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    फुटबाल कप के सेमीफाइनल में बैहर-नागपुर ने बनाई जगह

    Published: Wed, 15 Nov 2017 08:54 PM (IST) | Updated: Wed, 15 Nov 2017 08:54 PM (IST)
    By: Editorial Team

    मंडला। नईदुनिया प्रतिनिधि

    माहिष्मति फुटबॉल कप 2017 के छटवे दिन दो मैच कराए गए। दोपहर 2 बजे बैहर और उकवा के बीच रोमांचक मैच हुआ। जिसमे बैहर की तरफ से राजा और विजय ने एक-एक गोल किया। उकवा की टीम से भारत ने 1 गोल किया। जिसमें बैहर विजयी रही और सेमीफाइनल में जगह बनाने में कामयाब रहा। यह मैच सिंधी समाज अध्यक्ष गनेश जैसवानी, जैन समाज के अध्यक्ष शुभाष जैन के साथ प्रभात जैन और सैयद कमर अली की उपस्थिति में शुरू हुआ। जिन्होंने खिलाड़ियों का उत्साह वर्धन किया।

    दूसरे मैच में नागपुर और यंग इलेवन उकवा के बीच हुए मैच में जोरदार संघर्ष देखने को मिला। हाफ टाइम तक दोनों टीमें 1-1 से बराबर रही और बहुत प्रयासों के बाद फूल टाइम और अतिरिक्त समय में भी कोई भी टीम बढ़त बनाने में असफल रही। बाद में पेनाल्टी शूट आउट में नागपुर ने 4-2 से मैच को जीता। मैच में जनपद अध्यक्ष पांचो बाई पदम, उपाध्यक्ष अभिनव चौरसिया, सीईओ संकेत मुरारी मरावी, अनीता चंदेल, ललिता पटेल, चंदर सिंह कुड़ापे, नन्दलाल पटेल, उजयारी बाई जंघेला, अनुसिया परते, सुनीति जंघेला, वरिष्ट समाजसेवी टीइस मिश्रा उपस्थित रहे।

    15एमडीएल 21 मंडला। खिलाड़ियों का परिचय प्राप्त करते अतिथि।

    भागवत कथा सुनने पर गोविंद के चरणों से हो जाता है प्रेमः मानवेंद्र शास्त्री

    15एमडीएल 19मंडला। कथा में श्रीकृष्ण जन्म की सजाई गई झांकी।

    मंडला। नईदुनिया न्यूज

    ग्राम कटरा स्थित शुभा मोटर्स में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के चौथे दिन में पं.मानवेन्द्र शास्त्री ने भगवान कृष्ण के जन्म की कथा सुनाते हुए कहा कि माया ही जीव को बांधती है और ब्रम्ह जीव की माया से मुक्त करता है। देवकी ने कंस से विनती कर कहा की आठवीं संतान न मारो परंतु पापी कंस नहीं माना। तभी उसके हाथ से छूटकर योग माया आकाश में अष्टभुजी रूप में प्रकट हो गई। आकाशवाणी हुई कंस तुझे मारने वाला धरती पर पैदा हो चुका है।

    शास्त्री जी ने कहा कि पूतना नामक राक्षसी को कंस ने कृष्ण को मारने के लिए भेजा वह छठी पर्व में शामिल हुई झूले में पड़े नंदलाला को झुुलाने लगी। स्तनपान करते करते भगवान श्रीकृष्ण उसके प्राण हरने लगे। तब छोड़ रे छोड़ रे शब्द निकालते वह समाप्त हो गई। सकटा सुर का वध कान्हा ने किया। बल अधिक होने से बलराम नाम से जाना जाता है। संकर्षण से प्रकट अनेक नाम रूप एक सहस्त्रनाम वाले श्री कृष्ण कहलाए।

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