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    धर्म ही व्यक्ति के उत्थान के द्वार खोलता हैः विनिश्चय सागर

    Published: Tue, 12 Sep 2017 03:54 AM (IST) | Updated: Tue, 12 Sep 2017 03:54 AM (IST)
    By: Editorial Team

    मुरार स्थित जैन धर्मशाला में धर्म सभा का आयोजन

    ग्वालियर। धर्म की बात करने से पूर्व हमें धर्म के रहस्य को समझाना अनिवार्य है। धर्म एक प्रवाहित सरिता की तरह है, जिसने इस धर्म की सरिता में डुबकी लगाई है उसने सुख शांति की शीतलता निश्चित पाई है। धर्म ही व्यक्ति के उत्थान के द्वार खोलता है। धर्म से विपरीत अधर्म व्यक्ति को पतन की गर्त की ओर ले जाता है।

    यह विचार चातुर्मास कर रहे आचार्यश्री विनिश्चय सागर महाराज ने सोमवार को मुरार स्थित चिक संतर जैन धर्मशाला में धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि धर्म वह औषधि है जो मरण धर्म जीवन को अमृत्व प्रदान कर देता है। धर्म का रास्ता कठिन है लेकिन इतना कठिन भी नहीं कि हम उस रास्ते पर चल ही न सकें। धर्म के रास्त पर चलने के लिए मन की सहजता और सरलता की आवश्यकता होती है।

    विनिश्चय प्रश्नउत्तरी पत्रिका का विमोचनः आचार्य विनिश्चय सागर महाराज के सानिध्य में विनिश्चय प्रशन उत्तरी पत्रिका का विमोचन किशनलाल जैन, डालचंद्र जैन, सुरेशचंद्र जैन, पदमचंद्र जैन, विनिश्चय चातुर्मास कमेटी के मुख्य संयोजक हरिशचंद्र जैन, महामंत्री आशीष जैन आदि ने किया।

    आचार्य विमल सागर की जन्मजयंती आज मनेगीः चातुर्मास के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि आचार्यश्री विनिश्चय सागर महाराज ससंघ के सानिध्य में मंगलवार को सुबह 8 बजे से मुरार स्थित जैन धर्मशाला में आचार्यश्री विमल सागर महाराज की जन्म जयंती मनाई जाएगी।

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