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    तुम्हारा इलाज तो मुख्यमंत्री करवा रहे, मेरा नहीं करा सकते क्या?

    Published: Mon, 20 Mar 2017 03:57 AM (IST) | Updated: Mon, 20 Mar 2017 10:15 AM (IST)
    By: Editorial Team
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    इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। मुझे घर जाना है। दर्द सहते-सहते मैं थक गया हूं। एक महीना हो गया। मम्मी को भी नहीं देखा। दादा और पापा के पास पैसे भी खत्म हो गए। श्वेता तुम्हारा इलाज तो मुख्यमंत्री करवा रहे हैं। वे मेरी मदद नहीं कर सकते क्या? मुझे भी जीना है।

    यह पीड़ा है 14 साल के थैलेसीमिया पीड़ित प्रशांत सेन की। जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहा गुना का प्रशांत पिता आनंद सीएचएल अस्पताल में भर्ती है। रविवार को जब यहां उसकी मुलाकात इसी बीमारी से पीड़ित श्वेता से हुई तो वह यह कहते हुए रो पड़ा।

    प्रशांत गुना की ही श्वेता पिता बनेसिंह के साथ ब्लड चढ़वाने अस्पताल जाता था। वहां दोनों में पहचान हुई और श्वेता प्रशांत को राखी बांधने लगी। पिछले दिनों श्वेता की खबर समाचार पत्र में प्रकाशित होने के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सीएचएल अस्पताल में उसका मुफ्त इलाज कराने की घोषणा की थी।

    इसके बाद रविवार को पहली बार श्वेता अस्पताल में इलाज कराने आई। यहां प्रशांत भी भर्ती था। उसकी हालत श्वेता से भी ज्यादा खराब है। आयरन बढ़ जाने से उसकी किडनी, लिवर और हार्ट पर भी असर होने लगा है। डॉक्टरों ने जल्द से जल्द तिल्ली के ऑपरेशन के लिए कहा है।

    आईसोवा ने की मदद की शुरुआत

    प्रशांत के इलाज के लिए उसकी बुआ लगातार भोपाल में आईएएस अफसर शेखर वर्मा के संपर्क में थी। शेखर ने ही प्रशांत को एमवायएच से निकालकर सीएचएल में भर्ती करवाया। अस्पताल के खर्च की बात आई तो उन्होंने आईसोवा मध्य प्रदेश से संपर्क किया। यह आईएएस अफसरों की पत्नियों का संगठन है। इंदौर में संभागायुक्त रह चुके व वर्तमान में मुख्य सचिव बीपी सिंह की पत्नी इंदु सिंह आईसोवा की अध्यक्ष हैं। उन्होंने बच्चे के इलाज के लिए अन्य सदस्यों को प्रोत्साहित किया। औपचारिकता के तुरंत बच्चे की मदद के लिए 50 हजार रुपए दिए।

    दादा बोले- पोते को बचाने में ही बुढ़ापा निकल गया

    प्रशांत के दादा प्रीतम सिंह बोले कि चौदह साल से उनकी जिंदगी सिर्फ पोते की जिंदगी बचाने में लगी हुई है। हर पंद्रह दिन में बच्चे को ब्लड चढ़ाने के लिए गुना से उज्जैन लेकर आना-जाना ही जिंदगी बन गई है। दादा-दादी ही बच्चे का ध्यान रखते हैं। प्रशांत ने कहा कि मेरी मम्मी कभी अस्पताल नहीं आती। वह सूई लगते देखकर डर जाती है। हमेशा दादा-दादी ही साथ आते हैं।

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