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    सावन के महीने में निगम नहीं पकड़ेगा सांड, खतरे में लोगों की जान

    Published: Sun, 16 Jul 2017 10:17 PM (IST) | Updated: Mon, 17 Jul 2017 03:30 PM (IST)
    By: Editorial Team
    bull gwalior mp 2017717 153051 16 07 2017

    ग्वालियर, नईदुनिया प्रतिनिधि। घर से बाहर निकलते समय रास्ते में यदि आपको यदि सांड दिखाई दे तो आप खुद ही बचकर निकलें। यह सावधानी आपको 7 अगस्त तक रखनी होगी। निगम अमला सावन का महीना खत्म होने के बाद ही सांडों को शहर की सड़कों से हटाएगा,वो भी उस स्थिति में जब इन सांडों को रखे जाने के लिए लाल टिपारा स्थित गौशाला में व्यवस्था हो जाएगी।

    सांड पकड़ने के लिए निगम द्वारा 13 जुलाई से शुरू किए गए दूसरे चरण के अभियान को लेकर जब नईदुनिया ने पड़ताल की तो जानकारी हैरान कर देने वाली सामने आई। पता चला कि निगम अमला द्वितीय चरण के अभियान में सीएम हेल्प लाइन व अन्य स्तरों पर की गई शिकायतों का निराकरण भर कर रहा है।

    निगम अमला केवल उन स्थानों पर जा रहा है, जहां के रहवासियों ने सांडों से हो रही परेशानी को लेकर सीएम हेल्पलाइन या कंट्रोल रूम में शिकायत की है। शिकायती मामलों में निगम अमला मौके से सांड पकड़कर शिकायतकर्ता को संतुष्ट भर कर रहा है,ताकि सीएम हेल्पलाइन व कंट्रोल रूम की पेंडेंसी खत्म की जा सके।

    सांड न पकड़ने के दो बड़े कारण सामने आए

    गौशाला में जगह नहीं

    सांडों को पकड़कर गौशाला न पहुंचाए जाने के दो बड़े कारण सामने आए। मुख्य कारण यह है कि गौशाला में सांडों को रखने के लिए फिलहाल जगह ही शेष नहीं है। वहां डेढ़ हजार से अधिक सांड ओर गौवंश की संख्या लगभग 5 हजार तक पहुंच गई है। यदि ऐसे हालातों में वहां सड़कों से पकड़कर बड़ी संख्या में सांड और पहुंचा दिए गए तो स्थिति गड़बड़ा जाएगी। मौसम में बड़े बदलाव के दौरान सांडों की मृत्युदर अचानक बहुत ज्यादा हो सकती है।

    सावन का महीना

    शिव आराधना से जुड़े श्रावण के महीने में निगम अमला सांड पकड़ने से बच रहा है। अभियान से जुड़े एक अधिकारी ने स्पष्ट रूप से बताया कि यदि वहां और सांड हमने पहुंचा दिए तो उनमें से बड़ी संख्या में सांड मरेंगे। वह नहीं चाहते कि इस पवित्र महीने में उनका कोई अभियान सांडों की मौत का कारण बने।

    रिकार्ड में हर दिन 15 से 16 सांड पकड़ रहे

    द्वितीय चरण के अभियान में निगम की 4 टीमें कागजी रिकार्ड में हर दिन औसतन 15-16 सांड गौशाला पहुंचा रहीं हैं। सांडों की वास्तविक संख्या का कोई रिकार्ड नहीं है,इसलिए कभी भी कोई इस बात की पड़ताल नहीं कर सकता कि हकीकत में कितने सांड वहां थे, कितने और पहुंचाए गए, कितने मर गए, कितने मौजूदा स्थिति में हैं। गौशाला केवल गायों की टैगिंग होती है, इसलिए सिर्फ इनका ही वहां विधिवत रिकार्ड है।

    ग्रामीण क्षेत्र में छोड़ने की योजना,पर खुलासा नहीं

    निगम अमला शहरी क्षेत्र से सांडों को पकड़कर दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्र में छोड़ने की योजना भी बना रहा है,लेकिन इसके लिए फिलहाल कागजी रूप में अनुमति नहीं मिली है। सूत्रों के अनुसार इस योजना पर खुले तौर पर अमल में दिक्कत यह है कि कहीं निगम अमला ग्रामीणों के हमले का शिकार न हो जाए। कारण यही कि वहां जाकर यह सांड ग्रामीणों की खेती को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

    वृहद योजना बना रहे

    हम सांडों को पकड़ने की वृहद योजना बना रहे हैं। फिलहाल निगम अमला साडों को पकड़ रहा है। गौशाला में भी व्यवस्थाएं की जा रहीं हैं। - विनोद शर्मा, निगमायुक्त ग्वालियर।

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