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    रोज दस किमी चलकर नर्मदा की परिक्रमा कर रही नन्ही रानू

    Published: Wed, 15 Nov 2017 06:21 PM (IST) | Updated: Wed, 15 Nov 2017 06:21 PM (IST)
    By: Editorial Team

    निवास। नईदुनिया न्यूज

    बात चाले शिक्षा की हो या नौकरी की, धर्म की हो या फिर आस्था की, हर जगह लड़कियां लड़कों से कमतर नहीं हैं। धर्म और आस्था के मामले में भी बुजुर्गों से मिले संस्कारों को लड़कियां बेहद संजीदगी से लेती हैं। इसका उदाहरण अपने दादा-दादी के साथ नर्मदा परिक्रमा पर निकली दमोह की 11 वर्षीय रानू अहिरवार है। मां नर्मदा की 3500 किमी की परिक्रमा में दादा-दादी का साथ देने निकली रानू को दादा-दादी बेटे से कम नहीं मान रहे हैं। बुजुर्गों के साथ वह रोज दस किमी चलकर नर्मदा परिक्रमा कर रही है।

    मध्यप्रदेश के दमोह जिले की तेंदूखेड़ा तहसील के 53 वर्षीय शिवप्रसाद पारिवारिक जिम्मेदारियों से मुक्त होने के बाद जब अपनी पत्नी 49 वर्षीय आनंद रानी के साथ नर्मदा परिक्रमा के लिए रवाना होने लगे तो अपने दादा-दादी के प्रति अपार प्रेम और सेवाभाव रखने वाली नातिन (पिता दलसिंह अहिरवार) रानू भी दादा-दादी के साथ जाने की जिद पर अड़ गई। बचपन से ही अपने चंचल और हठी स्वभाव की रानू अपनी हर बात उनसे मनवा ही लेती है। इसी के चलते उन्हें उसकी इस जिद को भी पूर्ण करना ही पड़ा। लिहाजा भेड़ाघाट के सरस्वती घाट से नर्मदा जल लेकर वह भी परिक्रमा पर निकल पड़ी।

    यह है रोज की दिनचर्या

    रानू ने बताया कि वह अपनी टोली के साथ प्रतिदिन 10 किमी की दूरी तय करती है। प्रातः सूर्योदय के साथ ही इनकी परिक्रमा आरंभ हो जाती है। दोपहर को लघु विश्राम के बाद फिर चलना शुरू करते हैं और शाम को ठहरते हैं। जहां भोजन और रात्रि विश्राम होता है। नईदुनिया ने जब शिक्षा के संबंध में पूछा तो रानू ने बताया कि अभी वह पास के ही सरकारी स्कूल में छठवीं कक्षा में पढ़ रही है। परिक्रमा पूर्ण होने के बाद वह फिर अपनी पढ़ाई शुरू करेगी। रानू के दादा ने बताया कि रानू पढ़ाई में निपुण है और हर साल अच्छे नम्बरों से पास होती है।

    दमोह जिले के तेंदूखेड़ा की रहने वाली है नन्ही परिक्रमावासी

    15एमडीएल2 निवास। दादा दादी के साथ नर्मदा परिक्रमा कर रही रानू।

    भावांतर योजना के तहत नहीं हुए नए पंजीयन

    मंडला। भावांतर योजना के तहत मंडियों में शासन द्वारा तय उपज बेचना है। जिसके लिए पहले पंजीयन कराए गए थे। अब शासन ने किसानों को दोबारा मौका दिया है कि वे पंजीयन कराकर योजना का लाभ लें। 15 से 25 नवंबर तक पंजीयन कराया जाएगा। पहले दिन जिले में एक भी नए पंजीयन नहीं हुए। जिले में अब भी 9081 पंजीयन भावांतर योजना के तहत हैं। जिले में तीन कृषि उपज मंडी हैं। जिनमें कहीं भी पंजीयन किसानों ने नहीं कराया।

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