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    प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में बनेगी स्वाइन फ्लू की प्रयोगशाला

    Published: Mon, 17 Apr 2017 07:50 PM (IST) | Updated: Tue, 18 Apr 2017 08:32 AM (IST)
    By: Editorial Team
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    ग्वालियर। प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में स्वाइन फ्लू की प्रयोगशाला बनाई जाएगी। राज्य शासन ने इसके लिए एमओयू (मेमोरेंडम ऑफ अंडरटेकिंग) साइन कर केन्द्र सरकार को प्रस्ताव भेज दिया है। केन्द्र से स्वीकृति मिलने के बाद काम शुरू कर दिया जाएगा। वर्तमान में भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज में प्रयोगशाला बनाने का काम शुरू हो गया है। ग्वालियर, इंदौर, जबलपुर का प्रस्ताव स्वीकृत होने के बाद वहां भी प्रयोगशाला का काम शुरू कर दिया जाएगा। यह जानकारी शासन ने स्वाइन फ्लू को लेकर दायर जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान अपने हलफनामे में जबलपुर हाईकोर्ट को दी है।

    जीवाजी विश्वविद्यालय के पूर्व कुलसचिव डॉ. डीएस चंदेल ने स्वाइन फ्लू की प्रयोगशाला को लेकर कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया था कि स्वाइन फ्लू खतरनाक बीमारी है। इसकी जांच के लिए ग्वालियर-चंबल संभाग में प्रयोगशाला नहीं है।

    वर्तमान में इसकी जांच डीआरडीई के भरोसे है और उसकी रिपोर्ट भी गलत निकल रही है। बताया गया कि याचिकाककर्ता की पुत्रवधू विंध्यवासिणी की मौत भी गलत इलाज की वजह से हुई थी।

    डीआरडीई की रिपोर्ट में उन्हें स्वाइन फ्लू नहीं बताया गया था, लेकिन जब दिल्ली में जांच कराई गई तो उन्हें स्वाइन फ्लू निकला। जब तक इसके बारे में पता चला, स्वाइन फ्लू आखिरी स्टेज पर पहुंच गया था।

    इससे उनके पुत्रवधू की मौत हो गई थी। इसलिए जिला स्तर पर भी स्वाइन फ्लू की जांच के लिए प्रयोगशाला होनी चाहिए। हाईकोर्ट ने नोटिस जारी कर शासन से इस संबंध में जवाब मांगा था, लेकिन इसके बाद याचिका का स्थानांतरण हाईकोर्ट की जबलपुर खंडपीठ में कर दिया गया।

    जबलपुर हाईकोर्ट ने भी शासन से स्वाइन फ्लू की प्रयोगशाला को लेकर जवाब मांगा था। इस पर जबलपुर मेडिकल कॉलेज के प्रो. आरके जैन ने 9 मार्च 2017 को शासन की ओर से एक हलफनामा पेश किया। इसमें बताया गया कि ग्वालियर, इंदौर, जबलपुर मेडीकल कॉलेज में स्वाइन फ्लू की जांच के लिए प्रयोगशाला का प्रस्ताव तैयार हो चुका है।

    20 फरवरी 2017 को एमओयू साइन कर प्रयोगशाला बनाने का प्रस्ताव केन्द्र शासन को भेज दिया है। भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज में प्रयोगशाला बनाने का काम शुरू हो गया है। उपकरण खरीदने का काम भी चल रहा है। ग्वालियर, इंदौर, जबलपुर का प्रस्ताव स्वीकृत होने के बाद वहां भी प्रयोगशाला का काम शुरू कर दिया जाएगा।

    याचिका की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने केन्द्र शासन को आदेश दिया है कि शीघ्र प्रयोगशाला के निर्माण को स्वीकृति दें। इसके बाद हाईकोर्ट ने जनहित याचिका का यह कहते हुए निराकरण कर दिया है कि प्रयोगशाला बनाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसलिए अब मॉनिटरिंग की जरूरत नहीं है। याचिका की सुनवाई चीफ जस्टिस की बेंच ने की थी।

    गलत इलाज की वजह से हुई थी विंध्यवासिणी की मौत

    जीवाजी विश्वविविद्यालय के पूर्व कुलसचिव डॉ. डीएस चंदेल की पुत्रवधू विंध्यवासिणी की तबीयत खराब होने पर फरवरी 2015 में परिवार के लोगों ने उन्हें परिवार हॉस्पिटल में भर्ती कराया था।

    यहां उन्हें निमोनिया बताया गया और इसके बाद उनकी हालत बिगड़ती गई। जब उनके स्वास्थ्य में कोई सुधार नहीं हुआ तो डीआरडीई में उनके स्वाइन फ्लू की जांच कराई गई। डीआरडीई ने स्वाइन फ्लू निगेटिव बताया। जब तबीयत ज्यादा बिगड़ी तो उन्हें एयर एम्बुलेंस से दिल्ली भेजा गया।

    दिल्ली में स्वाइन फ्लू की जांच कराई गई तो वह पॉजिटिव निकली, लेकिन तब तक विंध्यवासिणी की हालत ज्यादा खराब हो गई थी। दिल्ली में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। इसके बाद डीएस चंदेल ने अपने पौत्र की डीआरडीई में जांच कराई तो उसे भी स्वाइन फ्लू बता दिया गया। जबकि दिल्ली में इसकी जांच कराने पर रिपोर्ट निगेटिव आई।

    डॉ. डीएस चंदेल की पुत्रवधू की मौत गलत रिपोर्ट की वजह से हुई। अपने पौत्र को लेकर भी वो परेशान हुए। इस पर उन्होंने कोर्ट में जनहित याचिका दायर की। जिला स्तर पर स्वाइन फ्लू की लैब बनाने की मांग की। हाईकोर्ट द्वारा दिए गए आदेश के बाद स्वाइन फ्लू की प्रयोगशाला बनाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।

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