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    11 लाख रुपए लैप्स, अब 1 करोड़ ज्यादा मिलेंगे

    Published: Sat, 22 Apr 2017 03:58 AM (IST) | Updated: Sat, 22 Apr 2017 03:58 AM (IST)
    By: Editorial Team

    - जनभागीदारी मद से प्रत्येक तिमाही में एक-एक करोड़ रुपए मिलेंगे

    शाजापुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

    बीते वर्ष के जनभागीदारी मद में मिले 11 लाख रुपए लैप्स हो गए हैं। अब यह राशि प्रदेश सरकार से नहीं मिलेगी। जिपं अध्यक्ष कलांबाई कुंडला के तीखे तेवर दिखाने और अफसरों की शिकायत के बाद उम्मीद थी कि अजा वर्ग के जो 11 लाख रुपए अगले वित्तीय वर्ष यानि 2017-18 के मद में मिल जाएंगे किंतु ऐसा नहीं हो पाया। हालांकि, ये राशि भले ही लैप्स हो गई किंतु इस बार 1 करोड़ रुपए ज्यादा ही मिलेंगे। सरकार ने शाजापुर जिले का जनभागीदारी मद 3 की बजाय 4 करोड़ रुपए कर दिया है। प्रत्येक तिमाही में जिला प्रशासन को एक-एक करोड़ रुपए मिलेंगे। राशि मंजूर भी हो चुकी है। बस आवंटन बाकी है। जानकारों का मानना है कि हर वर्ष जिम्मेदारों की अनदेखी व लापरवाही से लाखों रुपए लैप्स हो जाते हैं। इस बार ऐसा न हो, इसके लिए सतत मॉनीटरिंग होनी चाहिए।

    जानकारी अनुसार जनभागीदारी मद का आवंटन योजना मंडल भोपाल करता है। वहां से बजट आवंटित होकर जिले को हर तिमाही में मिलता है। जनभागीदारी मद में उन कार्यों के लिए राशि जारी की जाती है, जिनमें आधी राशि जनभागीदारी के काम जैसे स्टॉपडेम, पुल-पुलियाएं, सीसी रोड, श्मशान शेड, सामुदायिक भवन आदि पक्के काम किए जाएं। ये काम सार्वजनिक हित में होने चाहिए। कच्चे कार्य नहीं किए जा सकते। जानकारी अनुसार कलेक्टर के माध्यम से जनभागीदारी मद में अधिकतम राशि 25 लाख रुपए तक जारी कर सकते हैं। इससे ज्यादा राशि है तो प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा जाता है।

    जनभागीदारी की यह प्रक्रिया

    - जनभागीदारी से कार्य कराने वाली समिति पंजीकृत होना चाहिए।

    - समिति बैठक कर संबंधित कार्य के लिए ठहराव-प्रस्ताव करती है।

    - कलेक्टर को आवेदन देने के बाद मामला जिला योजना विभाग के पास पहुंचता है।

    - मामले में सभी जरूरी दस्तावेजों की छानबीन के राशि की मंजूरी दी जाती है।

    - राशि देने के बाद भी अफसर सतत मॉनीटरिंग करते हैं।

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    पिछले वर्ष के 11 लाख रुपए खर्च नहीं कर सके

    जनभागीदारी मद में हर वित्तीय वर्ष में राशि का आवंटन होता है पर जिम्मेदार अफसर इसे खर्च नहीं कर पाते हैं। पिछले दो वित्तीय वर्ष के आंकड़े तो यही कह रहे हैं। जानकारी अनुसार वित्तीय वर्ष 2015-16 के तीन त्रैमासिक यानि मार्च से दिसंबर तक मिले कुल 1.68 करोड़ रुपए लैप्स हो चुके हैं। इसके बाद वर्ष 2016-17 में अजा वर्ग के 11 लाख रुपए भी लैप्स हो गए।

    अफसर फाइलों को आगे बढ़ाते ही नहीं

    हर साल आवंटित राशि के लैप्स होने की कई वजह हैं। दरअसल, कई बार जिम्मेदार अफसर कामों को प्राथमिकता न देते हुए फाइलें ही रोक लेते हैं। वर्ष 2015-16 में लैप्स हुए 1.68 करोड़ रुपए के मामले में भी ऐसा ही हुआ था। तत्कालीन जिम्मेदार अधिकारियों ने मंजूरी ही नहीं दी थी। हालांकि, वरिष्ठ अफसरों ने छोटे कर्मचारियों पर जरूर दोष मढ़ दिया था।

    एक करोड़ रुपए बढ़े

    जनभागीदारी मद की राशि 1 करोड़ रुपए बढ़ी है। इस वित्तीय वर्ष 4 करोड़ रुपए मंजूर हुए हैं। पिछले वर्ष मद के 11 लाख रुपए नहीं आ पाएंगे, वह लैप्स हो गए।

    - संतोष पटेल, जिला योजना अधिकारी

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