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    37 सालों में 110 लोगों की डूबने से मौत

    Published: Fri, 21 Apr 2017 07:50 PM (IST) | Updated: Fri, 21 Apr 2017 07:50 PM (IST)
    By: Editorial Team

    फ्लैग - बकाना में छाया मातम, दोनों महिलाओं का शव मिला, हादसों के बाद भी नहीं जाग रहा प्रशासन

    पॉइंटर - गमगीन माहौल में हुआ अंतिम संस्कार

    21 एमडीएस-24

    कैप्शन : ग्राम बकाना में मृतकों के घर के बाहर जमा गमगीन लोग।

    मंदसौर। नईदुनिया प्रतिनिधि

    ग्राम बकाना में गुरुवार शाम को चंबल नदी में डूबी दो महिलाओं के शव निकाल लिए गए। शुक्रवार को गमगीन माहौल में उनका अंतिम संस्कार किया गया। ग्राम में सुबह से ही मातम छाया हुआ था। दो घरों से निकली अंतिम यात्राओं ने कई लोगों की आंखों में आंसू ला दिए। गौरतलब है कि गांधीसागर बांध के जलग्रहण क्षेत्र में लबालब चंबल नदी में गुरुवार को हुआ हादसा पहली बार नहीं हुआ है। नदी में अवैध रूप से चल रहे स्टीमर व नावों से दुर्घटना का सिलसिला 1980 से बदस्तूर जारी है। दुर्घटनाओं में अब तक 110 लोगों की डूबने से मौत हो चुकी है। ये वे लोग हैं, जिनकी जानकारी प्रशासन के पास है। अवैध परिवहन के कारण डूबे लोगों की जानकारी किसी के पास नहीं है।

    पुलिस के अनुसार नाव से घर लौटने के दौरान चंबल में डूबी बकाना की स्याणीबाई पति बगदीराम मीणा (65) काशव तो रात्रि में ही निकाल लिया गया था। दूसरी लापता महिला प्रेमबाई पति रायसिंह मीणा (30) का शव शुक्रवार सुबह 6 बजे मिला। सुबह शामगढ़ से बकाना पहुंचे डॉ.राकेश पाटीदार ने शवों का पोस्टमार्टम किया। विधायक हरदीपसिंह डंग के साथ जिपं सदस्य प्रतिनिधि ललित विश्वकर्मा ने अंतिम यात्रा में मुक्तिधाम पहुंचकर शोक प्रकट किया। मृतका प्रेमबाई का 9 वर्षीय पुत्र निखिल है। निखिल बचपन से अपने मामा जगदीश मीणा के पास नारिया मानपुरा (गरोठ) में रहकर पढ़ाई कर रहा है। मां की मौत पर बालक निखिल का रो-रोकर बुरा हाल था। मृतका प्रेमबाई प्रगतिशील किसान परिवार की बहु थी। एक और मृतका स्याणीबाई (65) के चार पुत्र है, जिसका मायका शामगढ़ के पास बरखेड़ा उदा बताया जा रहा है। 4 महिलाएं बची थी हादसे में

    ग्राम बकाना में चंबल नदी के पार स्थित टापू पर खरबूजे की खेती करके घर पहुंचने के लिए चप्पू वाली नाव से आ रही थी। इसी दौरान नाव पलटने से महिलाएं नदी में जा गिरी। चार महिलाओं बगदीबाई पति लालसिंह मीणा, हुडीबाई पति कंवरलाल, शांतिबाई व कमलाबाई को एक अन्य नाविक ने बचा लिया था।

    समय-समय पर होती रहती हैं शिकायते

    मंदसौर जिले की मल्हारगढ़, मंदसौर, सीतामऊ, शामगढ़, गरोठ व भानपुरा तहसील के सैकड़ों गांव गांधीसागर जलाशय के किनारे बसे हुए हैं। नीमच जिले की मनासा तहसील के गांव जलाशय के डूब क्षेत्र में हैं। मंदसौर-नीमच जिले के जलमार्गों का निर्धारण मंदसौर एडीएम कार्यालय से ही होता है। हालांकि निर्धारित जल मार्गों के अलावा ग्रामीणों ने भी अपनी सुविधा से कुछ जल मार्गों का निर्धारण कर लिया है। अवैध नौकायन व अप्रशिक्षित नाविकों के कारण भी जलाशय में दुर्घटनाएं हुई है।

    बॉक्स...

