के सामने डिब्बेनुमा कैमरे की दुकान पर ग्राहकों का इंतजार करती हुई छात्रा साधना ने बताया कि करीब एक पखवाड़े पहले उसके पिता की मौत हार्ट अटैक से हो गई थी। इसके बाद कुछ दिनों तक तो पड़ोसियों के घर से खाना आता रहा। लेकिन पिता की 13वीं के बाद रिश्तेदारों व पड़ोसियों के यहां से भी खाना आना बंद हो गया। इसके बाद घर में जो कुछ बचा था, वह पिता की 13वीं में खर्च हो गया और इसके बाद घर में खाना के लिए कुछ भी नहीं बचा। ऐसे में घर के खर्च को चलाने के लिए उसने पिता के काम को चुनने का फैसला लिया। लेकिन काम पर जाने के चलते वह स्कूल नहीं जा पा रही है।

    छात्रा हमारे स्कूल की काफी होनहार बच्ची है। लेकिन पिता की मौत के बाद वह स्कूल नहीं आ पा रही है। हालांकि यह मेरी जानकारी में नही है कि उसने स्कूल छोड़ दिया है और पिता की दुकान को संभालने का जिम्मा उठा रही है। यदि घर की माली हालत ठीक नहीं है, तो मैं खुद उसके परिवार से बात कर छात्रा को स्कूल भेजने के लिए प्रेरित करूंगा। ताकि वह आगे चलकर अपने परिवार का सहारा बन सके।

    - सतीश नाटानी, प्राचार्य, माडल स्कूल चांचौड़ा-बीनागंज

    तहसील के बाहर बैठी छात्रा को मैंने बुलाकर पूछताछ भी की है। पिता की मौत के बाद बच्ची के परिवार की आर्थिक हालत बेहद खराब है। उसके पास बीपीएल का राशन कार्ड है। उसकी मदद से उसे जो आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा सकती है, वह हम कराएंगे। इसके अलावा परिवार को आर्थिक मदद देने के लिए सामाजिक संगठनों से भी अपील करा रहे हैं, ताकि छात्रा को अपनी पढ़ाई नहीं छोड़नी पड़े।

    -सुनील वर्मा, तहसीलदार, चांचौड़ा-बीनागंज

    प्रतिक्रिया दें
    English Hindi Characters remaining


    या निम्न जानकारी पूर्ण करें
    नाम*
    ईमेल*
    Word Verification:*
    Please answer this simple math question.
    +=

      जरूर पढ़ें