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    पहले आधार कार्ड दिखाओ, फिर बच्चे को स्कूल से ले जाओ

    Published: Sat, 16 Sep 2017 01:34 AM (IST) | Updated: Sat, 16 Sep 2017 02:17 PM (IST)
    By: Editorial Team
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    जबलपुर। गुरुग्राम (हरियाणा) के रेयान इंटरनेशनल स्कूल में सात साल के बच्चे प्रद्युम्न की हत्या के बाद मप्र के निजी स्कूलों ने भी बच्चों की सुरक्षा को लेकर सख्ती बरतनी शुरू कर दी है। घटना से सबक लेते हुए आयुक्त लोकशिक्षण संचालनालय ने मान्यता नियम 2017 का हवाला देते हुए निजी स्कूलों के शैक्षणिक व गैर शैक्षणिक स्टॉफ से शपथ-पत्र लेना अनिवार्य कर दिया है।

    वहीं, घमापुर स्थित भारत सेवक समाज स्कूल ने तो एक कदम आगे बढ़कर स्कूल में 'आधार कार्ड' लाना ही अनिवार्य कर दिया है। स्कूल प्रबंधन ने नोटिस चस्पा कर साफ कर दिया है कि बिना आधार कार्ड दिखाएं बच्चा घर ले जाने नहीं दिया जाएगा। स्कूल में शुक्रवार से शुरू नई व्यवस्था का अधिकांश अभिभावकों ने जहां समर्थन किया वहीं, कुछ ये कहते भी सुने गए कि बच्चों की सुरक्षा की इतनी चिंता है तो पहले स्कूल में बंद पड़े सीसीटीवी कैमरे सुधरवाएं जाएं।

    दो कर्मचारियों के भरोसे आधार की जांच

    - आधार कार्ड दिखाकर बच्चे को घर ले जाने की नई व्यवस्था शुरू होने के पहले दिन कभी हॉच-पॉच की स्थिति देखने को मिली। मेन गेट पर दो कर्मचारी अभिभावकों से आधार नंबर रजिस्टर में दर्ज करवा कर बच्चों की सुपुर्दगी दे रहे थे।

    - एक महिला कर्मचारी आधार कार्ड चेक कर रही थी। जबकि पीछे से कई अभिभावक बिना आधार दिखाए ही बच्चों को ले जाते दिखे।

    बंद पड़े सीसीटीवी कैमरे

    - भारत सेवक समाज स्कूल में नर्सरी से लेकर 12वीं तक के छात्र-छात्राएं पढ़ती हैं। जिनकी संख्या सैकड़ों में हैं। स्कूल में कहने को तो 10 सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। लेकिन अधिकांश बंद पड़े हैं। अभिभावकों ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए बंद कैमरे भी सुधारे जाने की मांग की है। स्कूल प्रबंधन का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था की खामियों को दूर किया जाएगा। बंद कैमरे भी सुधरवाए जा रहे हैं।

    मान्यता नियमों में जोड़ी बच्चों की सुरक्षा

    आयुक्त लोकशिक्षण नीरज दुबे ने संयुक्त संचालक लोकशिक्षण, डीईओ, डीपीसी को पत्र जारी कर स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता करने के निर्देश दिए हैं। जिसमें निजी स्कूलों की सुरक्षा को मान्यता नियमों में जोड़कर उसका सख्ती से पालन कराने को कहा है। आदेश का पालन न करने पर मान्यता समाप्ति की कार्रवाई की जाएगी।

    स्कूलों को ये करना होगा

    - शैक्षणिक, गैर शैक्षणिक कर्मचारियों से शपथ-पत्र लेना होगा कि उनके विरुद्घ लैंगिंग अपराध, बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 और किशोर न्याय (बालकों का संरक्षण अधिनियम 2000) के तहत कोई मामला तो दर्ज नहीं है।

    - स्कूलों में महिला बस कंडक्टर रखना जरुरी है। यदि महिला कंडक्टर नहीं है तो स्कूल की महिला टीचर या स्टॉफ का कोई व्यक्ति बस से बच्चों को घर तक पहुंचाना होगा।

    - मान्यता के आवेदनों में रजिस्टर्ड बसों की सूची भी अनिवार्य रूप से शामिल की जाए।

    - स्कूलों में सीसीटीवी कैमरे, शिकायत पेटी रखी जाए। बच्चों की काउंसिलिंग के लिए पार्ट टाइम काउंसलर की व्यवस्था की जाए।

    - सीबीएसई, आईसीएसई स्कूलों में गैर शैक्षणिक स्टॉफ ड्राइवर, कंडक्टर, माली, चौकीदार का पुलिस वेरीफिकेशन कराना सुनिश्चित करें।

    - संयुक्त संचालक, डीईओ, डीपीसी स्कूलों का निरीक्षण कर सुरक्षा व्यवस्थाओं का जायजा लें।

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