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    विश्राम गृह और कैंटीन पर ताला

    Published: Sat, 22 Apr 2017 03:58 AM (IST) | Updated: Sat, 22 Apr 2017 03:58 AM (IST)
    By: Editorial Team

    - कृषि उपज मंडी में उपज लेकर आने वाले किसान हो रहे परेशान

    नलखेड़ा। नईदुनिया न्यूज

    सरकार भले ही कृषि मंडियों में किसानों के लिए सुविधाओं पर लाखों-करोड़ों रुपए खर्च कर रही है लेकिन इसका लाभ किसानों को नहीं मिल रहा है। उन्हें न तो विश्राम के लिए समुचित स्थान मिल रहा है और न ही सस्ती दरों पर भोजन। किसानों को मिलने वाली सुविधाएं ताले में कैद होकर ही रह गई हैं।

    सरकार किसानों को मंडी में सुविधाएं मुहैया कराने के लिए जहां एक वर्ष में करा़ेडों रुपए खर्च कर रही है। वहीं दूसरी तरफ यहां (मंडी में) किसानों को मिलने वाली सुविधाएं ही नदारद है। यहां न तो किसान उनके लिए बनाए गए विश्राम गृहों में विश्राम कर पा रहे हैं और न ही कैंटीन में उन्हें भोजन उपलब्ध हो पा रहा है। किसान खेतों से अपनी उपज लेकर मंडी में ला रहे हैं। मंडी में गेहूं व चना सहित अन्य उपज की आवक हो रही है, लेकिन मंडी प्रबंधन द्वारा किसानों के लिए कोई व्यवस्थाएं नहीं है।

    भोजन व्यवस्था भी बंद

    शासन द्वारा मंडी में आने वाले किसानों के लिए सस्ते दामों पर कृषक भोजन योजना चलाई जा रही है लेकिन मंडी में यह योजना कई माह से बंद है। उपज लेकर आने वाले भूखे-प्यासे किसानों को इसका लाभ नहीं मिल रहा है। मंडी परिसर में शासन द्वारा किसानों के लिए लाखों रुपए की लागत से कृषक विश्राम गृह, जनसुविधा व कैंटीन का निर्माण कराया गया है लेकिन ये किसानों के लिए कभी खुलते ही नहीं। कैंटीन में किसानों के लिए पांच रुपए में भरपेट पुड़ी-सब्जी देने का प्रावधान है लेकिन मंडी में आने वाले किसानो को कैंटीन की सुविधा नहीं मिल पा रही है। यहां विश्राम गृह, जनसुविधा केंद्र व कैंटीन में हमेशा ताला लटका रहता है। मंडी परिसर में पानी की टंकी भी है लेकिन यह शोपीस बनकर रह गई है। खरीफ व रबी सीजन में आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से आए हजारों किसान अपनी उपज लेकर मंडी पहुंचते हैं। इस दौरान किसानों को खुले आसमान के नीचे धूप और सर्दी में अपना समय बिताना पड़ता है। कृषक विश्राम गृह नहीं खुलने से किसान चिलचिलाती धूप से बचने के लिए पेड़ की छाया तो कोई वाहनों की ओट लेकर धूप से बचने का प्रयास करता है। कृषक हरिसिंह, रामकरण, देवकरण, बापूलाल आदि ने बताया जब प्रशासन ने किसानों के लिए लाखों रुपए खर्च करके कृषक विश्राम गृह बनाया है तो उसे किसानों के लिए खोलना चाहिए, ताकि किसान इस तपती धूप से बच सकें।

    विश्राम गृह और कैंटीन में गंदगी

    काफी समय से बंद पड़े किसान विश्राम गृह और कैंटीन भवन की हालात देख-रेख के अभाव में काफी बदतर हो गई है। जिम्मेदारों द्वारा सुध नहीं लिए जाने की वजह से जहां किसान विश्राम गृह और कैंटीन भवन के शीशे आदि शरारती तत्वों द्वारा तोड़ दिए गए हैं। वहीं इन दोनों भवनों के कक्ष, गलियारों में भंगार आदि पड़ा होकर चहुंओर गंदगी का आलम पसरा हुआ है। कुछ समय पूर्व यहां किसान मिट्टी परीक्षण हेतु अपने खेतों की मिट्टी के सैम्पल मिट्टी परीक्षण के दल के पास लाए थे, क्योंकि इन कृषक विश्राम गृह और कैंटीन के भवनों में मिट्टी परीक्षण करने वाला दल अपने स्वयं के भवन के अभाववश रुका हुआ था। यह परीक्षण दल भी अपने कार्य की इतिश्री कर लेने के बाद किसानों के मिट्टी के सैम्पल और परीक्षण के दौरान प्रयोग में लाई जाने वाली दवाईयों आदि का कचरा भी यही पर छोड़कर चला गया।

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