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    - पंचायत प्रतिनिधियों के अधिकार छीन कर पंचायत राज व्यवस्था को किया जा रहा चौपट

    Published: Wed, 15 Nov 2017 07:00 PM (IST) | Updated: Wed, 15 Nov 2017 07:00 PM (IST)
    By: Editorial Team

    15की लीड

    फोटो-15 होशंगाबाद 06

    केप्सन- भाजपा कार्यालय में प्रदेश महामंत्री के आगमन पर सरपंच संगठन ने मुलाकात की। फाइल फोटो।

    होशंगाबाद। जिले की अनेक ग्राम पंचायतों के सरपंचों ने मंगलवार को शाम के समय भाजपा के प्रदेश महामंत्री सुहास भगत से मुलाकात करते हुए पंचायातों में ब्यूरोकेसी के हावी होने से पंचायत राज्य व्यवस्था बुरी तरह फैल होने की जानकारी दी। बड़े दुखी मन से सरपंचों के प्रतिनिधि मंडल ने उन्हें बताया कि ब्यूरोकेसी द्वारा बेफिजूल के नियमों को लाद कर पंचायत के अधिकारों पर अतिक्रमण कर महत्वपूर्ण जनहित से जुड़े हुए कार्यों में अड़ंगा डाला जाता है। इसके कारण ग्रामीण क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों को अधिकार विहीन करते हुए अनावश्यक की परेशानी में डाला जा रहा है। इससे ग्रामीण क्षेत्र में विकास कार्य गति नहीं पकड़ रहे हैं। सरपंचों के प्रतिनिधि मंडल ने कहा कि आप हमारी बात को सीधे मुख्यमंत्री को बताएंगे तो उसका ज्यादा असर होगा। सुहास भगत ने पूरे मन से सरपंचों की बात सुनकर मुख्यमंत्री तक पहुंचाने का आश्वासन दिया है।

    चार पेज की दी चिट्ठी

    सरपंच संघ ने अपनी पूरी पीड़ा सुहास भगत के सामने व्यक्त करते हुए उन्हें लिखित में भी चार पेज की एक चिट्ठी देते हुए कहा कि समय रहते यदि ब्योरोकेसी पर नियंत्रण नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में पंचायत राज व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो जाएगी। इसी के साथ पंचायत राज के लिए ग्रामीण क्षेत्र के लोगों का रूझान ही नहंी रहेगा। इस लिए जनहित से जुड़े कार्यों में राहत प्रदान करने के लिए पंचायत के प्रतिनिधियों को महत्व दिया जाए।

    हो गए हैं अधिकार विहीन

    सरपंचों ने कहा कि यह कोई होशंगाबाद जिले की ही बात नहीं है पूरे प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत राज व्यवस्था से जुड़े हुए साथियों का दर्द है। उनका कहना है कि हमें वर्तमान में पंच वर्षीय में अधिकार विहीन कर दिया गया है। यह न्यायोचित नहीं है। पूरे प्रदेश में सरपंच और सविवों ने धरना प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री का ध्यानाकर्षण कराया था। लेकिन उसके बाद भी अधिकारों पर कोई ध्या नहीं दिया गया। जिससे सरपंच परेशान हैं।

    जुलानिया के नियमों से परेशानी

    दी गई चिट्ठी और मौखिक रूप से सरपंचों ने उन्हें बताया कि पंचायत राज में बैठे प्रमुख सचिव राधेश्याम जुलानिया के तुगलकी फरमानों से पूरे प्रदेश में पंचायती राज व्यवस्स्था चौपट हो रही है। इसके बाद भी सरकार की ओर से कोई ठोस कार्रवाई ऐसे अधिकारी के खिलाफ नहीं की गई। इससे भी सरपंच सहित सचिव और पूरी पंचायत व्यवस्था त्रस्त है। सरपंचों ने उनसे मांग की है कि उन्हें उनके अधिकार प्रदान किए जाएं।

    17 सूत्रीय सुझाव दिए

    सरपंच संघ ने लिखित में 17 सूत्रीय सुझाव देकर अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए अधिकारों को पुनः वापस दिलाने की मांग की है। प्रमुख सुझाव इस प्रकार हैं।

    . मजबूत पंचायत राज व्यस्था के लिए 1993का अधिनियम लागू किया जाए।

    . ग्राम पंचायत द्वारा अनुमोदित निर्णयों केा सर्वोपरि मान कर कार्य कराए जाए।

    . प्रयोगों को बंद कर पंचायतों में राशि आहरण की व्यवस्था सही की जाए।

    . सीम आवास योजना बंद कर दी गई उसे जनहित में पुनः चालू की जाए।

    . पीएम आवास पंचायतों की अनुमोदित सूची के अनुसार लाभ दिया जाए।

    . निर्माण कार्य नपा लोनिवि रेटों पर पंचायतों में लागू किया जाना चाहिए।

    . डीपीआर सिस्टम बंद कर पूर्व की तरह एस्टीमेट बनाने का कार्य जारी रहे।

    .पंच परमेश्वर की राशि से सभी निर्माण कार्य के अधिकार दिए जाएं।

    . सरपंचों को सम्मानजनक मानदेय प्रदान किया जाना चाहिए।

    . निर्माण कार्य के लिए रेत, भसुआ, मुरम, गिट्टी पर सरंपच का पत्र मान्य हो।

    . भावांतर योजना से किसानों को हानि है इसलिए इसे तत्काल बंद किया जाए।

    .कृषि यंत्रों का टारगेट बढ़ाकर उस पर जीएसटी मुक्त रखा जाए।

    सरंपच प्रतिनिधि रहे मौजूद

    समस्याओं को रखते हुए उक्त मुलाकात के दौरान सरपंच संघ के अध्यक्ष बबलू शर्मा, प्रदीप दुबे, कन्हैया लाल वर्मा, पिंकी चौरे, राजू गौर, सहित अन्य अनेक सरपंच शामिल थे।

    और जानें :  # Hoshangabad news
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