    50-55 स्टीमरों व नावों से

    हो रहा मानव परिवहन

    गांधीसागर बांध के निर्माण के बाद जिले के सैकड़ों गांवों में परिवहन का साधन जलमार्ग ही बचा है। सड़क मार्ग पर लंबी दूरी तय करने के बजाय ग्रामीण स्टीमर में बैठकर ही गंतव्य तक पहुंच जाते हैं। स्टीमर व नावों में ग्रामीण अपने दोपहिया वाहन और जानवर एक गांव से दूसरे गांव ले जाते हैं। कलेक्टर कार्यालय से पूरे गांधीसागर जलाशय में 16 जलमार्ग तय किए हुए हैं। इन पर स्टीमर चलाने की अनुमति लोक निर्माण विभाग के मैकेनिकल विभाग की अनुशंसा के बाद जल संसाधन विभाग व प्रशासन देता है। नीमच व मंदसौर जिले में गांधीसागर बांध के लगभग 60 वर्ग किमी क्षेत्र में फैले जलाशय में लगभग 50-55 स्टीमर व नाव मानव परिवहन में लगे हैं। इसमें से आधे ही लाइसेंसशुदा है और जो लाइसेंसशुदा हैं, उनके फिटनेस की जांच करने व लाइसेंस की अवधि की जांच करने की तरफ भी कोई नहीं देखता है। यही कारण है कि चंबल नदी में एक के बाद हादसे हो रहे हैं और अभी तक 110 लोगों की मौत डूबने से हो चुकी है।

    बाक्स...

    गांधीसागर जलाशय में हुए जल हादसे

    दिनांक स्थान मृतकों की संख्या

    27 मई 1980 बोरखेडी घाटा, नाहरगढ़ 11

    83-84 हिंगोरिया नाहरगढ़ 6

    27 सितं.1984 गांधीसागर जलाशय 3 3 मई 1985 बालोदा, गरोठ 35

    5 मई 93 खडावदा, गरोठ 3

    4 अप्रैल 95 सोनड़ी, रामपुरा 19

    9 जनवरी 05 संजीत 6

    12 नवंबर 11 चिमनगढ़ 13

    अप्रैल 2014 आवरा 3

    जनवरी 2015 गांधीसागर जलाशय 3

    20 अप्रैल 2017 बकाना 2

    बाक्स...

    यह है नियमित जल मार्ग

    - संजीत से कुंडला व्हाया खानखेड़ी

    - संजीत से अरनियामाली

    - संजीत मगरा से बडी आंत्री व्हाया छोटी आंत्री

    - आक्या मेड़ी से मोलाखेड़ी

    - खेजड़ी से मोलाखेड़ी

    - रामपुरा से रायपुरिया व्हाया रामनगर

    - गांधीसागर मोड़ी पतनम जेटी से मावासेरी टेकरी

    - गांधीसागर मोड़ी पतनम छोटी से लोडिंग पाइंट व्हाया करनपुर

    - रामपुरा से खडावदा

    - चचोर से बालोदा

    - रामपुरा से सोनड़ी, जोड़मी बाकी

    - उमरिया बालोदा से बोरखड़ी, हिंगोरिया

    - कुंडवासा से उमरिया व्हाया लोटवास मगरा

    - चचोर से संजीत

    - छोटी आंत्री से बड़ी आंत्री

    - एलवी महादेव से आवरा घाटा वर्जन..

    जानकारी ले रहे

    जिले में गांधीसागर जलाशय व चंबल नदी में चलने वाले स्टीमर व नाव की जानकारी ली जा रही है। अवैध परिवहन को रोका जाएगा।

    -अर्जुनसिंह डाबर, एडीएम।

    और जानें :  # mandsaur news
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