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    पारा गिरने से फसलों पर बढ़ा पाले का संकट

    Published: Sat, 14 Jan 2017 05:43 PM (IST) | Updated: Sat, 14 Jan 2017 05:43 PM (IST)
    By: Editorial Team
    06 14 01 2017

    श्योपुर। श्योपुर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में तेज सर्दी और लगातार गिरते पारे ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। क्योंकि पिछले कुछ दिनों से तापमान में गिरावट आई है। इस कारण कई गांवों में खड़ी अरहर, सरसों और चना की फसलों के पौधे मुरझाने लगे हैं। गिरते पारे को देखते हुए कृषि विभाग ने भी किसानों के लिए अलर्ट जारी कर दिया हैं। जो तापमान शहर में 4.4 डिग्री तक आ गया है वहीं खेतों में और घटकर 02 डिग्री पर पहुंच जाता है। इस कारण फसलों को ज्यादा नुकसान होने की संभावना बढ़ गई है। इस बार श्योपुर जिले में लगभग 40 हजार हेक्टेयर सरसों, 20 हजार हेक्टेयर चना और 05 से 07 हजार हेक्टेयर में अरहर की फसल बोई गई है। जिसको देखकर अभी तक किसान खुश थे, लेकिन अब वह लगातार परेशान हो उठे हैं। कई जगहों पर अरहर की फसल को नुकसान पहुंचना शुरू हो गया है। ढलान और पहाड़ी क्षेत्रों के गांवों के खेतों में इस गिरते पारे का असर ज्यादा देखने को मिला है।

    इन गांवों की फसलों पर ज्यादा असर

    कराहल के पहाड़ी क्षेत्रों के मोरावन, सेसईपुरा, बासेड़ और बड़ौदा के ललितपुरा, अजयपुरा गूजर गांवड़ी में फसलों पर बढ़ती सर्दी के कारण नुकसान होने लगा है। कृषि विभाग के अनुसार पहाड़ी क्षेत्रों के गांवों में गलन ज्यादा महसूस होती हैं जब पारा 05 डिग्री से कम हो जाता है तो यहां फसलों को नुकसान पहुंचना शुरू हो जाता है। लेकिन इन फसलों की सुरक्षा खेतों में पानी देकर की जा सकती हैं या थायो यूरिया का छिड़काव करके फसलों की सुरक्षा की जा सकती है। लेकिन समस्या ये है कि यह थायोयूरिया जिले में नहीं मिलता। इस कारण किसान इसका छिड़काव भी नहीं कर पा रहे हैं। कुछ किसानों की खेत ऐसे हैं जहां पानी दिया जाना अब संभव नहीं हैं इस कारण वह फसलों को बचाने के लिए घरेलु तरीके अपना रहे हैं। ये है पाले और तुसार का असर

    कृषि विशेषज्ञों के अनुसार जब तापमान लगातार गिरता है तो फसलो की पाला मारने की संभावना बढ़ जाती है। लेकिन तुझार सर्द हवा के चलते लगता है। पाले से फसल खराब हो जाती है। तुसार से पैदावार आधी से भी कम हो जाती है। ऐसी स्थिति में वे उपाय बेहतर साबित होते हैं जिनसे तापमान बढ़ सके।

    वर्जन

    पारा गिरने से अब फसलों के नुकसान की संभावना बढ़ गई है। ऐसे खेत जो पहाड़ी क्षेत्रों में रहते हैं वहां फसलों को ज्यादा नुकसान होता है। सबसे ज्यादा नुकसान अरहर की फसल इसके बाद चना और सरसों की फसलों को हो सकता है। इसलिए खेतों के आसपास आग जलाकर घटते ताममान को बढ़ाया जा सकता है।

    एसपी शर्मा, एसडीओ, कृषि विभाग

    फोटो : 06

    केप्शन : खेत में खड़ी सरसों की फसल

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