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    लाखों रुपए खर्च कर लगाए पौधे, सहेजने की चिंता नहीं

    Published: Sat, 22 Apr 2017 03:58 AM (IST) | Updated: Sat, 22 Apr 2017 03:58 AM (IST)
    By: Editorial Team

    नगर निगम इस बारिश में शहर और बाहरी क्षेत्रों में हजारों पौधे लगाने की योजना बना रहा है। शहर में ऐसे कई स्थान हैं, जहां तीन-तीन बार पौधे लगाए गए, लेकिन इन्हें सहेजा नहीं जा सका। लाखों के पौधे कहीं ट्री गार्ड या रेलिंग नहीं होने से नष्ट हो गए तो कहीं खुद व्यापारियों और रहवासियों के शिकार हो गए। आईनेक्स्ट की रिपोर्ट-

    -मालवा मिल, पाटनीपुरा, रिंग रोड सहित कई जगहों पर पौधारोपण के बावजूद नहीं हुई हरियाली

    -एक ही जगह तीन-तीन बार पौधारोपण, फिर भी सूखा

    -इस बार समस्या वाले स्थानों पर काम करने से बच रहा नगर निगम

    आईनेक्स्ट रिपोर्टर, इंदौर

    99266 21179

    कुछ ही दिनों में कई सरकारी विभाग पौधारोपण की तैयारी करेंगे। कोई पौधे बांटेगा तो कोई लगाएगा। नगर निगम भी हमेशा हजारों पौधे लगाता है, लेकिन इन्हें सहेजने में नाकाम है। शहर में कई जगह निगम तीन-तीन बार पौधे लगा चुका है, लेकिन कहीं पौधे के बजाय ठूंठ बचे हैं तो कहीं ठूंठ भी गायब हैं।

    चार साल में नहीं लगा सके रेलिंग

    निगम अधिकारी मान रहे हैं कि शहर के कई क्षेत्रों में हरियाली नहीं बचाई जा सकी। इनमें डिवाइडर वाले वे स्थान ज्यादा हैं, जहां रेलिंग नहीं है। इस कारण आवारा पशु या तो इन्हें खा जाते हैं या रौंद देते हैं। रेलिंग को लेकर कई बार क्षेत्रीय रहवासी और वाहन चालक मांग कर चुके हैं, लेकिन अधिकारियों की लापरवाही के कारण काम नहीं हुआ।

    डिवाइडर भी टूटे-फूटे

    शहर के कुछ क्षेत्र ऐसे भी हैं जहां डिवाइडर में कई पौधे लगाए गए लेकिन रहवासियों और व्यापारियों की लापरवाही से वे पेड़ नहीं बन सके। मालवा मिल मेन रोड, राजकुमार मिल सब्जी मंडी, पाटनीपुरा मेन रोड सहित कई सड़कों पर तीन से चार बार पौधारोपण हुआ फिर भी यहां सूखा पड़ा है। रेलिंग तो दूर, यहां लोगों ने डिवाइडर ही तोड़ दिए। कई जगहों पर रास्ते बनाने के लिए डिवाइडर और हरियाली दोनों ही खत्म कर दिए। मालवा मिल चौराहे से भंडारी ब्रिज और परदेशीपुरा थाने तक जाने वाले रोड पर कई जगहों से डिवाइडर टूटे हैं।

    ग्रीन बेल्ट ही सूखा

    पौधे लगाने के बावजूद हरियाली नहीं होने की समस्या ग्रीन बेल्ट की जगह पर भी है। सबसे ज्यादा खराब हाल पूर्वी रिंग रोड के हैं। देवास नाका चौराहे से खजराना चौराहे तक ग्रीन बेल्ट पर जरूर हरियाली है, लेकिन इसके बाद दोनों ओर पर्याप्त हरियाली नहीं है। यहां सेंट्रल डिवाइडर में भी यही स्थिति है। कई जगह गंदगी और कचरा फैल रहा है। ग्रीन बेल्ट की हालत देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि निगमकर्मियों का ध्यान पौधारोपण में तो है, लेकिन पौधों को सहेजने को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है।

    समाधान करने के बजाय खींच रहे हाथ

    हरियाली नहीं बचा पाने के पीछे उद्यान विभाग के अधिकारियों का कहना है इस बार उन जगहों पर पौधारोपण करने से बचा जाएगा, जहां हरियाली को बचाना मुश्किल है। उदाहरण के तौर पर जहां रेलिंग नहीं है या फिर डिवाइडर टूटे हैं। टैंकरों से पानी देने संबंधी समस्या होने पर भी पौधारोपण नहीं करने की बात कही जा रही है। अधिकारी चाहें तो सालों पहले बनी सड़क पर रेलिंग लगाने का प्रस्ताव कुछ ही दिनों में बनाकर पास करवा सकते हैं और थोड़े ही समय में काम पूरा भी करवा सकते हैं, लेकिन ऐसा नहीं किया जा रहा।

    जहां समस्या है, वहां कम लगाएंगे पौधे

    यह सही है कि कई जगहों पर रेलिंग, डिवाइडर नहीं होने से हरियाली सहेजने में समस्या आ रही है, लेकिन इस बार वहीं पौधे लगाएंगे, जहां बचाए जा सके। जहां किसी भी तरह की समस्या है, वहां नाममात्र के पौधे ही लगाए जाएंगे।

    -कैलाश जोशी

    उपायुक्त (उद्यान), नगर निगम

    फोटोः ऑनलाइन है।

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