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    कागजों में 43 जांच का दावा, हकीकत में दर्जनभर भी नहीं

    Published: Wed, 13 Sep 2017 11:34 PM (IST) | Updated: Wed, 13 Sep 2017 11:34 PM (IST)
    By: Editorial Team

    मंदसौर। नईदुनिया प्रतिनिधि

    जिला अस्पताल की लैब कागजों में सर्वसुविधायुक्त है और यहां 43 प्रकार की जांचें भी हो रही है और अस्पताल के मरीजों को सारी सुविधाएं भी लैब में मिल रही है, पर हकीकत इसके ठीक विपरीत है। यहां रक्त और यूरीन से संबंधित 13-14 तरह की ही जांचें हो रही है। बाकी सभी के लिए बाहर की निजी लैब पर ही निर्भर है। इसमें से कई जांच ऐसी भी हैं, जिनकी सूची पहले जिला अस्पताल में भी लगी थी। अब वह सूची भी निकाल दी गई है। माइक्रोबायोलॉजी से संबंधित जांचें तो यहां हो ही नहीं रही है। दबी जबान में कर्मचारी बता रहे हैं कि कई जांचों के किट ही नहीं है। सिविल सर्जन कह रहे हैं कि इनको टाइट किया इसलिए बोल रहे हैं।

    अभी बरसात में संक्रामक रोगों के साथ ही मौसमी बीमारियों का खतरा बना हुआ है। जिला अस्पताल में प्रतिदिन 1 हजार से अधिक मरीज सर्दी-जुकाम से लेकर अन्य बीमारियों का उपचार करवाने पहुंच रहे हैं, परंतु जिला अस्पताल की लैबोरेटरी में सामान्य जांचों के अलावा गंभीर बीमारियों से संबंधित जांचें नहीं हो रही है।

    हालांकि अस्पताल प्रबंधन का फिर भी यही दावा है कि अस्पताल में सूची में शामिल माइक्रो बायोलॉजी से संबंधित जांचों को छोड़कर सभी तरह की जांच हो रही है। पर नाम नहीं बताने की शर्त पर कुछ कर्मचारियों ही बता रहे हैं कि अस्पताल में रक्त व यूरीन से जुड़ी सामान्य 12-13 जांचें ही हो रही है इसके अलावा अन्य जांच के लिए मरीज को निजी लैब में ही जाना पड़ रहा है।

    'झूठ बोल रहे कर्मचारी'

    अस्पताल की लैब में हो रही जांचों के संबंध में पड़ताल करने पर प्रबंधन का झूठ भी सामने आया है। पैथोलॉजिस्ट डॉ. सौरभ मंडवारिया ने बताया कि अस्पताल की लैब में 43 तरह की जांचें की जा रही है। उनका कहना था कि स्वाइन फ्लू की जांच को छोड़कर डेंगू, मलेरिया सहित सभी जांचें अस्पताल में ही हो रही है। कुछ कर्मचारियों ने पहचान छिपाते हुए बताया कि अस्पताल की लैबों में संसाधनों और विभिन्न जांच किट नहीं होने से सूची में शामिल आधी से ज्यादा जांच हो ही नहीं पा रही है। यहां महज सामान्य जांच के अलावा कुछ नहीं हो पा रहा है। इस पर सिविल सर्जन ने कहा कि कर्मचारियों की डयूटी में सख्ती की है, इस कारण अब संसाधन नहीं मिलने जैसे झूठ बोल रहे हैं।

    बॉक्स

    बोर्ड भी गायब कर दिया

    जिला अस्पताल की लैब के बाहर पहले शासन द्वारा निर्धारित की गई जांच की सूची का एक बोर्ड भी लगा था, जिसे यहां आने वाले मरीज और परिजन देख सके। उसमें 36 तरह की जांच लिखी हुई थी। सभी तरह की जांच नहीं होने के कारण कुछ दिन पहले अस्पताल प्रबंधन ने यह बोर्ड हटा दिया। वहीं अब कागजों में 43 तरह की जांचें होना बताया जा रहा है, जबकि जिला अस्पताल की लैब में मलेरिया, ब्लड शुगर, सीरम यूरेआ, एसजीओटी, एसजीपीटी, एचआईवी, पीटी, सीएफएस, टॉर्च टेस्ट सहित कुछ अन्य सामान्य जांचें ही हो रही है।

    सूची में शामिल यह जांच

    नहीं होती अस्पताल में

    जिला अस्पताल में शासन द्वारा तैयार की गई सूची में कल्चर संबंधी विभिन्न जांचे तो दी गई है, पर यह जिला अस्पताल में नहीं हो रही है। क्योंकि यहां माइक्रोबायोलॉजी लैब नहीं है और माइक्रोबायोलॉजिस्ट भी नहीं है। यह लगभग 15 तरह की जांचे हैं। इसके अलावा यूरिक एसिड, कोलेस्ट्राल, कैल्शियम की जांच भी नहीं होती है। वहीं मधुमेह के मरीजों के लिए आवश्यक एचबी ए1 सी की जांच को सूची में ही शामिल नहीं किया गया है। जबकि उनका उपचार इसी जांच के आधार पर चलता है।

    सभी जांचें हो रही है

    जिला अस्पताल की लैब में सभी तरह की जांचें हो रही है। उपकरण उपलब्ध नहीं करवाने की बात झूठी है। अस्पताल में माइक्रोबायोलॉजी संबंधित जांचें नहीं हो पा रही है। 12-14 कर्मचारी हैं, पर लैब से पहले ही गायब रहते थे। अब मैंने उनसे सख्ती करना शुरू कर दिया है, जिसके कारण उनमें से कोई उपकरण संबंधी जानकारी दे रहा होगा। हमारे यहां सभी जांचें की जा रही है।

    -डॉ. एके मिश्रा, सिविल सर्जन, जिला चिकित्सालय।

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