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    दो साल की उम्र में हाव-भाव बदला, दो माह पहले जेंडर

    Published: Mon, 15 Dec 2014 03:01 AM (IST) | Updated: Mon, 15 Dec 2014 08:24 AM (IST)
    By: Editorial Team
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    इंदौर। 12वीं में पढ़ने वाली सिमरन दो साल की उम्र से ही लड़का बनने के लिए बेताब थी। हाव-भाव और व्यवहार बपचन से ही बदल लिया था, जेंडर दो माह पहले बदला। शुभ मुहूर्त में रविवार को जब नामकरण संस्कार किया गया तो समर की खुशी का ठिकाना नहीं था। अन्नपूर्णा से जब बरात की शक्ल में यात्रा निकली तो वह झूम रहा था, नाच रहा था। उसके साथ माता-पिता और बहनें भी खुशी मना रही थी।

    लंदन से एमबीए कर रही एक बहन

    तीन बहनों में सिमरन मझली है। बड़ी बहन कीर्ति बाला लंदन में एमबीए कर रही है और छोटी बहन अंजलि एमरल्ड स्कूल से 9वीं पढ़ रही है।

    भव्य यात्रा, भोज और नामकरण

    रविवार दोपहर अन्नापूर्णा मंदिर से घोड़े पर बैठाकर समर को भव्य यात्रा के साथ घर लाया गया। बैंडबाजे और पटाखों की गूंज के बीच रिश्तेदारों के साथ मां और बहनों ने जमकर डांस किया। घर में आयाजित उत्सव के बाद सिमरन को समर नाम दिया गया।

    उसकी शादी भी करेंगे

    सिमरन का बर्ताव बचपन से लड़कों जैसा रहा है। उसे घर में सभी बाबू या भय्यू कहकर ही बुलाते थे। जब वह एमराल्ड स्कूल में पढ़ती थी तो पैंट पहनती थी और स्कूल पहुंचने के पहले कार में स्कर्ट बदल लेती थी। लौटती तो कार में ही ड्रेस चेंज कर लेती थी। वह बास्केटबॉल की नेशनल चैंपियन भी रह चुकी है। उसके बेटा बनने से पूरा परिवार खुश है। हम उसकी शादी भी करेंगे। -अनीता मुजाल्दे, मां

    सिमरन को बनाना ही था बेटा

    सिमरन दो साल की उम्र से ही बेटा बनना चाहती थी। पांच साल में हमने उसे एमरल्ड स्कूल में डाल दिया, सोचा वह लड़कियों की तरह सोचने लगेगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। फिर हम भी उसे बेटा मानने लगे। यह कठिन निर्णय था, लेकिन बेटी की खुशी के लिए हमने ऐसा किया। भले 30 लाख खर्च हुए, लेकिन सिमरन को हर हाल में बेटा बनाना था। -सरदारसिंह मुजाल्दे, पिता

    केवल पिता नहीं बन सकता

    किसी भी लड़के को लड़की या लड़की को लड़का नहीं बनाया जा सकता। कुछ लोग ऐसे होते हैं जो बचपन से ही अपने को जेंडर से भिन्ना मानते हैं। उनकी काउंसलिंग होती है और फिर पूरे टेस्ट के बाद सर्जरी की प्रक्रिया शुरू होती है। केस बिगड़ने में स्थिति खराब हो सकती है। सिमरन के फीमेल पार्ट्‌स बदले गए और वह अब सामान्य है। उसे अब किसी इलाज की जरूरत नहीं है। वह पुरुषों वाली सारी सामान्य प्रक्रिया तो करेगा, लेकिन पिता नहीं बन पाएगा। इसके लिए मेडिकल की दूसरी प्रोसेस अपनाना पड़ेगी।

    -डॉ. समीर कुमठा, कास्मेटिक एंड प्लास्टिक सर्जन, मुंबई

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