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    मनचले बुजुर्ग को समाज की पंचायत ने किया जिलाबदर

    Published: Sat, 02 Sep 2017 09:24 AM (IST) | Updated: Sat, 02 Sep 2017 09:26 AM (IST)
    By: Editorial Team
    misbehave with girls 02 09 2017

    इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। एक बूढ़े मनचले से परेशान कॉलोनी के लोगों ने उसे सजा दिलाने के लिए कोर्ट-कचहरी छोड़ समाज की पंचायत का दरवाजा खटखटाया। पंचायत में इशाक व मौलवी बैठे। एक ओर पीड़ित लड़की और उसके परिजन तो दूसरी ओर आरोपी व उसका परिवार था।

    पंचों ने आरोपी को जिलाबदर की सजा सुनाई। उसे देवास जिले के बागली गांव में रहने के आदेश दिए गए। आरोपी और उसके परिवार ने आदेश को मानते हुए एक पत्र में लिखा कि वह दोबारा किसी मासूम को हैवानियत का शिकार नहीं बनाएगा।

    मामला इंदौर शहर के नूरानी नगर का है। यहां रहने वाले 60 वर्षीय बुरहानुद्दीन अकबर अली के खिलाफ 26 अगस्त को रहवासियों ने थाने पर हंगामा किया। बुरहानुद्दीन पर संगीन आरोप लगाया कि उसने घर के बाहर खेल रही दस साल की बच्ची के साथ अश्लील हरकत की। पहले भी वह तीन-चार मासूम बच्चियों के साथ ऐसी ही हरकत कर चुका है।

    लड़की के परिजन ने बदनामी के डर से थाने पर शिकायत नहीं की। इस कारण आरोपी के खिलाफ ना तो केस दर्ज हो पाया और ना ही वह गिरफ्तार हुआ। यह देख रहवासियों ने फैसला किया कि आरोपी को समाज में नहीं रहने दिया जाए। समाज की जमात में यह मुद्दा गर्माया। शनिवार को पंचायत बैठी।

    आमिल अब्दुल हुसैन, आमिल इशाक हुसैन मौलवी, अली असगर टेलर पंच के रूप में मौजूद थे। उन्होंने दोनों पक्षों को सुनने के बाद आरोपी को जिले से बाहर बागली भेजने का दंड तय किया। आरोपी और उसके बेटे शब्बीर से सजा का एक स्वीकारोक्ति पत्र भी लिखवाया, जिसमें कहा गया कि- मैं दंड को मानता हूं, मैंने जो हरकत की अब भविष्य में नहीं करूंगा।

    पंचों ने सजा सुनाते हुए कहा कि आरोपी नूरानी नगर का घर छोड़कर पुश्तैनी गांव बागली में रहेगा। वहीं काम-धंधा कर अपना जीवनयापन करेगा। भविष्य में वह इस तरह की हरकत नहीं करेगा। सजा पर आरोपी के बेटे शब्बीर ने कहा कि हमारा मामला पंचायत में खत्म हो चुका है। पिता को बाहर भेजने का आदेश था जो हमने माना है। वह आदेश के बाद से ही बागली (पुश्तैनी गांव) चले गए। यह हमने लिखित में भी दिया है।

    आरोपी बुरहानुद्दीन ने बच्ची के साथ हरकत की थी। उसको लेकर शनिवार को बैठक थी, जिसमें लोगों ने मांग रखी थी कि उसे बाहर कर दिया जाए। उसे देखते हुए बागली में रहने का फैसला सुनाया। - शबदर हुसैन बेटमावाला, जमात के सेक्रेटरी

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