Naidunia
    Saturday, December 16, 2017
    PreviousNext

    ऑपरेशन कराना हो तो टांके लगाने वाला धागा साथ में लाएं

    Published: Sat, 17 Jun 2017 03:50 AM (IST) | Updated: Sat, 17 Jun 2017 08:05 PM (IST)
    By: Editorial Team
    morena hospital stitches 2017617 2057 17 06 2017

    मुरैना। जिला अस्पताल में ऑपरेशन कराना है या फिर किसी चोट लगने से हुए घाव में टांके लगवाना है तो आपको बाजार से टांके लगाने वाला धागा लाना पड़ेगा। यदि टांके लगाने वाला धागा नहीं लाएंगे तो न तो आपका ऑपरेशन होगा और न ही घाव में टांके लगाए जाएंगे। इसकी वजह यह है कि जिला अस्पताल में टांके लगाने वाले धागे ही नहीं हैं। ऐसे में डॉक्टर मरीजों का ऑपरेशन करने से बच रहे हैं।

    ऑपरेशन तो दूर घायल होकर आने वाले मरीजों को टांके तक नहीं लगा पा रहे हैं। ऐसे में जिला अस्पताल में मरीजों के ऑपरेशन का काम प्रभावित हो रहा है। ऑपरेशन तभी होता है जब मरीज या उसके परिजन बाजार से टांके लगाने वाला धागा लेकर आते हैं। इसके अलावा अस्पताल में ऑपरेशन के दौरान डॉक्टरों व उन्हें सहायता करने वाला स्टाफ के लिए ग्लब्ज भी नहीं हैं। ऐसे में खाना सर्व करने वे दौरान पहने जाने वाले ग्लब्ज से डॉक्टरों को ऑपरेशन ऑपरेट करना पड़ रहा है।

    उल्लेखनीय है कि जिला अस्पताल में वर्तमान में कई चीजों की कमी हो गई है या दूसरे शब्दों में कहें मरीजों के उपचार में आने वाली जरूरी चीजें खत्म हो गई हैं। मसलन लिक्विड फ्लूड चढ़ाने के लिए केन्युला नहीं है। मरीजों को कन्युएला व ड्रिप सेट बाजार से लाना पड़ रहा था। अब जिला अस्पताल में टांके लगाने वाले धागे सहित ग्लब्ज की कमी हो गई है। इस वजह से अब ऑपरेशन थियेटर में मरीजों के ऑपरेशन नहीं हो पा रहे हैं।

    यह होता है धागे का उपयोग

    किसी भी मरीज का ऑपरेशन होता है तो उसके शरीर के निश्चित अंग को चीर दिया जाता है। ऑपरेशन होने के बाद इस काटे गए हिस्से को धागे से टांके लगाए जाते हैं। यह धागा मेडिकेडेट होता है। जिससे मरीज को इन्फेक्शन न हो। साथ ही घायल होकर आने वाले मरीजों के घावों को जोड़ने के लिए धागे से टांके लगाए जाते हैं।

    दो तरह का होता है ऑपरेशन में उपयोग होने वाला धागा

    ऑपरेशन में दो तरह के धागे का उपयोग टांके लगाने के लिए किया जाता है। मसलन शरीर के अंदर ऑपरेशन के बाद टांके लगाए जाते हैं तो वहां पर ऐसे धागे का उपयोग किया जाता है जो निश्चित समय के बाद अपने आप गल जाता है। जिससे मरीज को परेशानी नहीं होती, लेकिन मरीजों के शरीर के बाहरी हिस्से में जिस धागे से टांके लगाए जाते हैं, टांके में उपयोग होने वाला धागा अपने आप नहीं गलता। बल्कि निश्चित समय के बाद इन्हें काटा जाता है। खासबात यह है कि दोनों ही तरह के धागे अस्पताल में नहीं है। ऐसे में मरीजों के ऑपरेशन प्रभावित हो रहे हैं।

    यह हो रहा है असर

    - ऑपरेशन करने से पहले ही डॉक्टर मरीज व उसके परिजन से बाजार से टांके लगाने में उपयोग होने वाले धागे को मंगा लेते हैं। यदि कोई मरीज लाने की स्थिति में नहीं होता तो उसके ऑपरेशन को या तो टाल देते हैं या फिर उन्हें ग्वालियर के लिए रैफर कर देते हैं।

    - जिला अस्पताल की मेटरनिटी में प्रसूताओं के सिजेरियन भी इस धागा न होने की वजह से प्रभावित हो रहे हैं। महिलाओं के परिजन जब तक धागा नहीं लाते, तब तक उनका सिजेरियन ऑपरेशन नहीं किया जाता।

    सबसे अधिक प्रभावित होते हैं दुर्घटनाओं के घायल

    जिला अस्पताल की इमरजेंसी में आने वाले दुर्घटनाओं के घायल इस कमी से अधिक प्रभावित हो रहे हैं। क्योंकि अक्सर सड़क दुर्घटनाओं में घायल होकर आने वाले मरीजों को टांके लगाने पड़ते हैं। इमरजेंसी में औसतन रोजाना 10 से अधिक मरीजों के टांके लगाने पड़ते हैं। ऐसे में जिन घायलों के साथ परिजन होते हैं, उनके लिए टांके लगाने का धागा तो परिजन स्वयं ले आते हैं। लेकिन अज्ञात लोगों के मामले में स्टाफ के सामने परेशानी हो जाती है। अक्सर स्टाफ दूसरे मरीजों के लाए हुए धागे में से टांके लगाते हैं। जब धागा नहीं होता तो वे भी बाहर से धागा मंगाते हैं। इसके बाद ही मरीज का उपचार करते हैं।

    इन चीजों की भी कमी है अस्पताल में

    जिला अस्पताल में वर्तमान में ड्रिप सेट नहीं है। ड्रिप सेट को भी मरीजों को बाहर से लाना पड़ता है। साथ ही ऑपरेशन में उपयोग होने वाले ग्लब्ज भी नहीं है। इसलिए डॉक्टर परिजनों से खाना सर्व करने वाले ग्लब्ज मंगाकर ऑपरेशन कर रहे हैं।

    टांके लगाने के धागा साहित अन्य सभी चीजों के लिए सप्लाई करने वाली कंपनी को पहले ही ऑर्डर दे दिया था, लेकिन अभी तक सप्लाई आई नहीं है। इसलिए परेशानी आ रही है। एक दो दिन में सप्लाई आ जाएगी। - डॉ. पदमेश उपाध्याय, आरएमओ, मुरैना

    प्रतिक्रिया दें
    English Hindi Characters remaining


    या निम्न जानकारी पूर्ण करें
    नाम*
    ईमेल*
    Word Verification:*
    Please answer this simple math question.
    +=

      जरूर पढ़ें