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    गोमूत्र से बीमारियों का इलाज करने वेटनरी यूनिवर्सिटी करेगा रिसर्च

    Published: Mon, 13 Nov 2017 03:49 AM (IST) | Updated: Mon, 13 Nov 2017 04:20 PM (IST)
    By: Editorial Team
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    जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। आयुर्वेद के बाजार में गोमूत्र की बढ़ती मांग को देखकर वेटनरी विश्वविद्यालय भी उतरने जा रहा है। विश्वविद्यालय के अनुसंधानकर्ता गोमूत्र पर रिसर्च कर इंसान की बीमारियों के इलाज के लिए दवा तैयार करेंगे। इतना ही नहीं पर्यावरण के लिए गोबर की उपयोगिता बढ़ाने और दूध की गुणवत्ता सुधारने के लिए भी वह अनुसंधान करने जा रहा है। दरअसल, वेटनरी विवि में चल रहे पंचगव्य प्रोजेक्ट में अब गोमूत्र, गोबर, दूध पर अनुसंधान होगा। इस काम में मध्यप्रदेश का गो संवर्धन बोर्ड और छत्तीसगढ़ वेटनरी विश्वविद्यालय भी मदद करेगा।

    हृदय रोग और शुगर की तैयार होगी दवा

    गोमूत्र से बीमारियों के इलाज के लगातार बेहतर परिणाम सामने आ रहे हैं। इस पर और रिसर्च करने के लिए वेटनरी विवि गाय के गोमूत्र की गुणवत्ता बढ़ाने पर काम करेगा। साथ ही इसकी मदद से हृदय रोग, शुगर और अन्य बड़ी बीमारियों का इलाज तैयार करेगा। विवि का डायरेक्टर रिसर्च विभाग इस पर काम करने जा रहा। उसने अनुसंधान प्रोजेक्ट तैयार किया है, जिसके बार प्रदेश सरकार से तकरीबन 3 करोड़ 77 लाख रुपए की मदद मांगी गई है।

    वेटनरी विवि को इनसे मिलेगी रिसर्च में मदद

    रिसर्च टीम- वेटनरी विवि के पास वेटनरी डॉक्टर की प्रदेश स्तर की टीम है, जो पशुओं की बीमारी से लेकर उसके इलाज पर देश स्तर पर काम किया है। अब यह डॉक्टर गाय के गोमूत्र की उपयोगिता बढ़ाएंगे।

    विद्यार्थी - विवि में पढ़ने वाले पीजी और पीएचडी के छात्रों ने अपनी थीसिस में इन पर काम किया है, जिसके रिजल्ट भी बेहतर आए हैं। विवि गोमूत्र की रिसर्च में इन विद्यार्थियों की मदद लेगा।

    फील्ड अनुभव- विवि के प्रदेश के तीन मुख्य शहर, जबलपुर, रीवा और महू में वेटनरी कॉलेज हैं, जहां से उसे फील्ड अनुभव मिलेगा और वह गाय के गोमूत्र की उपयोगिता बढ़ाने में इसका उपयोग करेगा।

    लैब- विवि के जबलपुर, महू और रीवा कॉलेज में अनुसंधान के लिए लैब है। जबलपुर रिसर्च विभाग पहले से चल रहे पंचगव्य प्रोजेक्ट में कई आधुनिक मशीन ली गई हैं, जो इसमें मदद करेंगी।

    इन पर करेगा रिसर्च

    गोमूत्र- गाय से मिलने वाले गोमूत्र की गुणवत्ता को सुधारेगा। इससे इंसान की बीमारियों के लिए और उपयोगी बनाएगा।

    गोबर- डेरियों से निकलने वाले गोबर का उपयोग गमले तैयार करने, पर्यावरण के प्रदूषण को कम करने पर अनुसंधान करेगा।

    दूध- दूध की गुणवत्ता में इन दिनों को लेकर बहस चल रही है। पशुओं के दूध में ए वन और ए टू से इसकी गुणवत्ता को परखा जाएगा।

    इंसान की बड़ी से बड़ी बीमारियों के इलाज के लिए दवा तैयार करने के लिए हम गोमूत्र पर और बेहतर अनुसंधान करेंगे। दवा भी तैयार करेंगे। इसके अलावा गोबर की उपयोगिता बढ़ाकर प्रदेशभर के नर्सरी से पॉलीथिन हटाकर, उसकी जगह गोबर के गमले में रिप्लेशन करेंगे। प्रो.पीडी जुयाल, कुलपति, वेटनरी विवि

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