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    राष्‍ट्रपति पद के उम्मीदवार रामनाथ कोविंद का गुना से भी है नाता

    Published: Mon, 19 Jun 2017 04:17 PM (IST) | Updated: Mon, 19 Jun 2017 10:23 PM (IST)
    By: Editorial Team
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    गुना। राष्ट्रपति पद के लिए जैसे ही एनडीए ने बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोविंद के नाम की घोषणा की, गुना में भी हर्ष का माहौल बन गया। लोगों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर जश्न मनाया। इसकी वजह कोविंद का गुना से नाता जुड़ा होना है। दरअसल, रामनाथ कोविंद के बड़े भाई रामस्वरूप भारती गुना में पीएचई में लेखापाल के पद से सेवानिवृत्त हो चुके हैं।

    वे वर्तमान में विपश्यना ध्यान केंद्र के सहायक आचार्य की भूमिका निभा रहे हैं। पिछले साल 3 नवंबर को रामनाथ कोविंद गुना आ चुके हैं और विपश्यना केंद्र में हुए कार्यक्रम में शामिल होकर बड़े भाई भारती के निवास पर आमजन से भी मिल चुके हैं।

    शहर की हनुमान कालोनी में रहने वाले रामस्वरूप भारती का गुना से जुड़ाव होने की वजह सरकारी नौकरी में रहना रहा है। वे पीएचई में कार्यरत रहे और लेखापाल के पद से रिटायर्ड हुए। इसके बाद वे विपश्यना ध्यान केंद्र से जुड़े, जहां सहायक आचार्य की भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं।

    यही वजह थी कि 3 नवंबर 2016 को उन्होंने विपश्यना ध्यान केंद्र पर रखे गए कार्यक्रम में अपने छोटे भाई व बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोविंद को बुलाया। इस दौरान उन्होंने भारती के निवास पर स्वागत सम्मान समारोह में भाग लिया, तो प्रसिद्ध स्थल हनुमान टेकरी पहुंचकर बालाजी का आशीर्वाद लिया। इसके बाद पगारा गांव में विपश्यना ध्यान केंद्र में धार्मिक कार्यक्रम में शामिल हुए।

    परिजनों ने बताया कि रामनाथ कोविंद बाल्यकाल से ही स्वयंसेवक व राष्ट्रवादी विचारधारा से जुड़ गए थे। इसके बाद उन्होंने समाज से ऊंच-नीच का भेदभाव मिटाने सामाजिक समरसता के लिए काम किया। उनका गुना में बड़े भाई होने से काफी गहरा जुड़ाव रहा है। उन्होंने शहर की गलियां देखी हैं, तो आमजन से भी मिलते रहे। इधर, जैसे ही राष्ट्रपति पद के लिए उनके नाम की घोषणा हुई, शहर में भी जश्न मनने लगा। लोग उनके बड़े भाई रामस्वरूप भारती के घर पहुंचकर बधाई और मिठाई खिलाने पहुंचते रहे।

    मानो आचार्यश्री का मिल गया था आशीर्वाद

    बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोविंद जब गुना प्रवास पर आए, तो बड़े भाई रामस्वरूप भारती के करीबी स्वयंसेवक दिलीप सक्सेना ने कार्यक्रम का संचालन किया था। खास बात यह रही कि राज्यपाल को सक्सेना के संचालन की शैली इतनी पसंद आई कि उन्हें भोपाल ले गए। इसके बाद उन्होंने आचार्य विद्यासागर महाराज का आशीर्वाद लिया, तो राजभवन में राष्ट्रभाषा पर राज्यपाल के व्याख्यान में शामिल होने का मौका मिला। सक्सेना बताते हैं कि जब राज्यपाल आचार्यश्री से मुलाकात करने पहुंचे, तो उन्होंने रामनाथ कोविंद की ओर देखा और मुस्कारा गए। शायद आचार्यश्री का उन्हें आश्ाीर्वाद मिल गया था, जो राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार बने।

    रामनाथ कोविंद एक नजर में

    - 1 अक्टूबर 1945 को उप्र के कानपुर जिले में ग्राम परोख में एक गरीब परिवार में हुआ।

    - कानपुर से वकालत की पढ़ाई कर 1972 में दिल्ली आकर हाईकोर्ट में वकालत शुरू की।

    - 1975 में सुप्रीम कोर्ट के वकील बने।

    - पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई के तीन साल तक निज सचिव रहे।

    - 1994 में राज्यसभा के लिए निर्विरोध सांसद घोषित हुए।

    - 2000 में दोबारा राज्यसभा के लिए चुने गए।

    - सामाजिक कार्य करते हुए उन्होंने देशभर के कोली जाति को संगठित करने का काम किया।

    - अभा कोली समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे।

    - 1992 में उप्र के भाजपा अजा मोर्चा के उपाध्यक्ष मनोनीत हुए।

    - 1999 से 2002 तक भाजपा अजा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे।

    - 1970-73 के बीच इंडियन काउंसिल कांगे्रस आफ वर्ल्ड अफेयर्स के सक्रिय सदस्य रहे।

    - 16 अगस्त 2015 को बिहार के राज्यपाल के पद की शपथ ग्रहण की।

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