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    किसान को बीमार का इलाज कराने को भी नहीं मिल रहे पैसे

    Published: Sat, 14 Oct 2017 04:09 AM (IST) | Updated: Sat, 14 Oct 2017 04:09 AM (IST)
    By: Editorial Team

    बनखेड़ी । साहब मेरी मां बीमार है नागपुर जाना है मेरे खाते में मूंग के पैसे है दे दो ... तो कोई किसान गिड़गिड़ा रहा है कि मेरे घर में रसोई है मेरे पैसे दे दों तो मैं रसोई कर लूं । ऐसी स्थिति जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक मर्यादित होशंगाबाद की शाखा बनखेड़ी के प्रांगण ही है । जहां पर किसान अपने पैसे के लिए दस दिनों से गिड़गिड़ा रहे है । लेकिन किसानों को कभी 2 हजार तो कभी 5 हजार रुपए देकर रवाना कर दिया जाता है । जबकि किसानों के खाते में लाखों रुपए पडे है । लेकिन बैंक में पैसे नहीं होने के कारण किसानों को उनके पैसे नहीं मिल पा रहे है । बैंक की यह स्थिति लगभग दस दिनों से बनी हुई है । यही स्थिति उमरधा बैंक ही है वहां पर लगभग 2 करोंड की देनदारी है । बैंक में नकद राशि की कमी की स्थिति होशंगाबाद जिला सहकारी केन्द्रीय मर्यादित बैंक में चल रहे विवाद के कारण बन रही है । इस संबंध में भाजपा के पदाधिकारी खुलकर कुछ नहीं कह पा रहे है । नाम न बताने की शर्त पर भाजपा के एक पदाधिकारी ने समस्या की जड ऊपर के पदाधिकारियों की आपसी खीचतान को माना है । शाखा प्रबंधक बीडी पारासर ने बताया कि लगभग 3 करोड रुपए की देनदारी मूंग की बाकी है । बैंक डिमांड करती है लेकिन जिला केन्द्र से पैसे नहीं आने के कारण परेशानी जा रही है । होशंगाबाद डीएमओं से ही 50 लाख का भुगतान आना शेष है । शाखाप्रबंधक ने बताया कि किसानों के भुगतान के अलावा एक सप्ताह से ज्यादा समय से पडे चेक भी क्लियर करने होते है ।

    रोज जलता है सौ का प्रेट्रोल - बैंक में चांदौन के मेहरबान पटैल, माल्हनवाडा के चंदन सिंह , जूनावानीढाना के अनिल पाटकार, कोशकरपा से बैनी सिंह सहित सैकडों किसान है जो लगभग दस दिनों से प्रतिदिन बैंक आते है । और शाम तक उन्हें 2 हजार या 5 हजार रुपए की राशि देकर वापस कर दिया जाता है । इन्हें बैंक में भुगतान लेन के लिए लगभग सौ का प्रेट्रोल और चाय नाश्ता मिलाकर प्रतिदिन डेढ सौ रुपए का खर्च आ रहा है । जूनावानीढाना के अनिल पाटकार ने बताया कि इससे अच्छा होता कि वो अपनी मूंग दलाल को कम रेट में बेच देते । प्रतिदिन आवश्यक काम छोडकर बैंक के चक्कर लगा रहा हूं । वहीं कोशकरपा के बैनी सिंह ने बताया कि उन्हें अपने पिता के इलाज के लिए पैसे की जरूरत है । लेकिन वो भी नहीं मिल पा रहे है ।

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