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    झाबुआ जिले में पांच घंटे तक शिकार के पास रहा बाघ, अब लगाए पांच कैमरे

    Published: Thu, 07 Dec 2017 07:01 PM (IST) | Updated: Thu, 07 Dec 2017 07:10 PM (IST)
    By: Editorial Team
    tiger demo 07 12 2017

    झाबुआ, पेटलावद। जिले के कसारबर्डी गांव के जंगलों में दिखाई दिए बाघ को अब पकड़ने की कोशिश की जाएगी। इस बारे में अनुमति लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई और इंदौर से टीम आ चुकी है। भोपाल से विशेषज्ञ टीम शुक्रवार को पहुंच जाएगी।

    बुधवार रात एक बार फिर से बाघ दो कैमरों में दिखाई दिया। वो अपने शिकार के पास जाने के बाद पांच घंटे तक उसी जगह रहा, फिर लौट गया। अब यहां दो की जगह पांच कैमरे लगा दिए गए। एक ही जगह पर रहने के कारण जनमानस को पैदा हुए खतरे को देखते हुए उसे पकड़ने की प्रक्रिया शुक्रवार सुबह से की जा सकती है। उसके शिकार के लिए कसारबर्डी के वन क्षेत्र में एक भैंसा भी बांधकर रखा गया है। पिंजरा भी लगाया जा रहा है।

    वन मंडलाधिकारी राजेश कुमार खरे ने बताया, प्रधान मुख्य वन संरक्षक को अनुमति के लिए प्रक्रिया के तौर पर जानकारी भेजी गई है। संभावना है कि वो मिल जाएगी। इसके बाद बाघ को पकड़ने का काम होगा। इसके लिए टीम इंदौर और भोपाल से आ रही है। इंदौर की टीम पहुंच गई है।

    डीएफओ ने बताया, बाघ को ट्रेंक्यूलाइज करके पकड़ने की कोशिश होगी। इसके लिए टीम अपने साथ हाथी लेकर आएगी। बुधवार रात को लगातार दूसरी बार बाघ कैमरे में दिखाई दिया है। अब कैमरों की संख्या बढ़ाकर दो से पांच कर दी गई है। शुक्रवार को उसे पकड़ने की कोशिश की जाएगी। फिलहाल बाघ्ा की गतिविध्ाियां एक ही क्षेत्र में आसपास दिखाई दी है।

    भैंसा रखा शिकार के लिए

    इंदौर से आई टीम ने बाघ के होने वाली जगह पर एक भैंसा शिकार के लिए बांधकर रखा है। टीम को गांव के स्कूल में ठहराया गया है। रातभर निगरानी के बाद सुबह उसके यहां होने की खबर पुख्ता की जाएगी। इसके लिए एक विशेष गोलाकार क्षेत्र में पगमार्क खोजेंगे। अगर उसके पगमार्क किसी दिशा में जाने की तरफ दिखाई देते हैं तो ये माना जाता है कि वो आगे बढ़ रहा है। ऐसा हुआ तो उसे पकड़ने की योजना रोकी जाएगी। लेकिन अगर पगमार्क नहीं मिले तो ये पक्का हो जाएगी कि वो इस क्षेत्र से नहीं जाना चाहता। ऐसे में पकड़ना जरूरी है।

    जंगल कम, इसलिए खतरा

    दरअसल बाघ को पकड़ने के लिए आसानी से अनुमति नहीं दी जाती। लेकिन इस मामले में ये जरूरी हो गया है। जिस क्षेत्र में बाघ डेरा जमाए हुए है, वो ज्यादा घना जंगल नहीं है और आसपास के इलाकों में रहवासी क्षेत्र हैं। कई ग्रामीणों के खेत और घर यहां हैं। लोगों की आवाजाही भी होती है। ऐसे में किसी तरह की जनहानि होने या बाघ के आदमखोर बन जाने की संभावना बनी होती है। इसे देखते हुए ये निर्णय लिया गया।

    डीएफओ राजेश कुमार खरे ने बताया, अनुमति मिल जाएगी। शुक्रवार को बाघ को पकड़ा जाएगा। एक ही जगह पर रहने के कारण उससे लोगों को खतरा है। वो फिर से बुधवार रात को कैमरे में दिखाई दिया। फोटो साफ नहीं है, लेकिन उसके होने की पुष्टि हुई है।

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