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    जन्मजात विकृति के दिव्यांगो को इलाज से मिलेगी जीने की राह

    Published: Wed, 13 Sep 2017 07:53 PM (IST) | Updated: Wed, 13 Sep 2017 07:53 PM (IST)
    By: Editorial Team

    मंडला। नईदुनिया प्रतिनिधि

    आदिवासी क्षेत्र में जन्मजात विकृति कई बच्चों में आ जाती है। अशिक्षा के कारण क्षेत्र के आदिवासियों को इस इलाज की जानकारी न होने पर बच्चे पूरी उम्र दिव्यांगता का शिकार होकर जीवन जीना पड़ता है। लेकिन अब ऐसे बच्चों के लिए एक नई उम्मींद की किरण जागी है। जन्मजात दिव्यांग बच्चों का अब इलाज हो रहा है। जिससे कई मामलों में अच्छे परिणाम आये है ये दिव्यांग ठीक भी हो रहे हैं। इस इलाज के लिए कहीं दूर नहीं जाना है बल्कि जिला अस्पताल भवन में ही विकृत बच्चों का इलाज हो रहा है। जो दिव्यांग 0 से 18 साल के बीच के उनका इलाज किया जा रहा हैं।

    फीजियोथैरपी से दिया जा रहा इलाज

    जिला अस्पताल की दूसरी मंजिल में जिला शीघ्र पहचान एवं हस्तक्षेप केंद्र चल रहा है। इसमें राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत बच्चों का इलाज किया जा रहा है। जो दिव्यांग बच्चे चलने-फिरने, उठने-बैठने की स्थिति में नहीं थे। उन्हें यहां पर आपरेशन व फिजियोथैरपी के माध्यम से कुछ ही माहों में चलने-फिरने लायक बना दिया है। फिजियोथैरपी सेंटर जनवरी माह से ही प्रारंभ हुआ है। यहां पर डॉ ब्रजेश मरकाम फिजियोथैरपिस्ट ने बताया कि 8 माह में करीब डेढ़ सौ के लगभग बच्चे आए हैं। जिन्हें दो-तीन माह में ही बेहतर लाभ मिला है और वे चलने-फिरने लायक हो गए हैं। अब तक करीब डेढ़ सौ लोगों की फिजियोथेरपी की है जिसमें 40 से 50 प्रतिशत बच्चों को लाभ मिला है।

    जन्मजात दिव्यांग चलने लगेगा

    जिला शीघ्र एवं पहचान केंद्र में 2 माह पहले जन्मजात दिव्यांग अंश पिता मनीष श्रीवास्तव को लाया गया। वह चल फिर भी नहीं पाता था। उसके इलाज के बाद सपोर्ट से चलने में सफलता मिली है। 50 प्रतिशत लाभ मिला है। इसी प्रकार 2 साल का रूद्रांश भी जन्मजात दिव्यांगता का शिकार हो गया था। पैरालिसिस होने से उसके अंग काम करना बंद कर दिए थे। 3 माह पहले उसे जिला शीघ्र पहचान व हस्तक्षेप केंद्र में उसके माता पिता पहुंचे। इलाज के बाद अब उसने कमर उठाना शुरू कर दिया है। जिससे उम्मीद बंध गई है कि आगे वह चलने फिरने लायक हो जाएगा। लगभग यही स्थिति 5 साल के यश बरया के साथ थी। उसे भी शरीर के दांये हिस्से में लकवा मार गया था। यह निःशुल्क इलाज है।

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    जिन बच्चों को जन्मजात विकृति आ जाती है। ऐसे बच्चों का इलाज किया जा रहा है। और वे ठीक हो रहे है। जो बच्चे जिले से बाहर जाकर इलाज कराने पर ठीक नहीं हो पाए। वे भी यहां इलाज के बाद चलने-फिरने लायक हो गए।

    डॉ केसी मेसराम, सीएमएचओ, मंडला

    राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत 50 प्रतिशत जन्मजात दिव्यांग चलने में समर्थ

    13एमडीएल22 मंडला। जिला शीघ्र पहचान एवं हस्तक्षेप केंद्र में बच्चों का इलाज करते फिजियोथेरेपिस्ट।

    13एमडीएल23 मंडला। पापा के साथ सपोर्ट लेकर चलने लगा अंश।

    13एमडीएल24 मंडला। मां के साथ इलाज के लिए आया रूद्रांश

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