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    विमान से सूअर टकराने पर इंश्योरेंस कंपनी ने एयरपोर्ट से मांगा 167 करोड़ का हर्जाना

    Published: Fri, 17 Feb 2017 04:11 PM (IST) | Updated: Fri, 17 Feb 2017 04:15 PM (IST)
    By: Editorial Team
    spice jet plane jabalpur 2017217 161541 17 02 2017

    जबलपुर। डुमना में 4 दिसंबर 2015 की शाम स्पाइस जेट एयरलाइंस के विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने के मामले में कनाडा की इंश्योरेंस कंपनी ने एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एएआई) से 167 करोड़ का मुआवजा मांगा है। कंपनी की जांच में सामने आया है कि एयरपोर्ट प्रबंधन की लापरवाही से जंगली सूअरों का झुंड रन-वे पर आ गया था जिससे यह दुर्घटना हुई। इसमें 53 यात्रियों की जान भी सांसत में फंस गई थी। हालांकि, एएआई, डीजीसीए और विमानन कंपनी की टीमों ने इस घटना की जांच की थी, लेकिन कारणों का अब तक खुलासा नहीं किया है।

    बावजूद इसके कनाडा की इंश्योरेंस कंपनी ने स्पाइस जेट एयरलाइंस के माध्यम से स्थानीय एएआई को घटना का जवाबदार ठहराकर 1 अरब 67 करोड़ 51 लाख 25 हजार रुपए के मुआवजे का पत्र भिजवा दिया है। इसके बाद स्थानीय एएआई और निजी विमानन कंपनी के बीच विवाद शुरू हो गया है। विमान दुर्घटना के बाद स्पाइस जेट की जबलपुर से सभी शहरों की उड़ानें करीब दो माह तक बंद रहीं।

    कनाडा की इंश्योरेंस कंपनी

    स्पाइस जेट ने कनाडा की निर्माता कंपनी बॉम्बार्डियर एयरोस्पेस से बाम्बार्डियर क्यू-400 विमान की खरीद की थी। एमओयू की शर्तों के अनुसार बॉम्बार्डियर एयरोस्पेस की सब्सिडियरी कंपनी से ही विमान का बीमा कराया था। उक्त कंपनी ने दुर्घटनाग्रस्त विमान का मुआयना करके करीब 25 मिलियन डॉलर (एक अरब 67 करोड़ 51 लाख 25 हजार रुपए) की क्षति का अनुमान जताया है। यहां यह उल्लेखनीय है कि स्पाइस जेट ने उक्त बीमा कंपनी से दुर्घटना और उसके बाद दो महीने तक उड़ान रद्द होने के कारण हुई हानि का मुआवजा वसूल लिया है।

    हालांकि, कंपनी ने अभी तक क्लेम राशि का खुलासा नहीं किया है। अब बीमा कंपनी का मानना है कि एयरपोर्ट प्रबंधन ने उचित व्यवस्था की होती तो रन-वे पर जंगली सूअर नहीं आते और न ही उसे विमान कंपनी को भारी-भरकम मुआवजा देना पड़ता। इसलिए अब उसने एयरपोर्ट प्रबंधन को मुआवजे के लिए पत्र भेजा है।

    कोर्ट में जाएगा मामला

    बीमा कंपनी से मिले पत्र को स्पाइस जेट ने एयरपोर्ट अथारिटी को सौंप दिया है। अब कंपनी लीगल नोटिस भेज सकती है। विमान के संचालन की जवाबदारी डीजीसीए (डायरेक्टर जनरल ऑफ सिविल एविएशन) की होती है। एयरपोर्ट अथारिटी का हस्तक्षेप नहीं होता। इसके अलावा जंगली सूअर का मृत शरीर नहीं मिला तो कैसे कहा जा सकता है कि जंगली सूअर की टक्कर से ही दुर्घटना हुई। डीजीसीए, एएआई की जांच में विमान के किसी जानवर से टकराने की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए हर्जाने का सवाल ही नहीं उठता।

    स्पाइस जेट का क्षतिग्रस्त विमान यहां एक साल से रखा है। निजी कंपनी के इंजीनियर इस विमान के इंजिन, पंखे, कुर्सियां, टायर आदि कीमती सामान खोलकर ले गए हैं। क्षतिग्रस्त विमान के किराए का 15 लाख रुपए नोटिस स्पाइस जेट को दे दिया है। इंश्योरेंस कंपनी ने 25 मिलियन डॉलर का मुआवजा मांगा है जो कि किसी भी रूप में तर्कसंगत नहीं है। - रामतनु साहा, डायरेक्टर, डुमना एयरपोर्ट जबलपुर

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