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    'आरोग्य' की सुस्त चाल से मरीजों की फजीहत

    Published: Sat, 22 Apr 2017 03:58 AM (IST) | Updated: Sat, 22 Apr 2017 03:58 AM (IST)
    By: Editorial Team

    आम लोगों को राहत दिलवाने के लिए प्रशासन ने सस्ती दवाओं की दुकान (आरोग्य मेडिकल) शुरू किए थे लेकिन दो साल बीतने पर भी मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। 25 मेडिकल स्टोर शुरू करने की योजना के साथ 2 अप्रैल 2015 को पहला स्टोर शुरू किया गया था लेकिन सिर्फ 13 ही शुरू हो सके हैं। इनमें भी सारी दवाएं नहीं मिलती हैं। आईनेक्स्ट की रिपोर्ट--

    -- दवाइयां मुहैया नहीं करवा पा रही एजेंसी और रेडक्रॉस सोसायटी

    -- समस्याओं के पीछे प्रशासन और इंदौर के दवा विक्रेताओं से सहयोग नहीं मिलने का दिया जा रहा हवाला

    -- केमिस्ट एसोसिएशन का कहना- जरूरत से ज्यादा छूट मांगकर दवाई लेना चाह रही एजेंसी, हमारी ओर से कोई असहयोग नहीं

    -- दूर से आने वाले मरीज हो रहे परेशान

    आईनेक्स्ट रिपोर्टर, इंदौर

    99266 21179

    सरकारी महकमा आम लोगों को राहत देने के लिए योजना तो बनाता है लेकिन उसे किस तरह से पूरा किया जाता है इसका अंदाजा रेडक्रॉस सोसायटी द्वारा शुरू करवाए गए आरोग्य मेडिकल स्टोर को देखकर लगाई जा सकती है। लगातार महंगी होती दवाइयां मरीजों के इलाज से भी ज्यादा खर्चीली साबित होती हैं। इस बात को ध्यान में रखकर प्रशासन ने शहर में सस्ती दवाइयों की दुकान खोलने की योजना बनाई थी। तय किया गया कि जिले में 25 जगह आरोग्य मेडिकल स्टोर शुरू होंगे और 2 अप्रैल को पहला मेडिकल शुरू किया गया। दो साल बाद भी सिर्फ 13 स्टोर ही खुल सके हैं। अधूरी सुविधाओं के चलते लोगों को परेशान होना पड़ता है।

    सस्ती दवा के लिए मरीज कई किलोमीटर दूर से इन स्टोर्स पर आते हैं लेकिन यहां आकर भी उन्हें निराश होना पड़ रहा है। कारण यह कि उन्हें पर्ची पर लिखी दवाइयां नहीं मिल रही हैं। कई बार ऐसा होता है कि एक ही पर्चे की दवाई के लिए मरीजों को तीन से चार बार आना पड़ रहा है। कई बार दिल संबंधी बीमारी की दवाइयां नहीं मिलती तो कई बार ब्लडप्रेशर और डायबिटीज जैसी सामान्य बीमारियों की दवा के लिए भी निराश होना पड़ता है। उपलब्ध नहीं होने पर दवाइयां लिख ली जाती हैं और अगले दिन या दो दिन बाद आने को कहा जाता है। मरीज तो आ जाता है लेकिन दवा तभी भी उबलब्ध नहीं होती। इस तरह मरीज बार-बार चक्कर खाने के कारण परेशान होते हैं।

    आधी जगहों पर आज भी इंतजार

    प्रशासन द्वारा पहला स्टोर ढक्कनवाला कुआं क्षेत्र में गोकुलदास अस्पताल के सामने शुरू किया गया था। इसके बाद गीता भवन, जंजीरावाला चौराहा, बापट चौराहा, विजय नगर, एलआईजी, बॉम्बे हॉस्पिटल चौराहा, कनाड़िया रोड, एयरपोर्ट रोड, रणजीत हनुमान क्षेत्र, मालगंज, महू, पलसीकर कॉलोनी, सपना संगीता रोड पर स्टोर खुले। भंवरकुआं, बाणगंगा, जावरा कम्पाउंड, जवाहर मार्ग, दशहरा मैदान, मालवा मिल, बंगाली चौराहा, राजेंद्र नगर, राजमोहल्ला, गांधीनगर, देपालपुर, राऊ आदि जगहों पर मेडिकल शुरू किए जाने थे जो आज तक नहीं हो सके।

