Naidunia
    Sunday, October 22, 2017
    Previous

    बेटी के जन्म पर इस गांव में लगाए जाते हैं 111 पेड़

    Published: Thu, 14 Sep 2017 11:30 AM (IST) | Updated: Thu, 14 Sep 2017 11:51 AM (IST)
    By: Editorial Team
    plant tree in vllage 2017914 11425 14 09 2017

    इंदौर, नईदुनिया रिपोर्टर। 2005 में जब मैं सरपंच बना तो गांव की स्थिति काफी दयनीय थी। संगमरमर की खदानों में खुदाई के कारण प्रदूषण बहुत हो रहा था, लोग दूसरी जगहों पर पलायन कर रहे थे, वन्यप्राणी समाप्त हो रहे थे। ऐसे में मेरे सामने चुनौती थी की कैसे इस गांव को ऐसा बनाऊं की लोग यहां से जाऐं ना बल्कि दूसरे स्थानों से लोग यहां पलायन करें। मैंने इसके लिए गांव वालों के सहयोग से सरकारी योजनाओं और मशीनरी का उपयोग कर सरकारी जमीन पर वृक्षारोपण कराया।

    आज यही गांव हरित विकास में पूरे भारत में अपनी पहचान स्थापित कर रहा है। राजस्थान के पिपलांत्री पंचायत के सरपंच श्याम सुंदर पालीवाल ने अपने छोटे से गांव का नक्शा ही बदल दिया है और उसे शिक्षा, रोजगार, पर्यटन हर क्षेत्र में आगे बढ़ाने की मिसाल कायम की है।

    राष्ट्रपति पुरुस्कार से सम्मानित पालीवाल हरित क्रांति के मामले में देशभर में हजारों सरपंचों के रोल मॉडल बन चुके हैं। पालीवाल ने बुधवार को शहर में प्रेसवार्ता में बताया की सरपंच बनने के बाद से वे अब तक यहां साढ़े तीन लाख से अधिक वृक्ष लगा चुके हैं।

    स्वयं की बेटी के जन्म पर 111 पेड़ लगाए और गांव में हर बच्ची के जन्म पर पेड़ लगाने की परंपरा शुरू की। ये लड़कियां ही इनकी देखरेख करती हैं। हर उत्सव में पेड़ लगाये जाते हैं। आज छोटा सा यह गांव निर्मल ग्राम, पर्यटन ग्राम, स्वजल ग्राम और औषधीय खेती के तीर्थ के रूप में जाना जा रहा है।

    जलसंरक्षण सबसे जरूरी

    पर्यावरणविद् के रूप में पहचान बनाने वाले पालिवाल ने कहा की ग्रामीण विकास के सारे रास्ते जल संरक्षण से होकर गुजरते हैं। वर्षा के जल को संचित करना जरूरी है क्योंकि यह जमीन में नमी पैदा करता है और इसमें लगने वाले पौधे ज्यादा जल्दी बढ़ते हैं और सालों जिंदा रहते हैं। नदी के आसपास केचमेंट ऐरिया में पेड़ लगाने से नदियों को बचा सकते हैं। लेकिन ये सब काम तब ही सफल हो सकते हैं जब इनमें उस गांव के लोगों को जोड़ा जाएगा। सिर्फ नीति बनाने से सफलता मिलना संभव नहीं है। यह सुनिश्चित करना होगा की एक सीमा तक ही प्राकृतिक संसाधनों का दोहन हो।

    वन्यजीवों का संरक्षण जरूरी

    पालीवाल ने कहा की प्रकृति पर जितना मनुष्य का अधिकार है उतना ही वन्य प्राणियों का भी है। इसलिए प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने के लिए वन्य जीवों को बचाना हमारा कर्तव्य है।

    सरपंच चाहें तो बहुत कुछ कर सकता है

    हरित क्रांति से राजसमंद के छोटे से गांव की तस्वीर बदल चुके पालीवाल का कहना है की सरपंच का काम सिर्फ एक कमरे पंखे के नीचे बैठे रहना नहीं है बल्कि सरकारी योजनाओं, सरकारी जमीन और सरकारी मशीनरी का सही उपयोग कर गांवों का चंहुमुखी विकास करना है। इस हेतु उसे सरपंच पद का टिकिट देने के पहले यह सुनिश्चित करना चाहिए की उसके नाम से कोई सरकारी संपत्ति तो नहीं है या उसने कभी सरकारी संपत्ति का दुरुपयोग तो नहीं किया है।

    रोजगार की अपार संभावना

    प्रकृति संरक्षण के साथ लोगों को रोजगार मिल सकता है। जल संरक्षण के लिए गड्डे खोदने से लेकर पेड़ लगाने के काम में और उनसे प्राप्त उत्पादों के व्यापार में कई लोगों को रोजगार मिलता है। आम, आंवला, ऐलोवेरा, बांस जैसे वृक्ष लगाकर इनसे कई उत्पाद बनाए जा रहे हैं और कई लोगों को रोजगार मिल रहा है।

    प्रतिक्रिया दें
    English Hindi Characters remaining


    या निम्न जानकारी पूर्ण करें
    नाम*
    ईमेल*
    Word Verification:*
    Please answer this simple math question.
    +=

      जरूर पढ़ें