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    बिना हेलमेट मोपेड पर नहीं चलतीं मां-बेटी, पुलिस ने किया सम्मानित

    Published: Mon, 13 Nov 2017 03:49 AM (IST) | Updated: Mon, 13 Nov 2017 04:36 PM (IST)
    By: Editorial Team
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    जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। एक तरफ जहां शहर के दोपहिया वाहन चालक पुलिस के सख्ती के बावजूद हेलमेट लगाने में आनाकानी कर बचने का तरीका खोजते हैं। वहीं, प्रेम मंदिर के पास रहने वाले जोयल रहीम की पत्नी पारुल और उनकी 6 वर्षीय बेटी सोफिया बिना हेलमेट मोपेड पर नहीं चलते। मां-बेटी बिना हेलमेट न तो स्कूल जातीं हैं और न ही मार्केट।

    सुरक्षा और यातायात नियमों को लेकर मां-बेटी की जागरुकता को देख एसपी शशिकांत शुक्ला भी उनकी तारीफ किए बिना नहीं रह सके। उन्होंने दोनों का सम्मान करने के लिए पुलिस अफसरों को उनके घर भेजा। एएसपी संदीप मिश्रा, डीएसपी यातायात मनोज खत्री और अन्य यातायात के अधिकारी रविवार की शाम पारुल रहीम और उनकी बेटी सोफिया को सम्मानित करने उनके घर पहुंचे। पुलिस अफसरों ने मां-बेटी को बुके और गिफ्ट भेंट कर सम्मान से नवाजा। इस मौके पर अफसरों ने शहर के अन्य वाहन चालकों से इनसे सीख लेने के लिए भी कहा।

    हेड इंजरी देख लिया फैसला

    जोयल रहीम ने बताया कि वे हेड इंजरी के लिए इम्प्लांट्स का काम करते हैं। यह अस्पतालों में हेड इंजरी के वक्त काम आता है। सप्लाई के वक्त जब वह अस्पताल जाते हैं, तो ज्यादातर हादसों में घायल लोगों के सिर में हेड इंजरी की समस्या ही देखने को मिलती है। इनमें बच्चे भी शामिल होते हैं। जिन्हें देखने के बाद मैंने यह निर्णय लिया कि बच्चों को भी सुरक्षित रखने के लिए उन्हें भी हेलमेट पहनाना जरूरी है।

    हालांकि कार जैसी सुरक्षा तो नहीं होती, लेकिन फिर भी अच्छी कंपनी के हेलमेट से बहुत बचाव होता है। इस बारे में जोयल ने पत्नी पारुल से चर्चा की तो वह भी इसके लिए तैयार हो गई। जिसके बाद पारुल जब भी मोपेड पर सोफिया के साथ बाहर जाती हैं खुद हेलमेट पहनने के साथ बेटी को भी हेलमेट जरूर पहनाती हैं।

    सराहनीय काम, दूसरों को भी मिलेगी सीख

    एसपी शशिकांत शुक्ला ने बताया कि यह सराहनीय काम है। जहां राहगीर पुलिस की चेकिंग देखकर हेलमेट नहीं पहने होने के कारण या तो रास्ता बदल लेते हैं या पुलिस को देखकर डिक्की में रखे हेलमेट पहनने लगते हैं। वहीं, ये मां-बेटी सुरक्षा के लिए खुद हेलमेट पहन रही हैं। बेटी 6 साल की है, लेकिन हेलमेट पहनना उसकी आदत में आ गया है। इससे दूसरों को नसीहत मिलती है।

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