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    जो सामग्री महंगी हुई उसके मनमाने दाम वसूले रहे, सस्ते के घटाए नहीं

    Published: Mon, 14 Aug 2017 04:02 AM (IST) | Updated: Mon, 14 Aug 2017 04:02 AM (IST)
    By: Editorial Team

    लीड खबर...........

    कैचवर्डः सामग्री पर पुरानी एमआरपी के बगल में नहीं चिपकाए नए दाम वाले स्टीकर, नतीजा...

    हैडिंगः जो सामग्री महंगी हुई उसके मनमाने दाम वसूले रहे, सस्ते के घटाए नहीं

    सबहैडिंगः जीएसटी के नाम पर हर रोज ठगा रहा ग्राहक

    फोटो 01 हरदा। बाजार क्षेत्र।

    फोटो 02 हरदा। जीएसटी।

    हरदा। नवदुनिया प्रतिनिधि

    एक जुलाई से जीएसटी लागू होने के डेढ महीने बाद भी बाजार में व्यापारी मनमानी कर रहे हैं। वे अपने स्तर पर दाम तय कर लोगों को चीजें बेच रहे हैं। जो चीजें महंगी हुई उनमें एमआरपी से अधिक दाम वसूले जा रहे हैं। जबकि आम उपयोग वाली दूध सहित अन्य चीजें सस्ती होने के बावजूद पुराने दाम पर ही बिक रही हैं। ऐसा इसलिए हो पा रहा है क्योंकि शासन के आदेश के बावजूद किसी भी सामग्री पर पुरानी एमआरपी के बगल में नए दाम वाले स्टीकर चस्पा नहीं किए हैं। जिसके कारण रोज हजारों उपभोक्ताओं को नुकसान उठाना पड़ रहा है। लोगों से व्यापारी ज्यादा दाम वसूल रहे हैं। बाजार में दुकानदार महंगी हुई चीजों को तो मनमाने दाम बेच रहे हैं। सस्ती हुई चीजों के दाम कम नहीं कर रहे हैं। इससे लोगों पर दोगुनी मार पड़ रही है। जिन वस्तुओं के दाम सस्ते होने की आस लगाकर लोग खुश हो रहे थे, वे भी पुराने दाम पर ही बिक रही हैं। सामान पर नई एमआरपी वाले स्टीकर कहीं पर भी नहीं चिपकाए गए हैं लेकिन दाम मन से निर्धारित कर दिए हैं। कुल मिलाकर जीएसटी के नाम पर लोगों को खुलेआम ठगा जा रहा है।

    महंगी सामग्री पर व्यापारी का एक ही जवाब जीएसटी

    आप बाजार में कुछ भी खरीदने जाओ, यदि आपको ऐसा लगता है कि यह पहले से महंगे दाम पर मिल रही है या इसके रेट तो काफी ज्यादा है, तो उसका जवाब व्यापारी सिर्फ एक ही शब्द से देगा और वह है जीएसटी। अर्थात आप बाजार से कोई भी सामान लो यदि उसके दाम को लेकर आपने कोई भी बात की तो व्यापारी आपको जीएसटी शब्द थमा देगा। अधिकतर ग्राहक भी जीएसटी सुन मोलभाव नहीं करते। जबकि वास्तविकता ठीक इसके उलट है। जीएसटी में यदि कुछ सामानों के दाम बढ़े है तो बहुत सी सामग्री के दाम कम भी हो गए है, लेकिन जानकारी नहीं होने के कारण हर रोज हजारों उपभोक्ताओं को टेक्स के नाम पर ठगा जाता है।

    विभाग भी प्रावधानों को समझने में लगा हुआ

    जीएसटी को लेकर व्यापारी हो या विभाग, अभी सबकुछ किसी के लिए पूरी तरह से स्पष्ट नहीं है। वाणिज्य कर विभाग स्वयं नए प्रावधानों को ठीक से समझने में लगा हुआ है। जीएसटी में उनकी भूमिका भी अभी स्पष्ट नहीं है। जिले में 150 कारोबारियों के माइग्रेशन उलझे हुए हैं। इधर व्यापारियों का कहना है कि जीएसटी हमारी गले की हड्डी बन गया है। खबर तो यह भी है कि अब तक जीएसटी रिटर्न के फार्म ही नहीं दिए गए हैं, इससे परेशानी हो रही है। वाणिज्य कर विभाग से मिली जानकारी के अनुसार जिले में 2 हजार 700 व्यापारी है। इनमें से 95 फीसदी को जीएसटी नंबर जारी हो गया है। शेष का माइग्रेशन उलझा है या उन्होने एप्लाई ही नहीं किया है।

    बॉक्स में लगाना है...

    ऐसे समझे जीएसटी लागू होने के बाद कैसे आपको ठगा जा रहा...

