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    पारा 44 डिग्री पर, बेहोश होकर गिर रहे पक्षी, बचाने आगे आए रहवासी

    Published: Mon, 06 Jun 2016 12:01 AM (IST) | Updated: Thu, 16 Mar 2017 10:05 PM (IST)
    By: Editorial Team
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    इंदौर। भीषण गर्मी में गौरैया, कबूतर, तोते और बगुले जैसे पक्षी भी ड्रीहाइड्रेशन और लू (हीट स्ट्रोक) के शिकार होने लगे हैं। बेहोश होकर पेड़ से गिरने के दृश्य रोज शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में नजर आ रहे हैं। इन्हें बचाने का प्रयास भी कुछ पक्षी प्रेमी करने में जुटे हैं।

    मल्हाराश्रम क्षेत्र के रहवासियों ने पक्षियों को पानी उपलब्ध कराने के लिए जगह-जगह पानी के सकोरे रखे हैं। उन्हें प्राकृतिक माहौल देने के लिए कई जगह गड्ढे खोदकर पानी भरा गया है। उसमें ज्वार और गेहूं के दाने भी डाले गए हैं। छोटी सूखी मछलियां भी रखी गई हैं।

    रहवासी ओमप्रकाश सोनी और विजय खोड़े ने बताया कि स्थानीय लोगों के साथ इस पहल में मॉर्निंग वॉक करने वालों की भी अहम भूमिका है। पक्षियों को बचाने के लिए संसाधन जुटाने में व बारी-बारी से काम कर रहे हैं। वेटरनरी कॉलेज महू के डॉ. यूके गर्ग के अनुसार, इंदौर का तापमान 44 डिग्री तक पहुंच चुका है।

    ऐसे में दाना-पानी उपलब्ध नहीं होने से खासी दिक्कत का सामना करना पड़ता है। पक्षी हीट स्ट्रोक का आसानी से शिकार हो जाते हैं, जिसे हम आम भाषा में लू लगना कहते हैं।

    छतों पर ग्लूकोज मिला पानी रखें

    - छतों पर सकोरों में पानी रखें। उसमें कुछ मात्रा में ग्लूकोज भी डालें, ताकि डीहाइड्रेशन के शिकार पक्षी जल्दी रिकवर कर सकें।

    - उनके खाने का इंतजाम भी किया जाए। पानी के साथ उनके लिए ज्वार, बाजरे के दाने भी रखें।

    - लू के कारण पक्षियों की मौत के पीछे एक बड़ा कारण पेड़ों की कमी भी है। इसके लिए आवश्यकता है कि अधिक से अधिक प्लांटेशन किया जाए।

    (जैसा कमला नेहरू प्राणी संग्रहालय के प्रभारी डॉ. उत्तम यादव ने बताया)

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