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    'इमारतें तो बहुत बनेंगी मगर वो 'ताजमहल' की बराबरी तो नहीं कर सकेंगी'

    Published: Fri, 13 Oct 2017 12:30 PM (IST) | Updated: Fri, 13 Oct 2017 12:32 PM (IST)
    By: Editorial Team
    singer yogesh mp 20171013 123228 13 10 2017

    इंदौर, नईदुनिया रिपोर्टर। 'कहीं दूर जब दिन ढल जाए, न जाने क्यूं होता है ये जिंदगी के साथ, कई बार यूं भी देखा है और जिंदगी कैसी है पहेली हाए' जैसे सैकड़ों अमर गीत रचने वाले ख्यात गीतकार योगेश को आज खंडवा में 'राष्ट्रीय किशोर कुमार सम्मान' से सम्मानित किया जाएगा।

    इस मौके पर नईदुनिया से उन्होंने बड़ी साफगोई से बेबाक गुफ्तगू की। उन्होंने स्वीकारा कि नए दौर में भी नए गीत रचे जाते रहेंगे लेकिन सुनहरे दौर जैसा संगीत दोबारा बन पाना तकरीबन असंभव है। ठीक उसी तरह जैसे इमारतें तो आगे भी बनती रहेंगी। अब तो 25-30 मंजिला भव्य इमारतें बन रही हैं लेकिन वो कितनी भी ऊंची और आलीशन हों ताजमहल की बराबरी तो नहीं कर सकेंगी।

    किशोरदा के बारे में लोग अक्सर ये कहते हैं कि वो पैसों को लेकर कोई समझौता नहीं करते थे। मगर मुझे याद है कि 'मिली" के गीत 'बड़ी सूनी-सूनी है जिंदगी ये जिंदगी' के दौरान जब मैंने उनसे रिक्वेस्ट की कि दादा गाना अच्छा है, मुझे आपसे ही गवाना है, थोड़े पैसे कम कर दो तो वो तुरंत तैयार हो गए।

    ऐसा मेरे साथ कई बार हुआ। इसलिए मुझे समझ नहीं आता है कि किशोरदा को लोग लालची साबित करने पर क्यों तुले हुए हैं। संगीतकार सलिल चौधरी के साथ एक से बढ़कर एक खूबसूरत गीत रचने वाले योगेश कहते हैं कि उनके संगीत में नए और पुराने जमाने का अद्भुत तालमेल था। इसलिए वो गीत आज के दौर के श्रोताओं की पसंद की कसौटी पर भी खरे उतरते हैं।

    तनहाई में क्या गुनगुनाएं?

    पहले के जमाने के गाने हमारी तनहाइयों को सहारा हुआ करते थे। जिन्हें हम एकांत में गुनगुनाकर अपना गम हल्का कम कर लेते थे। मुकेशजी को मैं गीतों का राजकुमार इसीलिए कहता हूं क्योंकि उनके गानों ने उस जमाने में न जाने युवाओं के जख्मी दिलों पर मरहम लगाया है। क्या कमाल था कि लोग उनके दर्द भरे गाने सुनकर अपना दर्द भूल जाते थे।

    मगर अब ऐसे गाने बनना ही बंद हो गए हैं। कम से कम मेरे सुनने में तो पिछले कुछ सालों में ऐसा गाना नहीं आया जिसे तनहाई में गुनगुनाकर मैं सुकून का एहसास कर सकूं। हालांकि नए गीतकार मुझे 'आउटडेटेड' कहकर मेरी बात तो नहीं मानेंगे फिर भी बड़े होने के नाते मेरी ये सलाह तो है कि कुछ ऐसा लिखें जो आत्मा को आनंदित करे, रूह को छुए। तभी उनकी लेखनी को सफल कहा जा सकता है।

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