    जगह नहीं मिलने का हवाला

    आरोग्य मेडिकल शुरू करने का काम जिस एजेंसी को दिया गया है उसके प्रतिनिधि का कहना है कि स्टोर के लिए जगह नहीं मिल पा रही है इसलिए देरी हो रही है। प्रशासन द्वारा जिन नियम शर्तों के आधार पर हमें काम दिया गया था, उसमें यह तय था कि जगह प्रशासन द्वारा दी जाएगी और सेवाएं हमें देना है। प्रशासन ने सिर्फ एक ही जगह मेडिकल चलाने के लिए जगह दी थी। इसके बाद 12 क्षेत्रों में हमें ही मशक्कत करना पड़ी और बड़ी मुश्किल से जगह तलाश कर मेडिकल शुरू किया गया। इस सिलसिले में एजेंसी की ओर से दो बार कलेक्टर ऑफिस में पत्राचार भी किया गया था ताकि जल्द से जल्द मेडिकल स्टोर शुरू किया जा सके लेकिन कोई प्रतिसाद नहीं मिला।

    दवाइयों को लेकर भी तनातनी

    दवाओं की कमी को लेकर जिम्मेदार एजेंसी का कहना है कि स्थानीय दवा बाजार से सहयोग नहीं मिल रहा है। सस्ती दवा दुकानों के कारण उनका व्यवसाय प्रभावित हो रहा है और मुनाफा कम हो चुका है इसलिए हमें दवाइयां नहीं बेची जा रही हैं। इसके लिए तीन बार शिकायत करने का हवाला भी दिया जा रहा है। जवाब में इंदौर केमिस्ट एसोसिएशन का कहना है कि एजेंसी झूठ बोल रही है। जरूरत से ज्यादा छूट की मांग की जा रही है जिसे लेकर होलसेलर्स सहमत नहीं हैं। कोई भी नुकसान झेलकर व्यापार नहीं करेगा। होलसेलर्स द्वारा कभी दवाओं के लिए इनकार नहीं किया गया। अगर ऐसा है तो वो प्रशासन से या एसोसिएशन से शिकायत कर सकता है।

    नहीं मिल रही छूट और दवाई

    सस्ती दवा दुकानों की सेवाएं भी कुछ मामलों में सवालों के घेरे में हैं। दवाइयों के ऑर्डर तो लिए जा रहे हैं लेकिन दवाई नहीं पहुंच रही है। एजेंसी की ओर से फोन पर ऑॅर्डर भी लिए जा रहे हैं। वाट्सएप पर ऑर्डर लेकर मुफ्त होम डिलीवरी देने का दावा भी किया गया था। स्टोर संचालक द्वारा खुद भी ग्राहकों को फोन लगाकर जरूरत की दवाई पूछी जाती है। यहां आने वाले उपभोक्ताओं के नंबर अनिवार्य रूप से लिए जाते हैं। ताकि उनसे ऑर्डर लिए जा सके लेकिन दवाइयां नहीं पहुंच पा रही हैं। इन मेडिकल स्टोर पर 20 से 75 प्रतिशत डिस्काउंट का प्रचार किया जा रहा है लेकिन ओटीसी (ओवर दि काउंटर) प्रोडक्ट्स पर पांच प्रतिशत छूट ही दी जा रही है। इस तरह के कई मामले प्रशासन तक पहुंचे लेकिन उदासीन रवैये के कारण सेवाओं में सुधार नहीं हो रहा है।

    प्रशासन ने सिर्फ एक जगह दी। बाकी क्षेत्रों में मेडिकल का स्थान हमें ही तलाशना पड़ा। स्थानीय मेडिकल होलसेलर्स से सहयोग नहीं मिलने के कारण दवाइयों की उपलब्धता मुश्किल हो रही है। दिल्ली, मुंबई, रीवा, भोपाल, ग्वालियर से दवाइयां मंगवा रहे हैं। कई बार प्रशासन को पत्र लिखे लेकिन निराकरण नहीं किया जा रहा।

    -- रूपेंद्रसिंह चौहान

    डायरेक्टर, आरोग्य मेडिकल स्टोर

    दो वर्शन शेषष

    फोटोः दिनेश जी ऑनलाइन करेंगे।

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