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    बड़े भूखंडों पर खुद के आवास के लिए देना होगा 130 रुपए वर्गफीट का विकास शुल्क

    Published: Wed, 15 Nov 2017 03:58 AM (IST) | Updated: Wed, 15 Nov 2017 10:28 AM (IST)
    By: Editorial Team
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    इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। नगर निगम परिषद के मंगलवार को हुए सम्मेलन में स्वीकृति के लिए रखे गए 17 प्रस्ताव बिना चर्चा के लिए पास हो गए। सबसे महत्वपूर्ण प्रस्ताव बड़े भूखंडों पर खुद के आवास के तहत लगने वाले विकास शुल्क में बढ़ोतरी का था। अब ऐसे लोगों को निगम में विकास शुल्क के रूप में 30 के बजाय 130 रुपए प्रति वर्गफीट का विकास शुल्क चुकाना होगा।

    एक और महत्वपूर्ण प्रस्ताव निगम द्वारा जब्त गुमटी-ठेले छोड़ने का भी था। निगम अब गुमटी-ठेले छोड़ने पर अधिकतम पांच हजार रुपए का तक का जुर्माना कर सकेगा। इसके अलावा साहूकारी के लिए लाइसेंस देने का प्रस्ताव भी परिषद में बिना किसी चर्चा के अनुमोदित कर दिया गया।

    इन सभी प्रस्तावों को मेयर-इन-काउंसिल (एमआईसी) से पहले ही अनौपचारिक मंजूरी मिल चुकी थी। उन्हें औपचारिक मंजूरी के लिए परिषद के समक्ष रखा गया था। निगम परिषद के सम्मेलन में लिंक और एप्रोच रोड पैकेज-3, शहर में 42 हजार एलईडी लाइट लगाने, नौ संस्थाओं को 42 लाख रुपए के अनुदान, शहर में जोन की संख्या 19 से बढ़ाकर 22 करने, प्राणी संग्रहालय में पीपीपी मॉडल पर फूड जोन की स्थापना, संधारण और संचालन का ठेका देने संबंधी समेत तमाम 17 प्रस्ताव चंद मिनदों में पास कर दिए गए।

    इधर, विपक्ष ने सभापति पर आरोप लगाया कि उन्होंने पांच मिनट में एजेंडे के 17 विषयों को बिना किसी चर्चा के पास करा दिया। विपक्षी पार्षदों ने सभापति की आसंदी घेरकर कड़ा विरोध दर्ज कराया लेकिन कांग्रेस कोर्ट जाएगी और सप्रमाण सत्तापक्ष को चुनौती देगी।

    इसलिए बढ़ाना पड़ा विकास शुल्क

    निगम सूत्रों ने बताया कि एक एकड़ से ऊपर जमीन पर खुद के आवास के नाम पर लोग खसरे के प्लॉट का डायवर्शन करवाकर टीएंडसीपी से स्वीकृति लेते हैं। ऐसे मामलों में निगम अब तक 30 रुपए प्रति वर्गफीट का शुल्क लेता है जबकि इतने बड़े आकार के भूखंडों के आसपास सड़क, ड्रेनेज, बिजली, स्ट्रीट लाइट, पानी आदि के लिए कहीं ज्यादा राशि खर्च करना पड़ती है। इससे निगम को आर्थिक नुकसान होता है। इसीलिए तय किया गया है कि अब निगम यह भार खुद न उठाते हुए स्वीकृति लेने वाले भूखंड मालिक से 30 के बजाय 130 रुपए प्रति वर्गफीट के हिसाब से विकास शुल्क लेगा। खासतौर से इस तरह की स्वीकृतियां शहरी सीमा में आए गांवों के लिए ली जाती हैं। इनमें बिचौली मर्दाना, बिचौली हप्सी, निपानिया, पीपल्याकुम्हार और प्रगति विहार जैसे क्षेत्र शामिल हैं।

    इंदौर को इंदूर करने के प्रस्ताव पर तथ्य देखकर लेंगे निर्णय

    बैठक में एमआईसी सदस्य सुधीर देड़गे ने इंदौर का नाम इंदूर करने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि इतिहास में हर जगह इंदूर का ही उल्लेख है लेकिन अंग्रेज इंदूर का उच्चारण इंदौर करते थे इसलिए अपभ्रंश होकर इंदौर हो गया। नेता प्रतिपक्ष ने शहर का नया नाम देवी अहिल्या इंदूर करने का सुझाव दिया। बाद में सभापति ने देड़गे से कहा कि वे इंदूर नाम के संबंध में तमाम तथ्य सदन के समक्ष रखें। इसके बाद फैसला लिया जाएगा।

    होलकर स्टेडियम को लेकर घिरे देड़गे

    होलकर स्टेडियम परिसर में पार्किंग की जमीन पर बनी प्रशासनिक बिल्डिंग को लेकर पार्षद कविता खोवाल ने अनुमति संबंधी जानकारी चाही थी। देड़गे ने जवाब दिया कि जब अनुमति दी गई थी तो स्टेडियम के लिए भवन और पार्किंग संबंधी नियम साफ नहीं थे। इस पर खोवाल के साथ सभापति अजयसिंह नरूका ने भी देड़गे को घेरा और बोले कि जो सवाल पूछा गया है, उसी का जवाब दें। कुछ देर इस विषय को लेकर हंगामा भी हुआ। सभापति ने देड़गे से कहा कि इतने महीनों बाद आप उत्तर दे रहे हो, वह भी स्पष्ट नहीं है। इस बारे में सारे तथ्य भविष्य में सदन के सामने रखें।

    नाराज सभापति काली पट्टी बांधकर आए

    सभापति नरूका सम्मेलन के दौरान कलाई पर काली पट्टी बांधकर आए। शायद ही किसी सभापति ने इस तरह से विरोध दर्ज कराया हो। मीडिया को उन्होंने बताया कि निगम में प्रशासकीय तालमेल का अभाव है। उन्होंने बिना किसी का नाम लिए कहा- मैंने जिनका विरोध किया, वे समझ गए हैं। हालांकि सभापति की कार्यप्रणाली को लेकर अकसर पक्ष और विपक्ष के पार्षद सवाल उठाते रहे हैं।

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