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    स्कूल की शिकायत करने पर लगेंगे एक हजार, झूठी निकली तो गए

    Published: Sun, 16 Jul 2017 01:33 AM (IST) | Updated: Mon, 17 Jul 2017 03:56 PM (IST)
    By: Editorial Team
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    जबलपुर। विधानसभा के मानसून सत्र में प्रस्तावित फीस नियंत्रण कानून पेश करने की तैयारी है। यदि कानून पास हो गया तो पैरेन्ट्स चाहकर भी अब निजी स्कूलों की शिकायत नहीं पाएंगे। क्योंकि प्रस्तावित कानून का मसौदा ऐसा है कि निजी स्कूलों के खिलाफ शिकायत करने से पहले पैरेन्ट्स या शिकायतकर्ता को पहले तो अपनी जेब से 1 हजार रुपए भरने होंगे।

    शिकायत का निपटारा कानून के तहत बनाई गई कमेटी 2 महीने के भीतर करेगी। लेकिन जांच के बाद यदि शिकायत झूठी मिली तो शिकायतकर्ता को जमा रकम में से एक रुपए भी वापस नहीं मिलेगा। इसके अलावा फीस नियंत्रण कानून के मसौदे में कई ऐसे प्रावधान किए गए हैं, जिसमें कानूनी रूप से स्कूल हर साल 10 प्रतिशत तक मनमानी फीस बढ़ा सकेंगे। लेकिन पैरेन्ट्स चाहकर भी स्कूलों का कुछ नहीं बिगाड़ पाएंगे। क्योंकि फीस बढ़ाने के अधिकार स्कूलों के पास होंगे, सरकार सिर्फ नजर रखेगी।

    फीस के प्रस्तावित मसौदे में ये है खास

    10 प्रतिशत फीस बढ़ाने की छूट

    - निजी स्कूल अपनी फीस खुद तय करेंगे। हर साल 10 प्रतिशत तक फीस बढ़ा सकेंगे। इससे ज्यादा बढ़ाने के लिए कारण बताने पड़ेंगे। फिर जिला स्तरीय कमेटी की अनुशंसा पर प्रदेश स्तरीय कमेटी की मंजूरी मिलने के बाद फीस में इजाफा कर सकेंगे।

    फायदा- पैरेन्ट्स को फायदा ये होगा कि बिना सरकार की अनुमति के फीस बढ़ाने पर स्कूलों के खिलाफ 3 लाख का जुर्माना व सजा का प्रावधान मसौदे में शमिल किया गया है।

    नुकसान - पैरेन्ट्स स्कूलों के खिलाफ फीस वृद्घि की शिकायत नहीं कर सकेंगे। शिकायत करने पर जेब ढीली होगी।

    एडमिशन के समय ही ले सकेंगे पूरी फीस

    निजी स्कूल अभी एडमिशन फीस 2 हजार से लेकर 10 हजार रुपए तक ले रहे हैं। प्रस्तावित कानून में एडमिशन के दौरान कानूनी रूप से 15 हजार रुपए तक एडमिशन फीस ले सकेंगे।

    फायदा - निजी स्कूल अब तक एडमिशन फीस के अलावा ट्यूशन, कम्प्यूटर, कॉशनमनी, स्पोर्ट्स, वार्षिक उत्सव के नाम पर जो फीस वसूलते थे वे नहीं वसूल पाएंगे।

    नुकसान - पैरेन्ट्स को एडमिशन के समय ही एक मुश्त फीस देनी होगी।

    5 साल तक जो फीस बढ़ाई कम नहीं होगी

    प्रस्तावित नए कानून में पिछले 5 साल में करीब 50 से 60 प्रतिशत तक बढ़ाई गई फीस को कम करने का कोई प्रावधान नहीं किया गया है।

    फायदा- अब फीस वृद्घि में मनमानी नहीं चलेगी। निर्धारित प्रतिशत में फीस बढ़ेगी।

    नुकसान - पिछले 5 साल में स्कूलों ने 20 से 25 प्रतिशत ब़ढ़ी फीस वसूली उसका एडजस्टमेंट नहीं होगा।

    शिक्षा मंत्रालय से जो जानकारी मिली है उसके तहत निजी स्कूलों को हर साल 10 प्रतिशत तक फीस बढ़ाने की छूट दिया जाना प्रस्तावित है। शिकायत करने पर फीस जमा करने का भी प्रावधान किया गया है। पैरेन्ट्स को नए कानून से ज्यादा राहत मिलने वाली नहीं। डॉ.पीजी नाजपांडे, संयोजक,नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच

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