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    गौरैया की चहचहाहट घरों में वापस लाने की पहल इस बार भी

    Published: Sat, 18 Mar 2017 11:37 AM (IST) | Updated: Mon, 20 Mar 2017 08:26 AM (IST)
    By: Editorial Team
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    इंदौर। कभी गौरैया के चहचहाने से ही नींद खुलती थी लेकिन अब मनुष्य की काफी नजदीकी गौरैया कांक्रीट के जंगलों में कहीं गुम सी हो गई है। मौसम में बदलाव, छतों पर मोबाइल टॉवर, सघन विद्युतीकरण के चलते घरों से दूर होती जा रही गौरैया को फिर से बुलाने की आवश्यकता लगातार महसूस की जा रही है। गौरैया को बचाने और मानव जीवन में उसके महत्व का प्रचार करने के लिए 20 मार्च को विश्व गौरैया दिवस भी मनाया जाता है।

    प्यारी गौरैया की मीठी चहचहाहट को फिर से अपने आंगन में सुनने के लिए नईदुनिया की विशेष पहल 'लौट आओ गौरैया' लगातार दूसरे साल भी जारी रहेगी। इसके तहत जागरूकता के लिए स्कूलों और आवासीय कॉलोनियों में विशेष अभियान भी चलाया जाएगा ताकि सभी गौरैया के महत्व से परिचित हो सकें।

    गौरैया से संबंधित ताजा शोध और विशेषज्ञों द्वारा जुटाए गए तथ्यों की जानकारी भी दी जाएगी। गौरतलब है कि पिछले साल भी नईदुनिया द्वारा की गई इस पहल को लोगों का अच्छा समर्थन मिला था। गौरैया से जुड़ी यादों को ताजा करने के लिए पाठक इससे संबंधित फोटो, किस्से, पेंटिंग/स्कैच, कविता या कहानियां भी भेज सकते हैं।

    विशिष्ट संपादक मंडल द्वारा इन प्रविष्टियों और रचनाओं को चयनित किया जाएगा और श्रेष्ठ रचनाओं का प्रकाशन भी नईदुनिया में किया जाएगा। पाठक अपनी प्रविष्टियां ई-मेल savesparrow@naidunia.com पर भेज सकते हैं।

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