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    पिता का साया उठने के बाद मां ने दिव्यांग दादी के भरोसे छोडे़ बच्चे

    Published: Sun, 20 Mar 2016 07:30 AM (IST) | Updated: Sun, 20 Mar 2016 02:13 PM (IST)
    By: Editorial Team
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    सिहोरा। एक मां अपने बच्चों से पिता का साया छिनने के बाद दोनों आंखों से दिव्यांग दादी के पास छोड़कर भाग गई। 60 साल की ममता की 'ममता' उसके दिव्यांग होने के कारण बौनी साबित हो रही है। वह चाहकर भी अपनी नादान पोतियों को हर वो सुख नहीं दे पा रही है जो उन्हें बचपन में मिलना चाहिए। लाचार दादी अपनी चारों नातिनों को अच्छी शिक्षा देना चाहती है, लेकिन गरीबी और लाचारी उसके आड़े जा रही है और शासन से भी उसे कोई मदद नहीं मिल रही है।

    मामला है सिहोरा से 8 किमी दूर मझौली तहसील के दिनारी खम्हरिया गांव का। यहां की दिव्यांग ममता बाई पर चार नातिनों के लालन-पालन की जिम्मेदारी है। लेकिन उसके पास आय को कोई जरिया नहीं है। करीब छह साल से उसे पेंशन भी नहीं मिल रही है। हालांकि गांव के सरपंच इसकी कुछ मदद करते हैं, लेकिन वह नाकाफी है।

    ममता बाई के पति हल्केराम झारिया की मौत करीब 18 साल पहले हो गई थी। तब से उसका बेटा ही उसका सहारा था और ससुराल सोमाखुर्द गांव से अपने मायृके दिनारी खम्हरिया में आकर रहने लगी थी, लेकिन पांच साल पहले बेटे भागचंद की मौत बीमारी के चलते होने ृके बाद वह टूट सी गई। बेटे की मौत को अभी 6 माह भी नहीं बीते थे, कि उसकी बहू चार नातिनों को ममता के पास छोड़कर भाग गई। इसके बाद तो मानों ममता टूट सी गई। लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी। दिव्यांग ममता अपनी नातिनों को पढ़ाना लिखाना चाहती है, लेकिन शारीरिक लाचारी के आगे वह बेबस है।

    स्कूल ड्रेस में ही गुजारा

    ममता बाई की चार नातिन हैं, जिसमें से सरिता (12) कक्षा 6, सविता (10) कक्षा 4, सीता (8) कक्षा 3 व अंशिका कक्षा दूसरी में पढ़ती है। सरिता ने चर्चा ृके दौरान बताया कि स्कूल से ड्रेस के लिए रुपये मिलते हैं। उसी ड्रेस से साल भर के लिए कपड़ों का इंतजाम हो जाता है।

    नहीं मिलती वृद्घावस्था पेंशन

    करीब दस पहले ममता बाई अपने ससुराल के गांव से मायके आ गई थी। इसके बाद से दिव्यांग ममता बाई को न तो पेंशन मिल रही है और न ही गरीबी रेखा का कार्ड बना है। जिससे ममता बाई को आजीविका का संकट हैं। ममता ने बताया कि उसके पास आय का कोई जरिया न होने के बाद भी शासन से अब तक कोई मदद नहीं मिली। इसके पहले ृके सरपंच और सचिव ने भी उसकी ओर कोई ध्यान नहीं दिया। जिससेवह काफी परेशान है।

    मोहल्ले वालों के सहारे पूरा परिवार

    वैसे तो ममता किसी के दर पर भीख नहीं मांगती, लेकिन उसकी लाचारी देखकर आस पड़ोस और मोहल्ला के लोग उसकी मदद कर देते हैं। पुराने कपड़े और घरों से मिलने वाले भोजन से ही उसकी जीविका चल रही है।

    दिव्यांग महिला की जानकारी मुझे आपसे मिली है, यदि ऐसा है तो उसकी जानकारी जुटाकर दिव्यांग होने पर 500 रुपये और वृद्घा पेंशन 200 रुपये दिलाए जाएंगे। बच्चों को भी हर संभव मदद दी जाएगी। पी एल यादव, सीईओ जनपद पंचायत मझौली

    दिव्यांग महिला के बारे में ग्राम पंचायत से जानकरी मंगवाई जायेगी जिसके बाद हरसंभव मदद की जायेगी। फ्रैंक नोवल ए, एसडीएम सिहोरा

    महिला का नाम वृद्घा पेंशन व विकलांग पेंशन की सूची में भेजा गया है। बैंक में खाता खुलवाया गया है, जिससे उसके खाते में राशि भेजी जा सके। वर्तमान में उसकी कुछ मदद अपने स्तर से कर रहीं हूं। -नेहा आशीष शुक्ला, सरपंच दिनारी खम्हरिया

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