    1. जीएसटी बेअसर, नहीं घटाए दाम :

    जीएसटी में दूध सस्ता किया है। दूध अब भी पुराने दाम पर ही बिक रहा है। खुले दूध के दाम भी नहीं घटाए हैं। जूस युक्त ड्रिंक्स सस्ते किए जाने थे, लेकिन असर नहीं है। सब कुछ पहले की तरह पुराने रेट पर ही बिक रहा है।

    2. एमआरपी वही दाम अधिक :

    पान मसाला पाउच पर प्रिंट तो 5 रुपए ही होता है लेकिन वसूले 6 रुपए जा रहे हैं। सिगरेट के दाम 3 रुपए तक बढ़ा दिए हैं। अन्य खाद्य सामग्रियों की भी यही स्थिति है, मनमाने दाम ग्राहकों से वसूल किए जा रहे है।

    बॉक्स में लगाना है...

    ऐसे समझे किस सामग्री पर कितना लगेगा जीएसटी...

    जिन पर नहीं लगेगा टैक्स : ताजा दूध, खुला खाद्य अनाज, ताजा फल, ताजी सब्जियां, नमक, गुड़, अंडे, खुला पनीर, चावल, पापड़, रोटी, जानवरों का चारा, गर्भनिरोधक दवाएं, किताबें, जलावन की लकड़ी, चूड़ियां (गैर कीमती), फूल भरी झाड़ू।

    इन पर लगेगा 5 फीसदी टैक्स : चाय, कॉफी, खाने का तेल, ब्रांडेड अनाज, सोयाबीन, सूरजमुखी के बीज, ब्रांडेड पनीर, केरोसीन, घरेलू उपभोग के लिए एलपीजी, काजू-किशमिश, जूते, कपड़े, ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्ट, हैंड पंप, लोहा, स्टील, लोहे की मिश्रधातुएं, तांबे के बर्तन।

    इन पर लगेगा 12 फीसदी टैक्स : ड्राई फ्रूट्स, घी, मक्खन, नमकीन, मांस-मछली, दूध से बने ड्रींक्स, बायो गैस, मोमबत्ती, अगरबत्ती, दंत मंजन पाउडर, चश्मे के लेंस, बधाों की ड्रॉइंग बुक, कैलेंडर्स, एलपीजी स्टोव, नट, बोल्ट, ट्रैक्टर, साइकल, एलईडी लाइट, खेल का सामान, मोबाइल फोन।

    इन पर लगेगा 18 फीसदी टैक्स : रिफाइंड शुगर, कंडेंस्ड मिल्क, प्रिजर्व्ड सब्जियां, बालों का तेल, साबुन, हेलमेट, नोटबुक, जैम, जेली, सॉस, सूप, आइसक्रीम, इंस्टैंट फूड मिक्सेस, मिनरल वॉटर, पेट्रोलियम जेली, पेट्रोलियम कोक, टॉयलेट पेपर, प्रिंटर, कंप्यूटर।

    इन पर लगेगा 28 फीसदी टैक्स : मोटरकार, मोटर साइकल, चॉकलेट, ऑयल, पान मसाला, फ्रिज, परफ्यूम, डियोड्रेंट, मेकअप का सामान, वॉल पुट्टी, दीवार के पेंट, टूथपेस्ट, शेविंग क्रीम, प्लास्टिक प्रोडक्ट, रबर टायर, चमड़े के बैग, मार्बल, वॉशिंग मशीन।

    बॉक्स में लगाना है...

    सबसे ज्यादा स्टेशनरी में मची है लूट

    इन दिनों जीएसटी के नाम पर सबसे ज्यादा खुली लूट स्टेशनरी की दुकान पर मची हुई है। ग्राहक जब भी महंगी कापी-किताब के बारे में दुकानदार से बात करता है, वह जीएसटी का हवाला देता है। हालात यह है कि प्ले ग्रुप और नर्सरी की किताबे एक हजार रूपए के पार पहुंच गई है। स्टेशनरी से जुड़ी अलग-अलग सामग्री पर जीएसटी की अलग-अलग दर लागू है। दुकानदार बस इसी का फायदा उठा रहा है। ग्राहक को जानकारी है नहीं, जिसके कारण मनमाने दाम वसूले जा रहे है। जिसका नतीजा यह है कि कॉलेज से महंगी कापी पुस्तके प्ले ग्रुप से लेकर पांचवी कक्षा तक है। कमीशन के खेल के कारण यह सामग्री एमआरपी दर पर ही बेची जा रही है, जिसके कारण उपभोक्ता को कई गुना इसकी कीमत चुकानी पड़ रही है।

    इनका कहना हैः-

    यदि पुरानी एमआरपी के बगल में नई एमआरपी (जीएसटी के अनुसार) का स्टीकर नहीं लगाया है तो यह गलत है। जांच कर संबंधित के विरूद्घ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। यह भी स्पष्ट निर्देश है कि स्टीकर पुरानी एमआरपी के ऊपर नहीं बल्कि बगल में लगाना है, ताकि जब तक नए टैक्स के हिसाब से तय दाम का रेपर नहीं आ रहा है, तब तक उपभोक्ता को स्पष्ट मालूम हो कि जीएसटी के बाद वह जो सामग्री खरीद रहा है वह सस्ती हुई है या महंगी।

    - संजीव परते, जिला वाणिज्यकर अधिकारी।

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