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    विश्व परिवार दिवस : कभी अलग नहीं होना चाहता 30 लोगों का यह परिवार

    Published: Sun, 14 May 2017 05:34 PM (IST) | Updated: Mon, 15 May 2017 07:45 AM (IST)
    By: Editorial Team
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    विवेक वर्द्धन श्रीवास्तव-इसहाक पठान, भगवानपुरा। जहां एकल परिवार में भी परिवार संचालन को चुनौती मिल रही हो वहां एक परिवार में 30 सदस्य मौज मस्ती से जिंदगी बिता रहे हैं। 30 सदस्यों का यह घर केवल विश्वास और सम्मान के नेतृत्व में संचालित हो रहा है। 70 वर्षीय मां के मार्गदर्शन में 8 भाईयों का यह संयुक्त परिवार वर्तमान व्यवस्थाओं में मिसाल है। सामान्य ठेला व्यवसाय कर जिंदगी गुजारने वाले यह लोग कभी अलग होना नहीं चाहते।

    गांव की कौशल्या वर्मा (70) के पति मुरार की चार साल पहले मौत हो गई थी। कौशल्या के 8 बेटे और दो बेटियां है। उनकी संतानें लक्ष्मी (42), सपना (40) सहित आठ बेटे कड़वा (35), संतोष (34), दिलीप (30), सुनील (29), बाबूलाल (28), भय्यू (27) व बजरंग (23) है। उनकी बेटी लक्ष्मी खरगोन में रहती है, जबकि सपना अपने परिवार के साथ 8 भाईयों के साथ ही रहती है। इनमें से 6 भाईयों की शादी हो चुकी है। सपना की एक बेटी है और भाईयों के 13 बच्चे है।


    एक चूल्हे पर बनता है भोजन

    कौशल्याबाई ने कहा कि उन्होंने उनकी संतानों को एक साथ रहना और सभी का सुख-दुख में साथ देने के संस्कार दिए। आज भी इस परिवार में सभी का भोजन एक ही चूल्हे पर ही बनता है। भाई, बहन, बहू व बच्चे एक साथ भोजन करते है। यही नहीं परिवार के साभी वयस्क सदस्य व्यवसाय व नौकरी करते है। प्रतिदिन होने वाली कमाई वे अपनी मां को देते है। इस परिवार की मुखिया कौशल्या के निर्णय का सभी पालन करते है। बेटे कड़वा ने बताया कि बाजार में फलों का धंधा और कभी चने बेचने का धंधा भाई लोग करते है। वे सभी लोग साथ रहने के आदी है। परिवार की एकता से उन्हें कभी तंगहाली महसूस नहीं हुई।


    क्षेत्र में कई है संयुक्त परिवार

    आदिवासी क्षेत्र में संयुक्त परिवार के कई उदाहरण है। ग्राम देवाड़ा में छोटे-छोटे बने कमरेनुमा घरों में एक ही परिवार के अलग-अलग सदस्य संयुक्त भाव से रहते हैं। इस परिवार में मुखिया सहित 66 लोग है। मुख्यत: खेती-बाड़ी में व्यस्त रहने वाले इस परिवार के लोग शाम एक साथ बिताते हैं। बामनिया परिवार का यह फलिया बुजुर्गों के आशीर्वाद और बच्चों की किलकारी से आबाद है। 70 वर्षीय मुखिया घुघरिया बामनिया के नेतृत्व में उसकी 9 संतानों में दो बेटियाँ ब्याह दी गई है। शेष 7 भाईयों का परिवार एक बड़े कुनबे के रूप में रहता है। वक्त के साथ कमरे बने। परिवार में कुल 66 सदस्यों में 35 बेटियां व 11 बेटे हैं। यह भरा-पूरा परिवार एक साथ सारे तीज-त्योहार मनाता है।

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